24 जुलाई 2026 पंचांग: अभिजीत मुहूर्त में 52 मिनट शुभ, देवशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा फलदाई
सारांश
मुख्य बातें
24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी का पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार आरंभ करने के लिए अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक — सर्वाधिक शुभ माना गया है। यह 52 मिनट का कालखंड दिन का सबसे अनुकूल समय है, जिसमें राहुकाल या अन्य अशुभ योगों की बाधा नहीं रहती।
तिथि एवं प्रमुख समय
पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:13 बजे तक रहेगी, उसके पश्चात एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:35 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना विशेष फलदाई मानी जाती है।
सूर्योदय सुबह 5:58 बजे और सूर्यास्त शाम 7:08 बजे होगा। चन्द्रोदय दोपहर 3:11 बजे और चन्द्रास्त रात 1:54 बजे होगा।
नक्षत्र एवं राशि स्थिति
इस दिन सूर्य पुष्य नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा सुबह 4:37 बजे तक विशाखा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। राशि की दृष्टि से सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेगा।
योग एवं मुहूर्त
शुक्रवार को शुक्ल योग रात 8:10 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके पश्चात ब्रह्म योग आरंभ होगा। हर्षण योग इस दिन प्रभावी नहीं रहेगा। पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक रहेगा — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल है जिसमें कोई भी नया कार्य, व्यापार या पूजा निर्विघ्न शुरू की जा सकती है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक और यमगंड
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीन अशुभ कालखंडों में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। राहुकाल सुबह 10:45 से दोपहर 12:27 बजे तक, गुलिक काल सुबह 7:20 से 9:02 बजे तक, और यमगंड काल दोपहर 3:30 से शाम 5:06 बजे तक रहेगा। इन समयों को ज्योतिषीय दृष्टि से अनुकूल नहीं माना जाता।
दिशाशूल एवं यात्रा सावधानी
शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।