5 नवंबर 2026
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बोर्दोइबाम वेटलैंड दौरा: असम मंत्री रानोज पेगू ने पक्षी अभयारण्य सीमाओं पर किसानों से माँगी सहमति

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बोर्दोइबाम वेटलैंड दौरा: असम मंत्री रानोज पेगू ने पक्षी अभयारण्य सीमाओं पर किसानों से माँगी सहमति

सारांश

असम में पर्यावरण और आजीविका का यह टकराव नया नहीं है — लेकिन बोर्दोइबाम में सरकार ने सीमांकन थोपने की जगह संवाद का रास्ता चुना है। मंत्री पेगू का यह दौरा संकेत देता है कि राज्य सरकार किसानों को दरकिनार किए बिना वेटलैंड संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

मुख्य बातें

असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने 5 नवंबर 2026 को बोर्दोइबाम वेटलैंड का दौरा किया।
दौरा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निर्देशों के तहत, स्थानीय सर्कल अधिकारी और निवासियों की उपस्थिति में हुआ।
प्रस्तावित पक्षी अभयारण्य की सीमाओं के निर्धारण में किसानों की कृषि भूमि और आजीविका के हितों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।
सर्कल अधिकारी को निर्देश दिया गया कि निवासियों से परामर्श के बाद एक सर्वमान्य सीमा-प्रस्ताव तैयार किया जाए।
भूमि स्वामित्व, कृषि गतिविधियाँ और समुदायों के दीर्घकालिक हित इस सीमांकन प्रक्रिया के प्रमुख विवाद-बिंदु हैं।

असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने 5 नवंबर 2026 को स्थानीय सर्कल अधिकारी और निवासियों के साथ बोर्दोइबाम वेटलैंड का दौरा किया, जहाँ उन्होंने प्रस्तावित पक्षी अभयारण्य की सीमाओं के सर्वमान्य निर्धारण पर विस्तृत चर्चा की। यह दौरा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निर्देशों के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय किसान समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना है।

दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

बोर्दोइबाम वेटलैंड असम का एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील प्राकृतिक आवास है, जिसे पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने की योजना है। इस प्रक्रिया में सीमांकन को लेकर भूमि स्वामित्व, कृषि गतिविधियों और समीपवर्ती समुदायों के दीर घकालिक हितों से जुड़े कई अहम मुद्दे सामने आए हैं। मंत्री पेगू ने कहा कि वेटलैंड का संरक्षण और किसानों की कृषि भूमि की सुरक्षा, दोनों को साथ-साथ चलना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

दौरे के दौरान मंत्री ने प्रस्तावित सीमांकन से उत्पन्न चिंताओं की समीक्षा की और एक ऐसे स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया जिससे वेटलैंड का पारिस्थितिक महत्व बना रहे और आसपास के किसानों की कृषि भूमि पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि पक्षी अभयारण्य की सीमाएँ तय होने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों और सुझावों पर विचार करना अनिवार्य है।

मंत्री पेगू ने एक्स पर एक पोस्ट में इस दौरे की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह पहल मुख्यमंत्री के निर्देश पर की गई है, ताकि संरक्षण प्रयासों से निवासियों के हितों पर कोई आँच न आए।

सर्कल अधिकारी को निर्देश

मंत्री ने सर्कल अधिकारी को निर्देश दिया कि वे इलाके के निवासियों — विशेष रूप से उन किसानों — से बातचीत करें जिनकी कृषि भूमि सीमांकन से प्रभावित हो सकती है। इस परामर्श प्रक्रिया के बाद एक सर्वमान्य प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को सौंपा जाएगा। इस कदम से प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद का एक संस्थागत रास्ता खुलने की उम्मीद है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में संरक्षित क्षेत्रों के सीमांकन और आसपास के कृषक समुदायों के अधिकारों को लेकर बहस तेज़ है। बोर्दोइबाम वेटलैंड के आसपास रहने वाले किसानों के लिए यह निर्णय सीधे उनकी ज़मीन और आजीविका से जुड़ा है। गौरतलब है कि वेटलैंड को अभयारण्य घोषित होने के बाद कृषि और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लग सकते हैं।

क्या होगा आगे

सर्कल अधिकारी प्रभावित निवासियों से विचार-विमर्श के बाद अपना प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपेंगे। उम्मीद है कि इस सहमति-आधारित प्रक्रिया से बोर्दोइबाम पक्षी अभयारण्य की सीमाएँ इस प्रकार तय होंगी जो जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय कृषि समुदायों के हितों की भी रक्षा करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा सर्कल अधिकारी की रिपोर्ट और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया में होगी। यह देखना ज़रूरी होगा कि किसानों के सुझाव सीमांकन में वास्तव में प्रतिबिंबित होते हैं या यह परामर्श प्रक्रिया महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोर्दोइबाम वेटलैंड क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
बोर्दोइबाम वेटलैंड असम का एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील प्राकृतिक आवास है, जिसे पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने की योजना है। यह क्षेत्र जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंत्री रानोज पेगू ने बोर्दोइबाम का दौरा क्यों किया?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के निर्देश पर मंत्री रानोज पेगू ने 5 नवंबर 2026 को यह दौरा किया। उद्देश्य था — प्रस्तावित पक्षी अभयारण्य की सीमाओं के निर्धारण में स्थानीय किसानों और निवासियों की चिंताओं को सुना जाए और एक सर्वमान्य समाधान निकाला जाए।
किसानों को बोर्दोइबाम सीमांकन से क्या खतरा है?
अभयारण्य की सीमाओं के भीतर या आसपास आने वाली कृषि भूमि पर प्रतिबंध लग सकते हैं, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित होने का डर है। भूमि स्वामित्व और दीर्घकालिक कृषि गतिविधियाँ इस विवाद के केंद्र में हैं।
अब आगे क्या होगा — पक्षी अभयारण्य की सीमाएँ कब तय होंगी?
सर्कल अधिकारी प्रभावित निवासियों से विचार-विमर्श करने के बाद एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेंगे। इसके बाद ही अंतिम सीमांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी; अभी कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई है।
राज्य सरकार का इस मामले में क्या रुख है?
राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि संरक्षण कार्य स्थानीय लोगों की आजीविका को नुकसान पहुँचाए बिना, आपसी बातचीत और सहमति के आधार पर किए जाएँ। मंत्री पेगू ने कहा कि वेटलैंड संरक्षण और किसानों की कृषि भूमि की सुरक्षा, दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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