सिलीगुड़ी कॉरिडोर अब सुरक्षित सीमा का पर्याय: गृह मंत्री अमित शाह ने जुमागाछ बीओपी पर बीएसएफ जवानों से किया संवाद
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह ने 18 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित जुमागाछ सीमा चौकी (बीओपी) का दौरा किया और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कई आधुनिक सीमा सुरक्षा परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।
मुख्य घटनाक्रम
शाह ने बीएसएफ की उत्तर बंगाल सीमांत की 18वीं वाहिनी के जुमागाछ बीओपी स्थित वॉच टावर से सीमा निगरानी व्यवस्था का निरीक्षण किया। प्रहरी सम्मेलन के दौरान उन्होंने घुसपैठिया चेतावनी प्रणाली, रेडियो आधारित बाड़ भेदन पहचान प्रणाली, गेट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और स्वदेशी बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
उन्होंने एक्स पर लिखा, 'बीएसएफ का शौर्य भारत की सीमाओं का अजेय सुरक्षा कवच है। जुमागाछ सीमा चौकी पर हाई-टी के दौरान बीएसएफ के वीर जवानों से संवाद कर खुशी हुई।'
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर बड़ा बयान
गृह मंत्री ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, 'जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर पहले की सरकारों के समय घुसपैठ का गलियारा बन गया था, वह अब सुरक्षित सीमा का पर्याय बन रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की घटनाएँ केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं।
आधुनिक तकनीक से लैस सीमाएँ
शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में केवल वॉच टावरों की संख्या ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से भी लैस किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अत्याधुनिक उपकरणों और आधुनिक अलर्ट सिस्टम से लैस भारत की सीमाएँ अब आधुनिक सीमा सुरक्षा का आदर्श उदाहरण बन रही हैं।
सरकार की प्राथमिकता
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग के ज़रिए देश की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में निरंतर काम जारी है। गौरतलब है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर — जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है — भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला अत्यंत संवेदनशील भूभाग है।
क्या होगा आगे
इस दौरे के बाद सीमा सुरक्षा की नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आने की उम्मीद है। बीएसएफ के जवानों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा से यह संकेत मिलता है कि सरकार पूर्वोत्तर सीमा पर निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।