20 सितंबर 2026
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अकाल तख्त ने SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला को रेप मामले में सिख पंथ से निष्कासित किया

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अकाल तख्त ने SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला को रेप मामले में सिख पंथ से निष्कासित किया

सारांश

सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने रेप के आरोपी SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला को सिख पंथ से बाहर कर दिया और आजीवन धार्मिक सेवा पर रोक लगा दी। अतिरिक्त हेड ग्रंथी मलकीत सिंह को भी अश्लील संदेश मामले में निष्कासित किया गया।

मुख्य बातें

अकाल तख्त ने 20 सितंबर 2026 को गुरमाता पारित कर SGPC सदस्य अमरजीत सिंह चावला को सिख पंथ से निष्कासित किया।
चावला पर 21 अगस्त 2026 को आनंदपुर साहिब में BNS की धाराओं 64, 127(2) व 351(2) के तहत रेप का मामला दर्ज था।
अतिरिक्त हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को भी अश्लील संदेश भेजने के आरोप में पंथ से निष्कासित किया गया।
दोनों पर आजीवन किसी भी सिख संस्था, गुरुद्वारा या धार्मिक मंच पर सेवा करने पर प्रतिबंध लगाया गया।
सिख समुदाय को निर्देश दिया गया कि चावला से धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संबंध न रखें।
चावला ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया; मामला सामने आने पर SGPC सदस्यता व पार्टी पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके थे।

सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के पाँच सिंह साहिबानों ने 20 सितंबर 2026 को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ नेता अमरजीत सिंह चावला को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया। चावला पर आनंदपुर साहिब में दर्ज रेप मामले के आरोप हैं। यह ऐतिहासिक धार्मिक दंड अकाल तख्त सचिवालय में हुई बैठक में 'गुरमाता' पारित कर सुनाया गया।

निष्कासन का आधार और गुरमाता

अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने घोषणा की कि चावला के विरुद्ध दर्ज रेप प्रकरण को गंभीर पंथिक अनुशासनहीनता और सिख मर्यादा का उल्लंघन माना गया। इसी आधार पर गुरमाता पारित करते हुए उन्हें पंथ से बाहर किया गया।

गौरतलब है कि 'गुरमाता' सिख धर्म में सर्वोच्च सामूहिक निर्णय होता है, जिसकी अवज्ञा पूरे समुदाय के लिए अस्वीकार्य मानी जाती है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अकाल तख्त किसी नेता या पदाधिकारी को आरोपों से ऊपर नहीं मानता।

अतिरिक्त हेड ग्रंथी पर भी कार्रवाई

अकाल तख्त ने इसी बैठक में अपने अतिरिक्त हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह को भी सिख पंथ से निष्कासित कर दिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता महिला को अश्लील संदेश भेजे। तख्त केसगढ़ साहिब के चालक मोहन सिंह का नाम भी महिला की शिकायत में शामिल है।

अकाल तख्त ने चावला और मलकीत सिंह दोनों पर आजीवन किसी भी सिख संस्था, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति अथवा धार्मिक मंच पर सेवा देने पर प्रतिबंध लगाया है।

मूल एफआईआर और आरोप

21 अगस्त 2026 को एक महिला की शिकायत पर आनंदपुर साहिब में चावला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 64, 127(2) और 351(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि उसे आनंदपुर साहिब स्थित एक सराय में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

चावला ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। मामला सार्वजनिक होने के बाद उन्होंने SGPC की सदस्यता और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।

सिख समुदाय को निर्देश

अकाल तख्त ने सिख समुदाय को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अमरजीत सिंह चावला के साथ कोई भी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक संबंध न रखा जाए। यह सामाजिक बहिष्कार सिख परंपरा में 'तनखाह' के सबसे कठोर रूपों में से एक माना जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब सिख धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर समुदाय के भीतर बहस तेज हो रही है। इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति और SGPC की संरचना पर भी असर पड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सिख धार्मिक संस्थाओं की आंतरिक जवाबदेही का एक दुर्लभ सार्वजनिक प्रदर्शन है। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई आपराधिक न्याय प्रक्रिया को पूरक बनाती है या उससे आगे निकल जाती है — क्योंकि न्यायालय में दोष अभी सिद्ध नहीं हुआ। साथ ही, SGPC और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के लिए यह राजनीतिक रूप से भी संकटकारी है, जो पहले से ही पंजाब में प्रभाव खोती संस्थाएँ मानी जाती हैं। धार्मिक निष्कासन और कानूनी प्रक्रिया के बीच यह असमंजस सिख समुदाय में दीर्घकालिक प्रशासनिक सुधार की बहस को और तेज़ कर सकता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरजीत सिंह चावला को सिख पंथ से क्यों निष्कासित किया गया?
अकाल तख्त ने आनंदपुर साहिब में दर्ज रेप मामले को गंभीर पंथिक अनुशासनहीनता और सिख मर्यादा का उल्लंघन मानते हुए 20 सितंबर 2026 को गुरमाता पारित कर चावला को सिख पंथ से निष्कासित किया। उन पर BNS की धाराओं 64, 127(2) और 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज है।
अकाल तख्त का 'गुरमाता' क्या होता है?
गुरमाता सिख धर्म में अकाल तख्त द्वारा पारित सर्वोच्च सामूहिक निर्णय होता है, जो पूरे सिख समुदाय पर बाध्यकारी माना जाता है। इसकी अवज्ञा पंथिक दृष्टि से अस्वीकार्य है।
चावला के साथ ज्ञानी मलकीत सिंह को क्यों निष्कासित किया गया?
अकाल तख्त के अतिरिक्त हेड ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह पर शिकायतकर्ता महिला को अश्लील संदेश भेजने का आरोप है। इसी आधार पर उन्हें भी सिख पंथ से निष्कासित कर आजीवन धार्मिक सेवा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
निष्कासन के बाद चावला और मलकीत सिंह पर क्या प्रतिबंध हैं?
दोनों पर आजीवन किसी भी सिख संस्था, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति या धार्मिक मंच पर सेवा देने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा सिख समुदाय को निर्देश दिया गया है कि वे चावला के साथ कोई धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक संबंध न रखें।
चावला ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
अमरजीत सिंह चावला ने रेप के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। मामला सार्वजनिक होने के बाद उन्होंने SGPC की सदस्यता और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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