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क्या जेएनयू देश का सबसे राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय है: कुलपति प्रो. धूलिपुड़ी?

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क्या जेएनयू देश का सबसे राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय है: कुलपति प्रो. धूलिपुड़ी?

सारांश

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रवादी बताते हुए वंदे मातरम गाने का समर्थन किया। उन्होंने परिसर में हाल की नारेबाजी के मामलों पर प्रशासन की स्थिति स्पष्ट की। क्या जेएनयू सच में राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में उभरा है?

मुख्य बातें

जेएनयू को राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय माना जाता है।
वंदे मातरम गाने का कोई विरोध नहीं है।
नारेबाजी के मामले में प्रशासन ने कठोर कार्रवाई की बात की है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रशासन की स्पष्ट नीति है।
विश्वविद्यालय का प्रशासन अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेगा।

नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा है कि जेएनयू इस देश के सबसे राष्ट्रवादी विश्वविद्यालयों में एक है। उन्होंने यह भी बताया कि हम जेएनयू में वंदे मातरम गाते हैं और यहाँ इस पर कोई विरोध नहीं है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किस अन्य संस्थान में आप पूरा वंदे मातरम् गा सकते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ जेएनयू परिसर में नारेबाजी की घटना पर कुलपति ने कहा कि यह मामला अब पूरी तरह सुलझ चुका है।

गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के साबरमती हॉस्टल के बाहर यह नारेबाजी हुई थी। मामले में मंगलवार को विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का औपचारिक अनुरोध भेजा था।

प्रशासन ने अपनी शिकायत में बताया था कि 5 जनवरी की रात लगभग 10 बजे, जेएनयू छात्रसंघ से जुड़े छात्रों द्वारा साबरमती हॉस्टल के बाहर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां छात्रों द्वारा आपत्तिजनक नारेबाजी की गई थी। जेएनयू प्रशासन ने अपने एक बयान में स्पष्ट किया था कि विश्वविद्यालय विचारों के आदान-प्रदान, नवाचार और नई सोच का केंद्र होते हैं। विश्वविद्यालय परिसरों को किसी भी स्थिति में घृणा की प्रयोगशाला बनने नहीं दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा, अवैध गतिविधियों या किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी हरकतों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जेएनयू प्रशासन के अनुसार, इस घटना में शामिल छात्रों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस अनुशासनात्मक कार्रवाई में तत्काल निलंबन, निष्कासन और विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना भी शामिल है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि परिसर की शैक्षणिक और अनुशासनात्मक गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अराजकता या असंवैधानिक व्यवहार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की जाएगी।

पुलिस शिकायत में उल्लेख किया गया था कि ऐसी नारेबाजी जेएनयू की आचार संहिता का भी उल्लंघन है। विश्वविद्यालय का कहना था कि इससे परिसर की शांति, सौहार्द, सार्वजनिक व्यवस्था तथा सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। विश्वविद्यालय के अनुसार, घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी स्थल पर मौजूद थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जेएनयू का यह मुद्दा राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन खोजने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस विश्वविद्यालय की पहचान को समझने के लिए हमें इसके ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान घटनाक्रमों पर ध्यान देना आवश्यक है।
RashtraPress
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