1 नवंबर 2026 का पंचांग: साध्य योग दोपहर 2:39 तक, रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 1 नवंबर 2026 (रविवार) को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2:51 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी। इस दिन साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक विद्यमान रहेगा और दिशाशूल पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा, अतः इन दिशाओं में यात्रा से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय का विवरण
कार्तिक कृष्ण सप्तमी तिथि शनिवार शाम 4:57 बजे से प्रारंभ होकर रविवार दोपहर 2:51 बजे तक रहेगी। तत्पश्चात अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 2 नवंबर दोपहर 1:10 बजे तक चलेगी। रविवार को सूर्योदय सुबह 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम 5:44 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 11:52 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 12:41 बजे होगा।
नक्षत्र एवं ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) और स्वामी राहु माने जाते हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की उपस्थिति से जातकों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रेरणा बलवती होती है।
सूर्य तुला राशि में रहेंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का नीचस्थ होना कहा जाता है। तुला वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन है, जो सूर्य के अग्नि स्वभाव के प्रतिकूल है। इस स्थिति में आत्मबल में कुछ कमी महसूस हो सकती है और निर्णय लेना कठिन हो सकता है। चंद्र देव कर्क राशि में रहेंगे — यह चंद्रमा की स्वयं की राशि है, अतः यहाँ चंद्रमा अत्यंत प्रभावशाली रहते हैं और जातकों की कल्पना शक्ति, कला एवं रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
शुभ मुहूर्त: साध्य योग, अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक रहेगा। यह 27 नित्य योगों में 22वाँ योग है। 'साध्य' का अर्थ है — जो प्राप्त करने योग्य हो। इसकी देवी माता सावित्री (सरस्वती) और प्रमुख ग्रह बुध माने जाते हैं। इस योग में कठिन कार्य भी सहजता से पूर्ण होने की मान्यता है। साध्य योग के उपरांत शुभ योग आरंभ होगा।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ 48 मिनट का काल है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होता है। मान्यता है कि इस बेला में किए गए कार्यों से सभी दोष स्वतः नष्ट होते हैं। रात्रि 10:23 बजे से 11:55 बजे तक अमृतकाल रहेगा, जिसे नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
रविवार को राहुकाल शाम 4:21 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा। यह सूर्योदय-सूर्यास्त के बीच के समय का आठवाँ भाग होता है और किसी भी नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक रहेगा — यह समय नए कार्य, यात्रा और वित्तीय लेन-देन के लिए वर्जित माना जाता है। गुलिक काल दोपहर 2:57 बजे से 4:21 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं। इस काल में नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए, हालाँकि बैंक में जमा, दान और निवेश इस काल में स्वीकार्य माने गए हैं।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
रविवार को दिशाशूल पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि यदि इन दिशाओं में यात्रा अनिवार्य हो, तो पहले उचित पूजा-पाठ कर यात्रा पर निकलें। कुल मिलाकर, 1 नवंबर 2026 का दिन शुभ कार्यों के लिए सावधानीपूर्वक मुहूर्त चयन की माँग करता है।