प्रणति नायक का ताशकंद वर्ल्ड चैलेंज कप रजत: वायरल बुखार और 7 महीने की चोट के बाद वापसी
सारांश
मुख्य बातें
जिम्नास्ट प्रणति नायक ने ताशकंद एफआईजी वर्ल्ड चैलेंज कप में रजत पदक जीतकर शानदार वापसी की — और यह सफर उतना आसान नहीं था जितना पोडियम पर खड़े होकर लगता है। प्रतियोगिता से ठीक पहले वायरल बुखार की चपेट में आईं प्रणति ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उनके कोच अशोक कुमार मिश्रा की अटूट प्रेरणा ने उन्हें मैट पर उतारा और इतिहास रचवाया।
चोट से वापसी का कठिन सफर
तीन बार की एशियन चैंपियनशिप मेडलिस्ट प्रणति के लिए यह वापसी सात महीने की लंबी पुनर्वास प्रक्रिया के बाद हुई। अक्टूबर 2025 में इंडोनेशिया में आयोजित वर्ल्ड आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप के महिला वॉल्ट क्वालिफिकेशन के दौरान वह गलत तरीके से लैंड कर गईं, जिससे उनके टखने का लिगामेंट टूट गया और उन्हें दूसरे वॉल्ट से पहले ही प्रतियोगिता छोड़नी पड़ी।
कोच मिश्रा के अनुसार, प्रणति ने इस दौरान एक फिजियोथेरेपिस्ट, एक न्यूट्रिशनिस्ट और एक मेंटल ट्रेनर की मदद से अपनी रिकवरी की योजना बनाई। उनके अनुभव और अनुशासन ने उन्हें उम्मीद से कहीं तेज़ी से फिट किया।
वायरल बुखार ने बढ़ाई मुश्किलें
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) द्वारा शुक्रवार, 29 मई को आयोजित मीडिया बातचीत में प्रणति ने बताया, 'सच कहूं तो, प्रतियोगिता से पहले मुझे वायरल बुखार हो गया था। मेरी ट्रेनिंग बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी। प्रतियोगिता से ठीक दो सप्ताह पहले तक मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही थी। बीमार पड़ने के बाद मैं उम्मीद खोने लगी थी।'
बुखार के कारण उन्होंने अभ्यास की संख्या भी घटा दी। जहाँ सामान्य तैयारी में वह 17 से 20 वॉल्ट तक का अभ्यास करती हैं, वहीं इस बार ऊर्जा बचाने के लिए उन्होंने केवल आठ वॉल्ट का अभ्यास किया। उनका लक्ष्य था — आत्मविश्वास बनाए रखना, सही लैंडिंग करना और इस अवसर का पूरा फायदा उठाना।
कोच की प्रेरणा बनी निर्णायक
प्रणति ने अपने कोच अशोक कुमार मिश्रा को इस सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने कहा, 'मेरे कोच मुझे लगातार प्रेरित करते रहे और पूछते रहे — 'तुम हार क्यों मान रही हो? तुम यह कर सकती हो।' उन्होंने मुझे बेहतरीन ट्रेनिंग दी।'
कोच मिश्रा ने भी अपनी खिलाड़ी पर भरोसे की बात कही: 'आमतौर पर, किसी ऐसे एथलीट के लिए जिसने छह से सात महीने से कोई मुकाबला नहीं खेला हो, प्रदर्शन की कोई गारंटी नहीं होती। लेकिन मुझे पूरा यकीन था कि एक बार जब वह शारीरिक रूप से फिट हो जाएगी, तो वह अपना 100 प्रतिशत देगी।'
बदला पूरा प्रतिस्पर्धी कैलेंडर
कोच मिश्रा ने बताया कि चोट के कारण प्रणति का पूरा प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम बदलना पड़ा। मूल योजना के अनुसार उन्हें चार वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना था, जो संभव नहीं हो पाया। सीनियर नेशनल्स से पहले भी वायरल बुखार और टॉन्सिलिटिस के कारण उन्हें बाहर बैठना पड़ा।
इसके बाद जिम्नास्टिक्स फेडरेशन से विशेष अनुरोध किया गया, और प्रणति की क्षमता को देखते हुए उन्हें सीधे वर्ल्ड चैलेंज कप में भाग लेने की अनुमति मिली — और उन्होंने इस विश्वास को रजत पदक से सार्थक किया।
आगे की राह
इस रजत पदक के साथ प्रणति ने न केवल अपनी वापसी की घोषणा की है, बल्कि यह भी साबित किया है कि गंभीर चोट और बीमारी के बाद भी शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा संभव है। यह जीत उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देगी और आने वाले अंतरराष्ट्रीय सत्र के लिए भारतीय जिम्नास्टिक्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है।