संजू सैमसन ने याद किया 14 साल में KKR ट्रायल: 'माता-पिता के त्याग ने मुझे गंभीर बनाया'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती और संघर्षपूर्ण दिनों को साझा किया है। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के सिलेक्शन ट्रायल में भाग लिया था — और सामने बैठे थे भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और तत्कालीन हेड कोच जॉन बुकानन। सैमसन ने कहा कि माता-पिता के अपार त्याग ने उन्हें बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गंभीर और केंद्रित बना दिया था।
14 साल में गांगुली के सामने ट्रायल
जियोस्टार के कार्यक्रम 'सुपरस्टार्स' में सैमसन ने बताया कि अंडर-13 टूर्नामेंट में केरल के लिए अच्छे प्रदर्शन के बाद उनके कोच बीजू जॉर्ज उन्हें KKR के सिलेक्शन ट्रायल में ले गए। उन्होंने कहा, "एक 14 साल के बच्चे के लिए यह बहुत ही अजीब था। उस समय सौरव गांगुली KKR के कप्तान थे, और जॉन बुकानन हेड कोच थे।" उस ट्रायल में प्रदर्शन के आधार पर सैमसन को KKR 'बी' टीम में शामिल किया गया और उन्हें श्रीलंका दौरे पर भी जाने का अवसर मिला।
दिल्ली से तिरुवनंतपुरम: परिवार का बड़ा फैसला
सैमसन ने बताया कि उनके परिवार ने दिल्ली से सब कुछ छोड़कर तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) शिफ्ट होने का कठिन निर्णय लिया। मिड-टर्म में आने की वजह से किसी भी स्कूल ने दाखिला देने से मना कर दिया। अंततः उनके पिता के एक परिचित की मदद से सेंट जोसेफ स्कूल, त्रिवेंद्रम में प्रवेश मिला। सैमसन ने कहा, "उन्होंने कहा, 'कोई बात नहीं, अगले दिन बच्चों के लिए यूनिफॉर्म ले आओ और उन्हें सीधे स्कूल भेज दो।' इस तरह त्रिवेंद्रम में यह सब शुरू हुआ।"
बीजू जॉर्ज से कैसे हुई मुलाकात
सैमसन के पिता विश्वनाथन दिल्ली से ही केरल में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में लगातार जानकारी जुटाते रहते थे। उनके मित्र अली भाई ने उन्हें बीजू जॉर्ज — जो अब KKR में टैलेंट स्काउटिंग के प्रमुख हैं — के बारे में बताया। पहले ही दिन ट्रायल में केवल 10 गेंद की बल्लेबाजी देखने के बाद बीजू जॉर्ज ने संजू और उनके भाई को चुन लिया। संजू के बड़े भाई को तुरंत वायनाड जिला टीम के लिए भेजा गया, जबकि संजू को अंडर-13 मैचों की प्रतीक्षा करने को कहा गया।
माता-पिता के त्याग ने दी सबसे बड़ी प्रेरणा
सैमसन ने भावुक होते हुए कहा, "माता-पिता के त्याग ने कम उम्र से ही हमें क्रिकेट में सफल होने की सबसे बड़ी प्रेरणा दी। जब आप अपने पिता को आपके लिए अपनी पूरी दुनिया बदलते हुए देखते हैं, और आपकी माँ हर दिन अपनी नींद कुर्बान करती हैं, तो आपको एहसास होता है कि आप एक भी दिन की छुट्टी नहीं ले सकते।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुबह अभ्यास, स्कूल और फिर ट्रेनिंग का यह रूटीन उन्हें बेहद पसंद था और साथियों का सम्मान उन्हें और प्रेरित करता था।
लक्ष्य-केंद्रित बचपन
सैमसन ने स्पष्ट किया कि जहाँ अन्य बच्चे मनोरंजन के लिए क्रिकेट खेलते थे, वे एक सुनिश्चित उद्देश्य लेकर मैदान पर उतरते थे। उनके शब्दों में, "दूसरे बच्चे मजे के लिए आते थे, लेकिन मैं एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ क्रिकेट खेलने जाता था।" यह मानसिकता ही आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय टीम तक ले गई।