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क्या लाखा सिंह को ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद टैक्सी चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा?

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क्या लाखा सिंह को ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद टैक्सी चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा?

सारांश

खेलों की दुनिया में सफलता केवल धन और शोहरत नहीं लाती। लाखा सिंह की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक ओलंपियन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जानिए उनकी यात्रा और संघर्ष के बारे में।

मुख्य बातें

खिलाड़ियों के संघर्ष को समझना चाहिए।
सरकारी सहायता की आवश्यकता है।
अनुभव और मेहनत का महत्व।
ओलंपिक खिलाड़ियों की कहानी प्रेरणादायक होती है।
सामाजिक समर्थन की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। खेलों की दुनिया में सफलताओं का मतलब अक्सर धन और प्रसिद्धि होता है। लेकिन जब किसी खिलाड़ी को सरकारी सहायता नहीं मिलती या खेलओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एक खिलाड़ी का उदाहरण लाखा सिंह हैं।

लाखा सिंह का जन्म २ जनवरी १९६५ को लुधियाना के हलवाड़ा में हुआ। बचपन से ही मुक्केबाजी में रुचि रखने वाले लाखा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वह पांच बार के राष्ट्रीय चैंपियन रहे और १९९४ में तेहरान में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। अगले साल भी उन्होंने वही सफलता हासिल की। लाखा ने १९९४ के हिरोशिमा एशियाड में ८१ किलो वर्ग में कांस्य पदक भी जीता।

लाखा सिंह ने १९९६ के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और उन्हें पदक का दावेदार माना गया, लेकिन वह ९१ किलो वर्ग में १७वें स्थान पर रहे।

लाखा ने १९८४ में भारतीय सेना में भर्ती होकर १९९८ में विश्व मिलिटरी मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेना था। लेकिन एक घटना के कारण वह और उनके साथी दीबेंद्र थापा गायब हो गए। सेना ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। यह स्थिति लाखा की जिंदगी का एक कठिन मोड़ साबित हुई।

लाखा ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह और दीबेंद्र एयरपोर्ट से बाहर गए थे लेकिन फिर कभी नहीं मिले। उन्हें एक महीने तक बंदी बना कर रखा गया। बाद में, उन्होंने अमेरिका में विभिन्न काम किए और भारत लौटने के लिए पैसे जुटाने में आठ साल लग गए। २००६ में जब वह अपने गाँव लौटे, तो पता चला कि उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था।

२०१८ में एक रिपोर्ट में कहा गया कि लाखा की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और वह अपनी जीविका के लिए टैक्सी चलाते थे। उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों के बावजूद, मुक्केबाजी संघ या पंजाब सरकार से कोई सहायता नहीं मिली।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने देश का गौरव बढ़ाते हैं लेकिन बाद में सरकारी सहायता की कमी के चलते मुश्किल हालात का सामना करते हैं। लाखा सिंह की यात्रा हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमें अपने खिलाड़ियों की और अधिक सहायता नहीं करनी चाहिए?
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाखा सिंह कब ओलंपिक में गए थे?
लाखा सिंह ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
लाखा सिंह ने कितने राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीते?
लाखा सिंह ने पांच बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती।
लाखा सिंह को टैक्सी क्यों चलानी पड़ी?
लाखा सिंह की आर्थिक स्थिति खराब थी और उन्हें अपनी जीविका के लिए टैक्सी चलानी पड़ी।
लाखा सिंह का जन्म कब हुआ?
लाखा सिंह का जन्म 2 जनवरी 1965 को लुधियाना में हुआ।
लाखा सिंह ने कितने पदक जीते?
लाखा सिंह ने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो रजत और एशियाड में एक कांस्य पदक जीता।
राष्ट्र प्रेस
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