अमित शाह का स्पष्ट बयान: परिसीमन का विरोध एससी-एसटी सीटों में वृद्धि का विरोध है
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नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और 'परिसीमन' पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोई भी महिला आरक्षण के लिए किए गए संविधान संशोधन का विरोध नहीं कर रहा है। सभी ने इस संशोधन का स्वागत किया है, लेकिन इंडिया महागठबंधन के सभी सदस्यों ने महिला आरक्षण का स्पष्ट विरोध किया है।
उन्होंने आगे कहा कि इन तीन बिलों का पहला उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के लिए संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू करना है ताकि 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जा सके। दूसरा उद्देश्य 'एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य' का सिद्धांत लागू करना है, जो संविधान की मूल भावना है।
अमित शाह ने कहा कि जिन लोगों ने परिसीमन का विरोध किया है, वे वास्तव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन पर लोकसभा में 133 सदस्यों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 56 महिलाएं थीं, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।
कई सदस्यों ने सवाल उठाया कि परिसीमन अभी क्यों लाया जा रहा है। तो अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में कहा गया है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर 45 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है, जबकि कुछ स्थानों पर छह लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है, जिससे प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में वोट का मूल्य समान नहीं है।
अमित शाह ने कहा, "यदि विपक्ष परिसीमन के लिए हमारा समर्थन करता है, तो प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्येक वोट का मूल्य समान होगा।"