एएमयू में 'जय श्री राम' नारे पर शिया नेताओं की दो-टूक: हर नारे की अपनी जगह होती है
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास और शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने 13 जून को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एक उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री द्वारा 'जय श्री राम' के नारे लगाए जाने के विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं ने धार्मिक नारेबाजी के स्थान और संदर्भ पर सवाल उठाते हुए शांति और सौहार्द की अपील की।
एएमयू विवाद पर शिया नेताओं का रुख
मौलाना यासूब अब्बास ने स्पष्ट किया कि उन्हें 'जय श्री राम' के नारों से व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनके अनुसार 'जय श्री राम' का उद्घोष मंदिरों में और 'अल्लाहु अकबर' का नारा मस्जिदों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर चीज़ की एक उचित जगह होती है।
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने इस मुद्दे पर और कड़ा रुख अपनाया। उनके अनुसार, चाहे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हो या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक नारेबाजी शिक्षा के माहौल को कमज़ोर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे नारों को बढ़ावा देता है या उनका समर्थन करता है, तो यह उचित नहीं है।
सहारनपुर हिरासत मामले पर प्रतिक्रिया
सहारनपुर में आतंकी संबंधों के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के मामले पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल है तो उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और समाज के विरुद्ध काम करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
हालाँकि, मौलाना अब्बास ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों का आतंकवाद या पड़ोसी देशों से किसी प्रकार का संबंध नहीं है, उन्हें बेवजह निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका यह बयान उस व्यापक बहस के बीच आया है जिसमें अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि कथित तौर पर मनमाने तरीके से की जाने वाली हिरासत पर चिंता जताते रहे हैं।
योगी के 'रावण' वाले बयान पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रावण का उदाहरण दिए जाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही बयान देते हैं और लोगों को उनकी बात को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द को लेकर कई मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं। शिया नेताओं का यह रुख — जो न तो सरकार का पूर्ण समर्थन करता है और न ही विरोध — मध्यमार्गी संतुलन का प्रयास माना जा रहा है। सैयद सैफ अब्बास का यह कहना कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को धार्मिक नारेबाजी को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना की याद दिलाता है।
आगे क्या
एएमयू विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ अभी थमी नहीं हैं। शिया नेताओं की यह अपील ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब विश्वविद्यालय परिसरों में धार्मिक गतिविधियों की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने की संभावना है।