असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने 26 कुत्तों के बचाव की घोषणा की, पशु तस्करी पर कड़ी कार्रवाई का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को घोषणा की कि 26 कुत्तों को अवैध व्यापार और शोषण के चंगुल से बचाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय दिया गया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार निर्दोष जानवरों के हर प्रकार के शोषण के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ी है।
मुख्यमंत्री का संदेश और बचाव की जानकारी
मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि बचाए गए इन 26 प्यारे दोस्तों को अब देखभाल, दया और आशा से भरा नया अध्याय मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'किसी भी जीवन को वस्तु की तरह नहीं समझा जाना चाहिए।' पोस्ट के साथ साझा तस्वीरों में एक देखभाल केंद्र में कई कुत्ते दिखाई दे रहे थे, जिन्हें बचाव के बाद चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही थी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान के सटीक स्थान और उन परिस्थितियों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया, जिनमें ये जानवर बरामद किए गए।
असम पुलिस की भूमिका और सराहना
मुख्यमंत्री ने असम पुलिस की विशेष प्रशंसा की, जिसने बचाव अभियान में समन्वित कार्रवाई करते हुए इन जानवरों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों का यह समन्वित प्रयास पशु कल्याण की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बचाए गए जानवरों को अभी चिकित्सा देखभाल दी जा रही है और उन्हें खुशहाल तथा स्थायी जीवन उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।
पशु क्रूरता और अवैध व्यापार की पृष्ठभूमि
यह बचाव अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पशु तस्करी, क्रूरता और पशु संरक्षण कानूनों के कमज़ोर क्रियान्वयन को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। असम में भी पशु अवैध व्यापार की घटनाएँ चर्चा में रही हैं। राज्य सरकार का यह कदम पशु कल्याण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सक्रियता का संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशुओं के अवैध व्यापार और दुर्व्यवहार पर दंड का प्रावधान है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसका क्रियान्वयन अभी भी अपेक्षाकृत कमज़ोर है।
राज्य सरकार का रुख और आगे की कार्रवाई
सरमा के इस बयान से राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जानवरों को व्यावसायिक वस्तु की तरह नहीं देखा जाएगा। उन्होंने पशु तस्करी और शोषण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखने का भरोसा दिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बचाव अभियान न केवल पीड़ित जानवरों को राहत देते हैं, बल्कि अवैध पशु व्यापार नेटवर्क पर अंकुश लगाने में भी सहायक होते हैं।
आने वाले समय में असम पुलिस की इस दिशा में कार्रवाई और तेज़ होने की उम्मीद है, और बचाए गए जानवरों के पुनर्वास की प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हैं।