अमरावती का निर्णय मुंबई के लिए गंभीर चिंता, शिवसेना (यूबीटी) का गंभीर बयान
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती से जुड़ी विधेयक पर अब महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचलों में चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने प्रमुख पत्रिका 'सामना' में इसे मुंबई के लिए 'खतरे की घंटी' बताया है।
पार्टी का कहना है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक, 2026 के अंतर्गत अमरावती को आधिकारिक राजधानी का दर्जा देना भले ही आंध्र प्रदेश तक सीमित हो, लेकिन इसके दूरगामी संवैधानिक परिणाम हो सकते हैं। संपादकीय में चिंता व्यक्त की गई है कि यह कदम भविष्य में मुंबई जैसे महत्वपूर्ण शहरों की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है।
संपादकीय में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार संसद को राज्यों की सीमाएँ बदलने, नए राज्य बनाने या नाम बदलने का अधिकार है, लेकिन किसी राज्य की राजधानी तय करना परंपरागत रूप से राज्यों के पास ही रहा है। इस प्रकार, संसद द्वारा अमरावती को राजधानी घोषित करना एक “खतरनाक मिसाल” बन सकता है।
आलोचकों (जिनमें अनिल शिडोरे का नाम भी शामिल है) का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार 'अंडरग्राउंड टनल' जैसी योजनाओं के माध्यम से इस मॉडल को आगे बढ़ा रही है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में महाराष्ट्र से जुड़े निर्णयों को दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है।
संपादकीय में एक संभावित परिदृश्य भी प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया कि संसद कभी भी एक विधेयक लाकर मुंबई को 'नेशनल इकोनॉमिक जोन' घोषित कर सकती है और फिर उसकी वैश्विक आर्थिक ताकत का हवाला देते हुए उसे केंद्रशासित प्रदेश में बदल सकती है।
शिवसेना-यूबीटी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, मुंबई की मेयर रितु तावड़े पर तंज कसते हुए कहा गया कि वे किसी भी ऐसे कदम को 'गौरव की बात' बता सकते हैं।
संपादकीय में यह भी कहा गया कि मुंबई को केंद्र के अधीन (आश्रित) किया जा सकता है, और महाराष्ट्र के लिए कोई दूसरी, तीसरी या चौथी मुंबई को राजधानी घोषित किया जा सकता है। पार्टी ने राज्य के मौजूदा नेतृत्व पर 'महाराष्ट्र गौरव' की कमी का आरोप भी लगाया।
लेख में सांस्कृतिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा गया कि पारंपरिक मराठी संबोधन जैसे रावसाहेब और ताईसाहेब की जगह अब रावभाई और ताईबेन जैसे शब्दों का प्रयोग बढ़ रहा है, जो बाहरी राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
शिवसेना-यूबीटी ने याद दिलाया कि मुंबई 106 शहीदों के बलिदान से महाराष्ट्र का हिस्सा बनी थी और पहले के नेताओं ने राज्य की पहचान को हमेशा प्राथमिकता दी।
संपादकीय में उल्लेख किया गया कि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद, हैदराबाद ने तेलंगाना को मिलने के बाद अमरावती को नई राजधानी घोषित किया गया था। इसके लिए किसानों से हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि ली गई और केंद्र से सैकड़ों करोड़ रुपये भी प्राप्त हुए, लेकिन शहर का विकास अब तक अधूरा है। कई प्रशासनिक इमारतें केवल ढांचे के रूप में खड़ी हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय स्तर पर 'भूतिया इमारतों' जैसी बातें की जा रही हैं।
शिवसेना-यूबीटी ने चेतावनी दी कि यदि महाराष्ट्र का मौजूदा नेतृत्व इसी तरह कमजोर और उदासीन बना रहा, तो भविष्य में मुंबई को राज्य से अलग करने जैसे निर्णय भी संभव हो सकते हैं।