टी.सी. योहानन: इंजेक्शन लेकर मैदान में उतरे, 1974 एशियाई खेलों में 8.07 मीटर छलांग से जीता गोल्ड

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टी.सी. योहानन: इंजेक्शन लेकर मैदान में उतरे, 1974 एशियाई खेलों में 8.07 मीटर छलांग से जीता गोल्ड

सारांश

पैर की हड्डी टूटी थी, दर्द असहनीय था — फिर भी टी.सी. योहानन ने इंजेक्शन लेकर तेहरान के ट्रैक पर कदम रखा और 8.07 मीटर की छलांग से एशियाई रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड 30 साल तक अटूट रहा। एक इंजीनियर से एशियाई चैंपियन बने योहानन की कहानी भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायक गाथाओं में से एक है।

मुख्य बातें

योहानन का जन्म 19 मई 1947 को केरल के कोल्लम जिले में हुआ।
1974 तेहरान एशियाई खेलों में 8.07 मीटर की छलांग के साथ एशियाई रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता।
पैर के अंगूठे की हड्डी में चोट के बावजूद दर्द-निवारक इंजेक्शन लेकर प्रतिस्पर्धा में उतरे।
उनका एशियाई रिकॉर्ड 30 वर्षों तक अटूट रहा।
भारत सरकार ने 1974 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया; 1978 में चोट के कारण संन्यास लिया।

लंबी कूद के दिग्गज थडायुविला चंदापिल्लई योहानन (टी.सी. योहानन) ने 1974 के तेहरान एशियाई खेलों में 8.07 मीटर की ऐतिहासिक छलांग लगाकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया — और यह उपलब्धि उन्होंने पैर के अंगूठे की हड्डी में फ्रैक्चर के बावजूद, दर्द-निवारक इंजेक्शन लेकर हासिल की। उनका यह एशियाई रिकॉर्ड अगले 30 वर्षों तक अटूट बना रहा।

एक गाँव से एशियाई शिखर तक का सफर

टी.सी. योहानन का जन्म 19 मई 1947 को केरल के कोल्लम जिले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। बचपन से ही कूदने का शौक रखने वाले योहानन की प्रतिभा की पहली परीक्षा एक नहर ने ली — जब वे उसे पार करने में विफल रहे, तो उनके पिता ने एक गिलास नींबू पानी का इनाम रखा। उस छोटे से प्रोत्साहन ने एक बड़े करियर की नींव रखी।

हालाँकि, योहानन ने शुरुआत में खेल को पेशे के रूप में नहीं अपनाया। उन्होंने भिलाई जाकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और नौकरी में जुट गए। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

बेंगलुरु से मिली पहचान, फिर बदला रास्ता

नौकरी के दौरान बेंगलुरु में एक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, जिसने उन्हें चर्चा में ला दिया। इसके बाद योहानन ने लंबी कूद को ही अपना लक्ष्य बना लिया। अनथक परिश्रम और निरंतर अभ्यास के दम पर वे इस खेल में माहिर होते चले गए।

1974 उनके करियर का सबसे स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ। उसी वर्ष उन्हें भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से भी नवाज़ा — यह सम्मान उनकी उपलब्धियों की राष्ट्रीय स्वीकृति थी।

दर्द को दरकिनार कर रचा इतिहास

तेहरान एशियाई खेलों के दौरान योहानन के पैर के अंगूठे की हड्डी में चोट आ गई थी। दर्द इतना तीव्र था कि सामान्य परिस्थितियों में कोई भी खिलाड़ी मैदान छोड़ देता। लेकिन योहानन ने देश के लिए खेलने को प्राथमिकता दी — दर्द-निवारक इंजेक्शन लेकर वे ट्रैक पर उतरे और 8.07 मीटर की छलांग के साथ न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि एशियाई रिकॉर्ड भी स्थापित किया।

गौरतलब है कि यह रिकॉर्ड पूरे 30 वर्षों तक कोई तोड़ नहीं सका — यह इस उपलब्धि की असाधारणता को रेखांकित करता है।

ओलंपिक प्रतिनिधित्व और चोट का अंत

योहानन ने 1976 के मॉन्ट्रियल ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि, 1978 में गंभीर चोट ने उन्हें खेल से संन्यास लेने पर मजबूर कर दिया। उनका करियर भले ही चोट से थमा, लेकिन उनकी विरासत भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अमिट रही।

टी.सी. योहानन की विरासत

योहानन का जीवन भारतीय एथलीटों की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने सीमित संसाधनों, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और व्यावसायिक ढाँचे की कमी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उनकी कहानी आज भी युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस युग की भारतीय एथलेटिक्स की विडंबना का भी आईना है — जहाँ खिलाड़ियों को शारीरिक पीड़ा सहकर, बिना पर्याप्त चिकित्सा सहायता के, देश के लिए मैदान में उतरना पड़ता था। 30 वर्षों तक अटूट रहा उनका रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और जज़्बा संसाधनों की कमी को पाट सकते हैं — लेकिन यह सवाल भी उठता है कि यदि उन्हें आधुनिक खेल विज्ञान और चिकित्सा सुविधाएँ मिलती, तो वे और कितना आगे जा सकते थे। आज जब भारत खेलों में अरबों रुपये निवेश कर रहा है, योहानन जैसे अग्रदूतों की विरासत को केवल स्मरण नहीं, बल्कि संस्थागत सम्मान की ज़रूरत है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टी.सी. योहानन कौन थे?
टी.सी. योहानन यानी थडायुविला चंदापिल्लई योहानन भारत के महान लंबी कूद एथलीट थे, जिन्होंने 1974 तेहरान एशियाई खेलों में 8.07 मीटर की छलांग के साथ एशियाई रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। उनका यह रिकॉर्ड 30 वर्षों तक अटूट रहा।
1974 एशियाई खेलों में टी.सी. योहानन ने क्या उपलब्धि हासिल की?
तेहरान में आयोजित 1974 एशियाई खेलों में योहानन ने 8.07 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई रिकॉर्ड स्थापित किया और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। विशेष बात यह थी कि उन्होंने यह उपलब्धि पैर के अंगूठे की हड्डी में चोट के बावजूद दर्द-निवारक इंजेक्शन लेकर हासिल की।
टी.सी. योहानन को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने टी.सी. योहानन को 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया, जो उसी वर्ष की उनकी एशियाई खेलों की ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में दिया गया।
टी.सी. योहानन ने खेल से संन्यास क्यों लिया?
1978 में गंभीर चोट के कारण टी.सी. योहानन को लंबी कूद से संन्यास लेना पड़ा। इससे पहले वे 1976 के मॉन्ट्रियल ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे।
टी.सी. योहानन का एथलेटिक्स करियर कैसे शुरू हुआ?
योहानन ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी के दौरान बेंगलुरु में एक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता, जिसके बाद उन्होंने लंबी कूद को पेशेवर रूप से अपनाने का निर्णय लिया। बचपन में केरल के कोल्लम जिले में नहर पार करने की कोशिश ने उनकी प्रतिभा को पहली बार उजागर किया था।
राष्ट्र प्रेस
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