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विश्वनाथन आनंद का पाँचवाँ विश्व खिताब: 2012 में मॉस्को में गेलफैंड को टाईब्रेकर में हराया

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विश्वनाथन आनंद का पाँचवाँ विश्व खिताब: 2012 में मॉस्को में गेलफैंड को टाईब्रेकर में हराया

सारांश

30 मई 2012 को मॉस्को में विश्वनाथन आनंद ने बोरिस गेलफैंड को टाईब्रेकर में 2.5-1.5 से हराकर पाँचवाँ विश्व खिताब जीता — यह उनका लगातार चौथा ताज था। भारत के पहले ग्रैंडमास्टर और खेल रत्न पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी आनंद ने देश में शतरंज की एक नई पीढ़ी को जन्म दिया।

मुख्य बातें

विश्वनाथन आनंद ने 30 मई 2012 को मॉस्को में बोरिस गेलफैंड को हराकर पाँचवाँ विश्व शतरंज खिताब जीता।
शुरुआती 12 क्लासिकल गेम 6-6 से ड्रॉ रहे; खिताब का फैसला टाईब्रेकर में 2.5-1.5 से हुआ।
टाईब्रेकर के दूसरे गेम में आनंद ने 77 चालों में गेलफैंड को मात दी — यह निर्णायक मोड़ था।
आनंद के विश्व खिताब: 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 — करियर का लगातार चौथा खिताब।
आनंद 1988 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने और 1987 में विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी।
राजीव गांधी खेल रत्न (1991-92) पाने वाले पहले भारतीय; साथ ही पद्म विभूषण , पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित।

विश्वनाथन आनंद ने 30 मई 2012 को मॉस्को में आयोजित विश्व शतरंज चैंपियनशिप में इसराइल के बोरिस गेलफैंड को पराजित कर अपना पाँचवाँ विश्व खिताब जीता — और लगातार तीसरी बार अपने ताज की सफलतापूर्वक रक्षा की। यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसने आनंद को अपने करियर का चौथा लगातार खिताब भी दिलाया।

मुकाबले का रोमांचक घटनाक्रम

आनंद और गेलफैंड के बीच खेले गए शुरुआती 12 क्लासिकल गेम 6-6 की बराबरी पर समाप्त हुए, जिससे खिताब का फैसला टाईब्रेकर पर छोड़ना पड़ा। टाईब्रेकर के पहले गेम में दोनों खिलाड़ियों ने 33 चालों तक संघर्ष किया और मुकाबला ड्रॉ रहा। दूसरे गेम में आनंद ने 77 चालों में गेलफैंड को मात दी — यह टाईब्रेकर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

अगले दो गेम ड्रॉ रहने के बाद आनंद ने 2.5-1.5 के स्कोर से टाईब्रेकर जीतकर विश्व चैंपियन का ताज पहना। यह मुकाबला अपनी तीव्रता और धैर्य की परीक्षा के लिए शतरंज इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

आनंद का विश्व खिताबों का सफर

आनंद ने अपना पहला विश्व चैंपियनशिप खिताब वर्ष 2000 में जीता था। इसके बाद उन्होंने 2007, 2008 और 2010 में लगातार तीन बार यह उपलब्धि हासिल की। 2012 का खिताब उनके करियर का पाँचवाँ और लगातार चौथा विश्व खिताब था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया जब गेलफैंड जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी।

भारतीय शतरंज में आनंद की ऐतिहासिक भूमिका

विश्वनाथन आनंद भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर हैं। उन्होंने मात्र 18 वर्ष की आयु में 1988 में यह दर्जा प्राप्त किया। इससे एक वर्ष पहले, 1987 में, वे विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी बने थे — एक ऐसी उपलब्धि जिसने भारत में शतरंज की नींव रखी।

आनंद ने उस खेल को भारत में पहचान दिलाई, जिसकी चर्चा एक समय बेहद सीमित थी। उनकी सफलता ने देश में शतरंज खिलाड़ियों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया।

पुरस्कार और सम्मान

आनंद को 1991-92 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) से सम्मानित किया गया — यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से भी नवाजा जा चुका है। ये सम्मान उनके खेल और देश के लिए उनके योगदान की व्यापक स्वीकृति के प्रतीक हैं।

आनंद की विरासत केवल खिताबों तक सीमित नहीं — उन्होंने भारत को वैश्विक शतरंज मानचित्र पर स्थायी रूप से अंकित किया है, और उनकी राह पर चलते हुए आज भारत शतरंज की महाशक्ति बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आनंद की मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि आनंद की विरासत का असली मापदंड खिताब नहीं, बल्कि वह पारिस्थितिकी तंत्र है जो उन्होंने पीछे छोड़ा — आज भारत के पास डी. गुकेश जैसे विश्व चैंपियन हैं, जो आनंद की प्रेरणा से ही उभरे।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वनाथन आनंद ने 2012 में पाँचवाँ विश्व खिताब कैसे जीता?
आनंद ने मॉस्को में बोरिस गेलफैंड के साथ खेले गए 12 क्लासिकल गेम 6-6 से ड्रॉ रहने के बाद टाईब्रेकर में 2.5-1.5 से जीत हासिल की। टाईब्रेकर के दूसरे गेम में 77 चालों की जीत निर्णायक साबित हुई।
विश्वनाथन आनंद कुल कितनी बार विश्व शतरंज चैंपियन बने?
विश्वनाथन आनंद पाँच बार विश्व शतरंज चैंपियन बने — 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 में। 2007 से 2012 के बीच के चार खिताब लगातार थे।
विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर कब बने?
आनंद ने 1988 में मात्र 18 वर्ष की आयु में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया और भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर बने। इससे एक वर्ष पहले 1987 में वे विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी भी बने थे।
आनंद को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं?
आनंद को 1991-92 में राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) से सम्मानित किया गया — यह पुरस्कार पाने वाले वे पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से भी नवाजा जा चुका है।
30 मई की तारीख आनंद के करियर में क्यों खास है?
30 मई 2012 को ही आनंद ने मॉस्को में बोरिस गेलफैंड को हराकर अपना पाँचवाँ और करियर का लगातार चौथा विश्व खिताब जीता था। यह तारीख भारतीय शतरंज इतिहास में एक मील के पत्थर के रूप में दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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