2 नवंबर 2026
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अनिल बलूनी ने वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात, गढ़वाल की लंबित परियोजनाओं पर माँगी शीघ्र मंजूरी

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अनिल बलूनी ने वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात, गढ़वाल की लंबित परियोजनाओं पर माँगी शीघ्र मंजूरी

सारांश

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर उत्तराखंड की उन विकास परियोजनाओं की पैरवी की जो वन स्वीकृतियों के अभाव में लंबे समय से अटकी हैं। उन्होंने केंद्र-राज्य की एक संयुक्त बैठक बुलाने का प्रस्ताव भी रखा।

मुख्य बातें

अनिल बलूनी (गढ़वाल सांसद, BJP राष्ट्रीय संचार प्रमुख) ने 2 नवंबर 2026 को वन मंत्री भूपेंद्र यादव से नई दिल्ली में मुलाकात की।
बैठक में गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र की वन स्वीकृति एवं वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी लंबित परियोजनाओं का मुद्दा उठाया गया।
बलूनी ने सड़क, संपर्क मार्ग और आधारभूत ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं को शीघ्र पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने का आग्रह किया।
केंद्र और राज्य एजेंसियों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा गया।
केंद्रीय मंत्री यादव ने मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

गढ़वाल लोकसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संचार प्रमुख अनिल बलूनी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में वन स्वीकृतियों के अभाव में अटकी विकास परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी दिलाने का आग्रह किया। बलूनी ने स्पष्ट किया कि पर्वतीय भूगोल की विशेष चुनौतियों को देखते हुए इन परियोजनाओं में और देरी स्थानीय जनता के लिए हानिकारक होगी।

बैठक में उठे मुख्य मुद्दे

सांसद बलूनी ने बैठक में विशेष रूप से वन भूमि हस्तांतरण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों से जुड़े उन प्रकरणों को रेखांकित किया जो लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने बताया कि सड़क, संपर्क मार्ग और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित अनेक परियोजनाएँ केवल प्रक्रियागत अड़चनों के कारण ज़मीन पर नहीं उतर पा रही हैं।

बलूनी ने यह भी कहा कि गढ़वाल के दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में इन परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन केवल विकास का प्रश्न नहीं, बल्कि वहाँ के नागरिकों की बुनियादी जरूरतों से सीधे जुड़ा विषय है।

संयुक्त बैठक का प्रस्ताव

सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार की संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि आपसी समन्वय के बिना लंबित प्रकरणों की बाधाएँ दूर करना संभव नहीं होगा और एक साझा मंच पर निर्णय लेने से प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में अधिकांश बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ वन भूमि से होकर गुजरती हैं, जिससे वन विभाग की स्वीकृति एक अनिवार्य और अक्सर समय-साध्य प्रक्रिया बन जाती है।

केंद्रीय मंत्री का आश्वासन

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सांसद द्वारा प्रस्तुत मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और इनके समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। हालाँकि, किसी विशेष समयसीमा या परियोजना-विशेष के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा इस बैठक में नहीं की गई।

आम जनता पर असर

बलूनी के अनुसार, लंबित परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने से गढ़वाल के सुदूर पर्वतीय गाँवों में सड़क संपर्क सुधरेगा, आधारभूत संरचना मज़बूत होगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएँ मिलेंगी। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन में वृद्धि के मद्देनज़र बेहतर कनेक्टिविटी की माँग लगातार बढ़ रही है।

बलूनी ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक सहयोग और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं को जल्द गति मिलेगी और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्र-राज्य समन्वय और वन संरक्षण कानूनों की व्याख्या में असंगति की भी है। मंत्री का 'आश्वासन' एक परिचित शब्द है — असली कसौटी यह होगी कि क्या कोई समयबद्ध तंत्र बनेगा, या यह बैठक भी फाइलों में दब जाएगी। संयुक्त बैठक का प्रस्ताव सही दिशा में है, लेकिन उसका पालन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी दोनों सरकारों पर समान रूप से है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिल बलूनी ने वन मंत्री से मुलाकात क्यों की?
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने 2 नवंबर 2026 को वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों के अभाव में लंबे समय से अटकी विकास परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी दिलाने का आग्रह किया।
गढ़वाल में कौन-सी परियोजनाएँ लंबित हैं?
सांसद बलूनी के अनुसार, गढ़वाल के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, संपर्क मार्ग और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएँ वन भूमि हस्तांतरण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के कारण रुकी हुई हैं। इनका समयबद्ध क्रियान्वयन स्थानीय जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा है।
केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बलूनी द्वारा उठाए गए मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। हालाँकि, किसी विशेष परियोजना या समयसीमा की घोषणा नहीं की गई।
संयुक्त बैठक का प्रस्ताव क्या है?
बलूनी ने आग्रह किया कि केंद्र और उत्तराखंड राज्य सरकार की संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, ताकि आपसी समन्वय से लंबित प्रकरणों की बाधाएँ दूर की जा सकें और परियोजनाओं का शीघ्र निस्तारण हो सके।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से गढ़वाल को क्या फायदा होगा?
स्वीकृति मिलने पर गढ़वाल के सुदूर पर्वतीय गाँवों में सड़क संपर्क सुधरेगा, आधारभूत संरचना मज़बूत होगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएँ मिलेंगी। इससे क्षेत्र के समग्र विकास के साथ-साथ पर्यटन और तीर्थाटन को भी बल मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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