26 अक्टूबर 2026
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तमिलनाडु में बिजली गिरने से 14 मौतें, नीलगिरी-कोडाइकनाल-येरकौड में पर्यटकों का प्रवेश बंद

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तमिलनाडु में बिजली गिरने से 14 मौतें, नीलगिरी-कोडाइकनाल-येरकौड में पर्यटकों का प्रवेश बंद

सारांश

पूर्वोत्तर मानसून की मार से तमिलनाडु में बिजली गिरने से 14 मौतें हो चुकी हैं। नीलगिरी, कोडाइकनाल और येरकौड में पर्यटकों का प्रवेश बंद; ड्राइवर के परिजनों को ₹4 लाख की सहायता दी गई। मंत्री सेंगोट्टैयन ने आपातकालीन बैठक में स्थिति की समीक्षा की।

मुख्य बातें

पूर्वोत्तर मानसून शुरू होने के बाद से तमिलनाडु में बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
नीलगिरी , कोडाइकनाल और येरकौड में पर्यटकों के प्रवेश पर पाबंदी; केवल आवश्यक गतिविधियों की अनुमति।
मंत्री सेंगोट्टैयन ने 26 अक्टूबर 2026 को चेन्नई के आपातकालीन संचालन केंद्र में बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
नीलगिरी में भूस्खलन में फँसे एक ड्राइवर के परिवार को ₹4 लाख की वित्तीय सहायता दी गई।
कोयंबटूर और नीलगिरी के प्रभावित क्षेत्रों से जलभराव हटाया गया, स्थिति में सुधार की रिपोर्ट।

पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के बाद से तमिलनाडु में बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है। तमिलनाडु के मंत्री सेंगोट्टैयन ने 26 अक्टूबर 2026 को चेन्नई के आपातकालीन संचालन केंद्र में अधिकारियों के साथ नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों में भारी बारिश की स्थिति की समीक्षा के बाद यह जानकारी दी। एहतियात के तौर पर नीलगिरी, कोडाइकनाल और येरकौड में पर्यटकों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

मौतों का ब्यौरा और स्थिति की समीक्षा

मंत्री सेंगोट्टैयन ने स्पष्ट किया कि 14 मौतें विशेष रूप से आंधी-तूफान के दौरान बिजली गिरने से हुई हैं और यह आँकड़ा राज्य में बारिश से जुड़ी समस्त घटनाओं की कुल मृत्यु संख्या नहीं है। आपातकालीन संचालन केंद्र में हुई बैठक में नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों में बचाव कार्य, जलभराव निकासी और सामान्य जीवन की बहाली पर केंद्रित चर्चा की गई।

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर मानसून हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में तमिलनाडु के तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा लाता है, जिससे भूस्खलन और बिजली गिरने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।

पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर प्रतिबंध

मंत्री ने बताया कि नीलगिरी, कोडाइकनाल और येरकौड में एहतियाती प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इन तीनों लोकप्रिय पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है और केवल आवश्यक उद्देश्यों — जैसे स्थानीय निवासियों की आवाजाही व आपूर्ति — के लिए ही अनुमति दी जा रही है। यह प्रतिबंध भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लगाया गया है।

राहत और बचाव कार्य

सेंगोट्टैयन ने बताया कि कोयंबटूर और नीलगिरी के प्रभावित क्षेत्रों से जलभराव हटा दिया गया है, जिससे निवासियों का जीवन सामान्य होने लगा है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि नीलगिरी में एक भूस्खलन में फँसे एक ड्राइवर के परिवार को ₹4 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के पश्चिमी ज़िले लगातार भारी वर्षा से जूझ रहे हैं और प्रशासन राहत कार्यों को तेज़ करने में जुटा हुआ है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री ने कहा कि सरकार बारिश की स्थिति के बारे में पारदर्शी तरीके से जानकारी दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को स्थिति पर निरंतर नज़र रखने और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पश्चिमी जिलों में बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति में सुधार की रिपोर्ट मिल रही है।

आगे क्या होगा

पूर्वोत्तर मानसून के सक्रिय रहते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर प्रशासन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि आने वाले दिनों में मौसम में सुधार होने पर प्रतिबंधों की समीक्षा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पर्याप्त पूर्व-चेतावनी प्रणाली और जागरूकता अभियानों की कमी बनी रहती है। मंत्री की बैठक और पर्यटन प्रतिबंध प्रतिक्रियात्मक कदम हैं, जबकि असली ज़रूरत मानसून-पूर्व निवारक तंत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक समय की बिजली-चेतावनी प्रणाली की है। ₹4 लाख की सहायता राशि सहानुभूतिपूर्ण ज़रूर है, लेकिन यह सवाल खड़ा करती है कि क्या ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए दीर्घकालिक नीति में कोई बदलाव आएगा।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में बिजली गिरने से कितनी मौतें हुई हैं?
पूर्वोत्तर मानसून शुरू होने के बाद से तमिलनाडु में बिजली गिरने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आँकड़ा मंत्री सेंगोट्टैयन ने 26 अक्टूबर 2026 को आपातकालीन बैठक के बाद पत्रकारों को बताया।
नीलगिरी और कोडाइकनाल में पर्यटकों पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?
नीलगिरी, कोडाइकनाल और येरकौड में भारी वर्षा और भूस्खलन की आशंका के चलते एहतियाती तौर पर पर्यटकों का प्रवेश बंद किया गया है। केवल आवश्यक उद्देश्यों के लिए ही इन क्षेत्रों में जाने की अनुमति दी जा रही है।
तमिलनाडु सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्या राहत उपाय किए हैं?
कोयंबटूर और नीलगिरी के प्रभावित क्षेत्रों से जलभराव हटाया जा चुका है। नीलगिरी में एक भूस्खलन में फँसे ड्राइवर के परिवार को ₹4 लाख की वित्तीय सहायता भी दी गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा प्रतिबंध कब तक रहेगा?
फिलहाल पूर्वोत्तर मानसून के सक्रिय रहने तक नीलगिरी, कोडाइकनाल और येरकौड में प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है। प्रशासन मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है।
तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून का प्रभाव कितना गंभीर है?
पूर्वोत्तर मानसून हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में तमिलनाडु के तटीय और पहाड़ी ज़िलों में भारी वर्षा लाता है। इस बार नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों में व्यापक जलभराव और भूस्खलन दर्ज किए गए हैं, जिनसे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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