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जौहर यूनिवर्सिटी को आतंकवाद से जोड़ना शिक्षा-विरोधी सोच: मौलाना सैफ अब्बास

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जौहर यूनिवर्सिटी को आतंकवाद से जोड़ना शिक्षा-विरोधी सोच: मौलाना सैफ अब्बास

सारांश

शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने जौहर यूनिवर्सिटी को आतंकवाद से जोड़ने वाले बयान को शिक्षा-विरोधी मानसिकता करार दिया और सरकार से पूछा — अगर संस्थान संदिग्ध है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वंदे मातरम विवाद को भी उन्होंने राजनीतिक गुमराह करार दिया।

मुख्य बातें

मौलाना सैफ अब्बास ने 28 जुलाई को लखनऊ में जौहर यूनिवर्सिटी को आतंकवाद से जोड़ने वाले बयान को 'निंदनीय और शिक्षा-विरोधी' बताया।
BJP नेता संगीत सोम की टिप्पणी को उन्होंने छात्रों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया।
मौलाना ने सरकार और खुफिया एजेंसियों से पूछा कि यदि संदेह है तो अब तक कितने आतंकवादी उस संस्थान से पकड़े गए।
AIMIM नेता वारिस पठान के 'वंदे मातरम' बयान को उन्होंने राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया और कहा कि संसदीय नियमों का पालन होगा।
उन्होंने कहा कि देश का युवा शिक्षा, रोज़गार और राष्ट्र-विकास को प्राथमिकता देना चाहता है।

शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने 28 जुलाई को लखनऊ में स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को आतंकवाद से जोड़ना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह समाज में शिक्षा-विरोधी मानसिकता को भी बढ़ावा देता है। उनकी यह प्रतिक्रिया भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता संगीत सोम की जौहर यूनिवर्सिटी पर की गई टिप्पणी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता वारिस पठान के 'वंदे मातरम' संबंधी बयान के संदर्भ में आई।

शिक्षण संस्थान और आतंकवाद का आरोप

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि शिक्षण संस्थान समाज को ज्ञान और दिशा देने का कार्य करते हैं — उन्हें 'शिक्षा के मंदिर' का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा, 'किसी भी विश्वविद्यालय को आतंकवाद से जोड़कर देखना गलत है। इससे वहाँ पढ़ने वाले छात्रों को भी मानसिक पीड़ा होती है और उनकी भावनाएँ आहत होती हैं।' उनके अनुसार, ऐसे बयान देने वालों से भी जवाब माँगा जाना चाहिए।

सरकार और खुफिया एजेंसियों पर सवाल

मौलाना ने तर्क दिया कि यदि किसी को वास्तव में यह संदेह है कि किसी संस्थान का आतंकवाद से संबंध है, तो यह जाँच करना सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'सरकार बताए कि अब तक कितने आतंकवादी उस संस्थान से पकड़े गए हैं। जब सरकार आपकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?' यह ऐसे समय में आया है जब जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है।

वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया

AIMIM नेता वारिस पठान के 'वंदे मातरम' संबंधी बयान पर मौलाना ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्थान या कार्यक्रम में संसद द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार 'वंदे मातरम' अनिवार्य है, तो उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विषय को अनावश्यक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

युवाओं और विकास पर ज़ोर

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि देश का युवा अब इन राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर राष्ट्र के विकास और प्रगति पर ध्यान देना चाहता है। हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं ने यह संकेत दिया है कि वे शिक्षा, रोज़गार और सकारात्मक बदलाव को प्राथमिकता देते हैं। उनके अनुसार, समाज को भी ऐसे मुद्दों पर सकारात्मक माहौल बनाने की आवश्यकता है।

आगे क्या

गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी और 'वंदे मातरम' जैसे मुद्दों पर राजनीतिक तनातनी आने वाले समय में और गहरी हो सकती है। मौलाना सैफ अब्बास की यह अपील कि सभी वर्गों को ऐसे बयानों की निंदा करनी चाहिए, एक व्यापक सामाजिक संवाद की माँग को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शैक्षणिक स्वायत्तता का भी प्रश्न बन गया है। उनका यह सवाल कि 'सरकार के होते हुए कार्रवाई क्यों नहीं हुई', BJP को ही कटघरे में खड़ा करता है। वंदे मातरम पर उनका संवैधानिक रुख राजनीतिक उकसावे को शांत करने की कोशिश है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस सूक्ष्म अंतर को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना सैफ अब्बास ने जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर क्या कहा?
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को आतंकवाद से जोड़ना शिक्षा-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है और यह छात्रों की भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने सभी वर्गों से ऐसे बयानों की निंदा करने की अपील की।
BJP नेता संगीत सोम ने जौहर यूनिवर्सिटी पर क्या टिप्पणी की थी?
BJP नेता संगीत सोम ने जौहर यूनिवर्सिटी को आतंकवाद से जोड़ने वाली टिप्पणी की थी, जिसकी मौलाना सैफ अब्बास सहित कई वर्गों ने आलोचना की। स्रोत के अनुसार मौलाना ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।
वारिस पठान के 'वंदे मातरम' बयान पर मौलाना का क्या रुख है?
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ संसदीय नियमों के अनुसार 'वंदे मातरम' अनिवार्य है, वहाँ उसका पालन किया जाएगा।
मौलाना ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से क्या सवाल पूछा?
मौलाना ने पूछा कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी का आतंकवाद से संबंध है तो अब तक कितने आतंकवादी वहाँ से पकड़े गए और सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की। उनके अनुसार जाँच करना सरकार और खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
मौलाना सैफ अब्बास ने देश के युवाओं के बारे में क्या कहा?
मौलाना ने कहा कि देश का युवा राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर शिक्षा, रोज़गार और राष्ट्र-विकास को प्राथमिकता देना चाहता है। हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवा सकारात्मक बदलाव के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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