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एशियन गेम्स रेसलिंग ट्रायल्स में WFI की बड़ी चूक, विनेश फोगट के बाउट में तकनीकी गड़बड़ी से उठे सवाल

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एशियन गेम्स रेसलिंग ट्रायल्स में WFI की बड़ी चूक, विनेश फोगट के बाउट में तकनीकी गड़बड़ी से उठे सवाल

सारांश

एशियन गेम्स रेसलिंग ट्रायल्स में WFI का प्रशासन कठघरे में — विनेश फोगट के बाउट में तकनीकी गड़बड़ियाँ, असंगत रेफरिंग और बार-बार रुकावटें। पूर्व पहलवानों ने BCCI को आदर्श बताते हुए कहा कि विश्वस्तरीय पहलवानों को विश्वस्तरीय व्यवस्था मिलनी चाहिए।

मुख्य बातें

इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में 31 मई को एशियन गेम्स रेसलिंग ट्रायल्स में तकनीकी, प्रशासनिक और रेफरिंग स्तर पर गंभीर खामियाँ सामने आईं।
53 किलोग्राम वर्ग में विनेश फोगट बनाम निशु के बहुप्रतीक्षित बाउट में बार-बार तकनीकी रुकावटें आईं और मुकाबला तय समय से अधिक खिंचा।
पूर्व पहलवानों ने WFI की तुलना BCCI से करते हुए कहा कि भारतीय कुश्ती संघ को क्रिकेट बोर्ड जैसी पेशेवर कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहाँ भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वस्तरीय प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं सहयोग तंत्र अभी भी उस स्तर से पीछे है।
ट्रायल्स के अंत में सबसे बड़ी बहस चयन परिणामों पर नहीं, बल्कि आयोजन की अव्यवस्था पर केंद्रित रही।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के आयोजन कौशल पर 31 मई को उस समय गंभीर सवाल उठे जब नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एशियन गेम्स के रेसलिंग ट्रायल्स में प्रशासनिक, तकनीकी और रेफरिंग स्तर पर एक के बाद एक खामियाँ सामने आईं। जो आयोजन भारत की श्रेष्ठ महिला पहलवानों को राष्ट्रीय टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते दिखाने का अवसर था, वह अव्यवस्था का प्रतीक बन गया।

मुख्य घटनाक्रम

सबसे चर्चित मामला 53 किलोग्राम वर्ग में विनेश फोगट और निशु के बीच हुए बहुप्रतीक्षित ट्रायल बाउट का रहा। इस मुकाबले में बार-बार तकनीकी रुकावटें आईं, जिससे बाउट तय समय से काफी अधिक खिंच गया। पहलवान, कोच और दर्शक — सभी को अधिकारियों के गड़बड़ियाँ सुलझाने का इंतजार करना पड़ा।

बार-बार होने वाले इन व्यवधानों ने न केवल मुकाबले की लय तोड़ी, बल्कि सीजन के सबसे अहम चयन आयोजनों में से एक के लिए आयोजकों की तैयारी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए। कई बाउट्स में रेफरी के विवादास्पद हस्तक्षेप और असंगत निर्णयों के कारण लंबी देरी हुई, और पहलवानों व कोचों को प्रतियोगिता के निर्णायक चरण में भी स्पष्टीकरण के लिए भटकना पड़ा।

रेसलिंग बिरादरी की प्रतिक्रिया

खेल जगत से जुड़े कई लोगों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का उदाहरण देते हुए WFI की आलोचना की। एक पूर्व पहलवान ने कहा, 'WFI को BCCI से बहुत कुछ सीखना है। क्रिकेट पेशेवर तरीके से चलता है — वे तकनीक में निवेश करते हैं, अधिकारियों को प्रशिक्षित करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि आयोजन सुचारू रूप से हों। कुश्ती में अक्सर ऐसा लगता है कि 'सब कुछ बस किसी तरह चल रहा है'।'

एक अन्य पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवान ने सवाल उठाया, 'हमारे पास ठीक से प्रशिक्षित रेफरी, सक्षम तकनीकी स्टाफ और भरोसेमंद उपकरण क्यों नहीं हो सकते? किसी भी बड़े खेल आयोजन के लिए ये बुनियादी जरूरतें हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वस्तरीय प्रदर्शन कर पदक जीत रहे हैं।

प्रशासन पर गहरे सवाल

पूर्व पहलवानों का मानना है कि ये दृश्य खेल प्रशासन के भीतर एक गहरी संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करते हैं। गौरतलब है कि जहाँ भारतीय पहलवान विश्व चैम्पियनशिप और ओलंपिक में देश का नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं उन्हें सहयोग देने वाला तंत्र अभी भी विश्वस्तरीय मानकों से कोसों दूर बताया जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि BCCI ने दशकों में जो व्यावसायिक ढाँचा खड़ा किया है — प्रौद्योगिकी में निवेश, अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण, और आयोजन प्रबंधन के उच्च मानक — वह WFI के लिए एक व्यावहारिक मॉडल हो सकता है।

आम जनता और खेल जगत पर असर

ट्रायल्स के समापन तक, सबसे बड़ी बहस इस बात पर नहीं थी कि एशियन गेम्स दस्ते में किसने जगह बनाई — बल्कि इस बात पर थी कि एक महत्वपूर्ण रेसलिंग आयोजन को पहले ही अव्यवस्था में क्यों पड़ने दिया गया। पहलवान मुकाबले के लिए तैयार थे; कई लोगों को लगा कि आयोजक नहीं थे।

क्या होगा आगे

खेल प्रेमियों और पूर्व पहलवानों की ओर से WFI पर दबाव बढ़ता दिख रहा है कि वह अपने आयोजन मानकों में आमूल सुधार करे। यह देखना होगा कि फेडरेशन इस आलोचना को गंभीरता से लेते हुए भविष्य के आयोजनों में बदलाव लाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उनके चयन ट्रायल्स में बुनियादी तकनीकी और रेफरिंग मानकों की विफलता अक्षम्य है। BCCI की सफलता का राज केवल पैसा नहीं, बल्कि जवाबदेही और व्यवस्थागत निवेश है — एक सबक जो WFI को अभी तक नहीं मिला। जब तक फेडरेशन पहलवानों के प्रदर्शन को उसी गंभीरता से नहीं लेती जितनी गंभीरता से पहलवान खुद लेते हैं, तब तक ऐसी शर्मनाक स्थितियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स रेसलिंग ट्रायल्स में क्या गड़बड़ी हुई?
31 मई को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित ट्रायल्स में तकनीकी खराबी, असंगत रेफरिंग और बार-बार मुकाबले रुकने की समस्याएँ सामने आईं। विनेश फोगट बनाम निशु के 53 किलोग्राम वर्ग के बाउट में यह सबसे अधिक स्पष्ट रूप से दिखा।
WFI की तुलना BCCI से क्यों की जा रही है?
पूर्व पहलवानों और खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि BCCI ने तकनीक, अधिकारी प्रशिक्षण और आयोजन प्रबंधन में जो पेशेवर मानक स्थापित किए हैं, वैसे ही मानक WFI को भी अपनाने चाहिए। उनका मानना है कि विश्वस्तरीय पहलवानों को विश्वस्तरीय प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए।
विनेश फोगट के ट्रायल बाउट में क्या हुआ?
53 किलोग्राम वर्ग में विनेश फोगट और निशु के बीच बहुप्रतीक्षित बाउट में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण बार-बार रुकावट आई और मुकाबला निर्धारित समय से अधिक खिंच गया। इससे पहलवानों, कोचों और दर्शकों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
इन खामियों का भारतीय कुश्ती पर क्या असर पड़ता है?
आलोचकों का कहना है कि ऐसी खामियाँ उन पहलवानों के मनोबल और तैयारी पर असर डालती हैं जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही, इससे WFI की विश्वसनीयता और भविष्य के आयोजनों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।
WFI इन समस्याओं को कैसे सुधार सकती है?
पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवानों के अनुसार, WFI को प्रशिक्षित रेफरी, विश्वसनीय तकनीकी उपकरण और सक्षम आयोजन प्रबंधन में निवेश करना होगा। BCCI का मॉडल — जहाँ जवाबदेही और व्यवस्थागत निवेश को प्राथमिकता दी जाती है — एक व्यावहारिक उदाहरण के रूप में सामने रखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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