31 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

1 नवंबर 2026 का पंचांग: साध्य योग दोपहर 2:39 तक, रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
1 नवंबर 2026 का पंचांग: साध्य योग दोपहर 2:39 तक, रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें

सारांश

1 नवंबर 2026 को साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक शुभ फल देगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:48 से 12:32 बजे तक रहेगा। राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल से बचते हुए पश्चिम व दक्षिण-पश्चिम दिशा में यात्रा न करें — रात्रि अमृतकाल 10:23 से 11:55 बजे तक नए कार्यों के लिए उत्तम है।

मुख्य बातें

कार्तिक कृष्ण सप्तमी रविवार दोपहर 2:51 बजे तक, इसके बाद अष्टमी आरंभ।
साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक; तत्पश्चात शुभ योग प्रारंभ।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से 12:32 बजे तक — शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम।
राहुकाल शाम 4:21–5:44 बजे ; यमगंड दोपहर 12:10–1:34 बजे ; गुलिक काल 2:57–4:21 बजे — नए कार्यों से बचें।
रात्रि अमृतकाल 10:23–11:55 बजे — निवेश, पूजा और यात्रा के लिए शुभ।
दिशाशूल पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में — यात्रा से परहेज करें।

हिंदू पंचांग के अनुसार 1 नवंबर 2026 (रविवार) को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2:51 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी। इस दिन साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक विद्यमान रहेगा और दिशाशूल पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा, अतः इन दिशाओं में यात्रा से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय का विवरण

कार्तिक कृष्ण सप्तमी तिथि शनिवार शाम 4:57 बजे से प्रारंभ होकर रविवार दोपहर 2:51 बजे तक रहेगी। तत्पश्चात अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 2 नवंबर दोपहर 1:10 बजे तक चलेगी। रविवार को सूर्योदय सुबह 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम 5:44 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 11:52 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन दोपहर 12:41 बजे होगा।

नक्षत्र एवं ग्रह स्थिति

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) और स्वामी राहु माने जाते हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की उपस्थिति से जातकों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रेरणा बलवती होती है।

सूर्य तुला राशि में रहेंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का नीचस्थ होना कहा जाता है। तुला वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन है, जो सूर्य के अग्नि स्वभाव के प्रतिकूल है। इस स्थिति में आत्मबल में कुछ कमी महसूस हो सकती है और निर्णय लेना कठिन हो सकता है। चंद्र देव कर्क राशि में रहेंगे — यह चंद्रमा की स्वयं की राशि है, अतः यहाँ चंद्रमा अत्यंत प्रभावशाली रहते हैं और जातकों की कल्पना शक्ति, कला एवं रचनात्मकता में वृद्धि होती है।

शुभ मुहूर्त: साध्य योग, अभिजीत और अमृतकाल

इस दिन साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक रहेगा। यह 27 नित्य योगों में 22वाँ योग है। 'साध्य' का अर्थ है — जो प्राप्त करने योग्य हो। इसकी देवी माता सावित्री (सरस्वती) और प्रमुख ग्रह बुध माने जाते हैं। इस योग में कठिन कार्य भी सहजता से पूर्ण होने की मान्यता है। साध्य योग के उपरांत शुभ योग आरंभ होगा।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ 48 मिनट का काल है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होता है। मान्यता है कि इस बेला में किए गए कार्यों से सभी दोष स्वतः नष्ट होते हैं। रात्रि 10:23 बजे से 11:55 बजे तक अमृतकाल रहेगा, जिसे नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

रविवार को राहुकाल शाम 4:21 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा। यह सूर्योदय-सूर्यास्त के बीच के समय का आठवाँ भाग होता है और किसी भी नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 12:10 बजे से 1:34 बजे तक रहेगा — यह समय नए कार्य, यात्रा और वित्तीय लेन-देन के लिए वर्जित माना जाता है। गुलिक काल दोपहर 2:57 बजे से 4:21 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं। इस काल में नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए, हालाँकि बैंक में जमा, दान और निवेश इस काल में स्वीकार्य माने गए हैं।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

रविवार को दिशाशूल पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि यदि इन दिशाओं में यात्रा अनिवार्य हो, तो पहले उचित पूजा-पाठ कर यात्रा पर निकलें। कुल मिलाकर, 1 नवंबर 2026 का दिन शुभ कार्यों के लिए सावधानीपूर्वक मुहूर्त चयन की माँग करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो Google Discover पर उच्च जुड़ाव दर्शाती है। यह केवल ज्योतिषीय सूचना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक ढाँचा है जिसके भीतर करोड़ों लोग अपने निर्णय लेते हैं — यात्रा से लेकर निवेश तक। ऐसे में सटीक समय-सारणी और स्पष्ट व्याख्या पाठक के लिए व्यावहारिक मूल्य रखती है। हालाँकि पंचांग की व्याख्याएँ क्षेत्र और परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती हैं, इसलिए पाठकों को अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिषाचार्य से भी परामर्श लेने की सलाह उचित है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 नवंबर 2026 को साध्य योग कितने बजे तक रहेगा?
1 नवंबर 2026 (रविवार) को साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शुभ योग आरंभ होगा। साध्य योग 27 नित्य योगों में 22वाँ योग है और इसे कठिन कार्यों को सहजता से पूरा करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
1 नवंबर को दिशाशूल किस दिशा में है और यात्रा से कब बचें?
1 नवंबर 2026 को दिशाशूल पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को इन दिशाओं में यात्रा करना अशुभ माना जाता है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो पहले उचित पूजा-अर्चना करें।
1 नवंबर 2026 का अभिजीत मुहूर्त कब है?
1 नवंबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक लगभग 48 मिनट का रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों से सभी प्रकार के दोष स्वतः नष्ट होते हैं।
1 नवंबर को राहुकाल का समय क्या है?
1 नवंबर 2026 (रविवार) को राहुकाल शाम 4:21 बजे से 5:44 बजे तक रहेगा। इस लगभग 90 मिनट के काल में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए; पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
1 नवंबर 2026 को अमृतकाल कब है और इसका महत्व क्या है?
1 नवंबर 2026 को अमृतकाल रात 10:23 बजे से 11:55 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह अत्यंत सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर काल है, जिसे नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 5 दिन पहले
  3. 6 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले