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अचंत शरत कमल: 4 साल की उम्र से टेबल टेनिस, कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 पदक और 10 बार नेशनल चैंपियन

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अचंत शरत कमल: 4 साल की उम्र से टेबल टेनिस, कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 पदक और 10 बार नेशनल चैंपियन

सारांश

चेन्नई में जन्मे अचंत शरत कमल ने 4 साल की उम्र में रैकेट थामा और भारतीय टेबल टेनिस को नई ऊँचाइयाँ दीं — कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 पदक, 10 बार नेशनल चैंपियन, 5 ओलंपिक और पेरिस में ध्वजवाहक का गौरव। यह सफर विरासत, मेहनत और जुनून की अनूठी मिसाल है।

मुख्य बातें

अचंत शरत कमल का जन्म 12 जुलाई 1982 को चेन्नई में हुआ; पिता और चाचा दोनों राज्य-स्तरीय खिलाड़ी और कोच रहे।
महज 4 साल की उम्र में टेबल टेनिस की ट्रेनिंग शुरू; 2002 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में चयन।
कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 13 पदक , जिनमें 7 स्वर्ण शामिल; 2006 और 2022 में पुरुष एकल स्वर्ण।
करियर में 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियन — भारत में किसी अन्य खिलाड़ी ने यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ा।
कुल 5 ओलंपिक में भागीदारी; पेरिस ओलंपिक में भारतीय दल के ध्वजवाहक ।
सरकार ने अर्जुन पुरस्कार (2004) , पद्म श्री (2019) और खेल रत्न पुरस्कार (2022) से सम्मानित किया।

अचंत शरत कमल भारतीय टेबल टेनिस के सबसे चमकदार नाम हैं — एक ऐसे खिलाड़ी जिन्होंने 4 साल की उम्र से रैकेट थामा और दशकों की कड़ी मेहनत से देश को कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 पदक दिलाए। 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियन बनने का उनका रिकॉर्ड भारतीय टेबल टेनिस में अब तक अटूट है।

विरासत में मिला खेल, बचपन से मिली दिशा

शरत कमल का जन्म 12 जुलाई 1982 को चेन्नई में हुआ। उनके पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव दोनों राज्य-स्तरीय टेबल टेनिस खिलाड़ी और कोच रहे। इस खेल-परिवार के माहौल ने शरत को महज 4 वर्ष की आयु में ही टेबल टेनिस की ट्रेनिंग की राह पर डाल दिया। पढ़ाई में भी प्रतिभाशाली रहे शरत ने अंततः अपना पूरा करियर इसी खेल को समर्पित करने का निर्णय लिया — और यह फैसला भारतीय खेल इतिहास के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान का सफर

साल 2002 में शरत को पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत की 16 सदस्यीय टीम में स्थान मिला। इसके बाद 2003 में वह पहली बार सीनियर नेशनल टेबल टेनिस चैंपियन बने। अपने करियर में उन्होंने यह खिताब कुल 10 बार जीता — एक ऐसा कीर्तिमान जो भारत में किसी अन्य खिलाड़ी ने नहीं छुआ। 2004 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर विश्व मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक दबदबा

कॉमनवेल्थ गेम्स शरत के करियर का सबसे गौरवशाली अध्याय रहा। उन्होंने इस मंच पर कुल 13 पदक अर्जित किए, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2006 और 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में शरत का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब उन्होंने पुरुष एकल में स्वर्ण पदक जीता। एकल के अलावा युगल स्पर्धाओं में भी उन्होंने भारत की झोली में कई पदक डाले। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय टेबल टेनिस को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की जरूरत थी — और शरत ने यह काम अकेले दम पर कर दिखाया।

पाँच ओलंपिक और ध्वजवाहक का सम्मान

शरत ने अपने करियर में कुल 5 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनका पहला ओलंपिक 2004 एथेंस में था। पेरिस ओलंपिक में उन्हें भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया — जो किसी खिलाड़ी के लिए सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। गौरतलब है कि यह Nवीं बार था जब किसी टेबल टेनिस खिलाड़ी को भारतीय दल का नेतृत्व सौंपा गया।

सरकारी सम्मान और विरासत

टेबल टेनिस में उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने शरत को 2004 में अर्जुन पुरस्कार, 2019 में पद्म श्री और 2022 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा। शरत कमल की यात्रा यह साबित करती है कि सही परिवेश, अनुशासन और जुनून मिलकर एक साधारण चेन्नई के बच्चे को भारतीय खेल का महानायक बना सकते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए वह न केवल एक खिलाड़ी, बल्कि एक प्रेरणा-स्तंभ हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि इतने वर्षों में भारतीय टेबल टेनिस ने शरत का उत्तराधिकारी क्यों नहीं तैयार किया। पेरिस ओलंपिक में ध्वजवाहक बनना सम्मान की पराकाष्ठा है, परंतु यह भी संकेत है कि हम अभी तक एक खेल में एक ही महानायक पर निर्भर हैं। जब तक भारत टेबल टेनिस में गहरी खिलाड़ी पाइपलाइन नहीं बनाता, शरत की विरासत प्रेरणा से अधिक एक अपवाद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अचंत शरत कमल कौन हैं और वे क्यों प्रसिद्ध हैं?
अचंत शरत कमल भारत के सर्वश्रेष्ठ टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 13 पदक और 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जीती है। वह 5 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और पेरिस ओलंपिक में भारतीय दल के ध्वजवाहक रहे।
शरत कमल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कितने पदक जीते हैं?
शरत कमल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 13 पदक जीते हैं, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2006 और 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने पुरुष एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
शरत कमल ने टेबल टेनिस कब से शुरू किया?
शरत कमल ने महज 4 साल की उम्र से टेबल टेनिस की ट्रेनिंग शुरू की। उनके पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव राज्य-स्तरीय खिलाड़ी और कोच थे, जिससे उन्हें खेल का माहौल घर में ही मिला।
शरत कमल को कौन-कौन से सरकारी पुरस्कार मिले हैं?
भारत सरकार ने शरत कमल को 2004 में अर्जुन पुरस्कार, 2019 में पद्म श्री और 2022 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया है।
शरत कमल का 10 बार नेशनल चैंपियन बनने का रिकॉर्ड क्यों खास है?
शरत कमल भारत के एकमात्र टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जीती है। यह रिकॉर्ड भारतीय टेबल टेनिस इतिहास में अब तक किसी अन्य खिलाड़ी ने नहीं तोड़ा, जो इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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