आरामबाग चुनाव: लेफ्ट का पुराना गढ़ और भाजपा-टीएमसी की टक्कर

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आरामबाग चुनाव: लेफ्ट का पुराना गढ़ और भाजपा-टीएमसी की टक्कर

सारांश

आरामबाग, पश्चिम बंगाल का एक महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र है, जहां 2024 के चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। जानिए, इस क्षेत्र की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और राजनीतिक इतिहास के बारे में।

Key Takeaways

  • आरामबाग का इतिहास और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर नजर।
  • कृषि प्रधान क्षेत्र और मुख्य फसलों का विवरण।
  • भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा।
  • बाढ़ की समस्या और किसानों पर इसका प्रभाव।
  • जनसंख्या और साक्षरता दर का अध्ययन।

कोलकाता, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आरामबाग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण सीट है, जो अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। यह मुख्य रूप से हुगली जिले में फैला हुआ है, जिसमें हुगली के छह और पश्चिम मेदिनीपुर जिले का एक विधानसभा क्षेत्र शामिल है। इनमें हरिपाल, तारकेश्वर, पुरसुराह, आरामबाग (एससी), गोघाट (एससी), खानाकुल और चंद्रकोना जैसे क्षेत्र आते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां के सात में से चार क्षेत्र भाजपा ने जीते थे।

यह क्षेत्र कृषि प्रधान है, जहां चावल, आलू और जूट जैसी फसलें प्रमुख हैं। जूट उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र में बाढ़ एक बार-बार आने वाली समस्या है, जो साल में एक-दो बार भीषण रूप ले लेती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।

आरामबाग ब्लॉक का क्षेत्रफल लगभग 269 वर्ग किलोमीटर है, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या करीब 2.85 लाख थी, जिसमें जनसंख्या घनत्व 942 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। साक्षरता दर लगभग 79 प्रतिशत के आसपास है, जिसमें पुरुषों में अधिक और महिलाओं में कम है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध है, जहां राजा राममोहन राय की जन्मभूमि राधानगर स्थित है।

राजनीतिक इतिहास की बात करें तो 1980 से 2009 तक यह सीट सीपीआई(एम) का मजबूत गढ़ रही, जिसे 'लाल किला' कहा जाता था। अनिल बसु जैसे नेता यहां से कई बार सांसद चुने गए। 2009 में सीपीआई(एम) के शक्ति मोहन मलिक ने जीत हासिल की, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ी टक्कर दी। 2014 में टीएमसी की अपरूपा पोद्दार (अफरीन अली के नाम से भी जानी जाती हैं) ने शक्ति मोहन मलिक को बड़े अंतर से हराया। 2019 में अपरूपा पोद्दार ने फिर जीत दर्ज की, लेकिन भाजपा के तपन कुमार राय से महज 1,142 वोटों के अंतर से। यह चुनाव बेहद करीबी रहा, जहां टीएमसी को 44.15 प्रतिशत और भाजपा को 44.08 प्रतिशत वोट मिले।

2024 के लोकसभा चुनाव में आरामबाग में फिर से टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखी गई। चुनाव 20 मई को हुए, जहां मतदान प्रतिशत करीब 82-85 प्रतिशत रहा। टीएमसी की उम्मीदवार मिताली बाग ने भाजपा के अरूप कांति दीगर को मात्र 6,399 वोटों के अंतर से हराया। मिताली बाग को 7,12,587 वोट (45.71 प्रतिशत) मिले, जबकि अरूप कांति दीगर को 7,06,188 वोट (45.30 प्रतिशत) प्राप्त हुए। सीपीआई(एम) के बिप्लब कुमार मोइत्रा तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें करीब 92,500 वोट मिले। यह जीत टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश की थी।

2021 के विधानसभा चुनाव में यहां के सात में से चार क्षेत्र भाजपा ने जीते थे, जिससे टीएमसी चिंतित है। भाजपा ने यहां ग्रामीण स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और टीएमसी के विकास कार्यों पर सवाल उठाए हैं।

Point of View

जिससे यह क्षेत्र आगामी चुनावों में और भी महत्वपूर्ण बन गया है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

आरामबाग क्षेत्र की प्रमुख फसलें कौन सी हैं?
आरामबाग क्षेत्र में मुख्य फसलें चावल, आलू और जूट हैं।
आरामबाग में 2024 के चुनाव का मतदान प्रतिशत क्या रहा?
आरामबाग में 2024 के चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 82-85 प्रतिशत रहा।
आरामबाग का राजनीतिक इतिहास क्या है?
1980 से 2009 तक आरामबाग सीट सीपीआई(एम) का गढ़ रहा, जिसे 'लाल किला' कहा जाता था।
2021 के विधानसभा चुनाव में आरामबाग में किस पार्टी ने अधिक सीटें जीती थीं?
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां के सात में से चार क्षेत्र जीते थे।
आरामबाग का क्षेत्रफल कितना है?
आरामबाग ब्लॉक का क्षेत्रफल लगभग 269 वर्ग किलोमीटर है।
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