खेल विवादों के त्वरित निपटारे के लिए खेल मंत्रालय ने जारी किए राष्ट्रीय खेल बोर्ड और न्यायाधिकरण नियम 2026
सारांश
मुख्य बातें
खेल मंत्रालय ने 26 मई 2026 को राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल बोर्ड) नियम, 2026 और राष्ट्रीय खेल प्रशासन (राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) नियम, 2026 की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इन दोनों नियमों का उद्देश्य देश में खेलों से जुड़े विवादों को सामान्य सिविल अदालतों के बजाय एक विशेष, तेज़ और किफ़ायती प्रणाली के ज़रिए सुलझाना है। यह कदम भारतीय खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय खेल बोर्ड में एक चेयरपर्सन और दो सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। नामों का चयन एक सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी द्वारा तैयार पैनल से किया जाएगा, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। बोर्ड की प्राथमिक ज़िम्मेदारी देश के खेल संगठनों को मान्यता देना और यह सुनिश्चित करना होगी कि वे वित्तीय, प्रशासनिक एवं नैतिक नियमों का पालन करें।
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण एक विशेष अर्ध-न्यायिक संस्था होगी जो खिलाड़ियों, कोचों, खेल संघों और खेल संस्थाओं के बीच उत्पन्न विवादों की सुनवाई करेगी। न्यायाधिकरण के चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक — जो भी पहले हो — निर्धारित किया गया है।
डिजिटल प्रणाली पर विशेष ज़ोर
नए नियमों में एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करने का प्रावधान है। इस पोर्टल के माध्यम से विवाद-संबंधी आवेदन, नोटिस, जवाब, दस्तावेज़ और स्पष्टीकरण जमा किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, न्यायाधिकरण से संवाद, वर्चुअल सुनवाई, आदेशों का प्रकाशन और समस्त अभिलेखों का रखरखाव भी इसी पोर्टल पर होगा। यह व्यवस्था प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ भौगोलिक बाधाओं को भी कम करेगी।
बोर्ड की अतिरिक्त ज़िम्मेदारियाँ
अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय खेल बोर्ड को कई महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपे गए हैं। बोर्ड नेशनल स्पोर्ट्स इलेक्शन पैनल का एक अद्यतन रजिस्टर तथा सभी मान्यता प्राप्त खेल संस्थाओं की सार्वजनिक सूची बनाए रखेगा। यह खेल संघों के लिए मॉडल नियम और दिशानिर्देश तैयार करेगा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित श्रेष्ठ प्रथाओं को भारतीय संघों तक पहुँचाने की सिफ़ारिश करेगा, तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और सम्मेलन आयोजित करेगा — आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के सहयोग से भी।
हितों के टकराव पर रोक और वित्तीय जवाबदेही
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधिकरण का कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी खेल संस्था या उससे संबद्ध संगठन में कोई पद नहीं ग्रहण कर सकेगा। यह प्रावधान हितों के टकराव को रोकने के लिए रखा गया है।
वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में आय-व्यय विवरण, बैलेंस शीट और अन्य वित्तीय रिपोर्ट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा निर्धारित प्रारूप में तैयार करनी होगी। ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के तीन महीने के भीतर इसे CAG को भेजना अनिवार्य होगा। इसके बाद प्रमाणित खाते और रिपोर्ट केंद्र सरकार के माध्यम से संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — में प्रस्तुत की जाएगी।
आगे की राह
इन नियमों के लागू होने से खिलाड़ियों और खेल संघों को विवाद निपटारे के लिए लंबी अदालती प्रक्रियाओं से राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली स्वतंत्र और समयबद्ध रही, तो यह भारतीय खेल प्रशासन में एक संरचनात्मक सुधार साबित हो सकता है।