असम में भारतीय सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध के बमों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध के बमों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया।
- यह कार्रवाई स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थी।
- सेना और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय ने एक बड़ी आपदा को टाला।
गुवाहाटी, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना ने असम के तिनसुकिया जिले में द्वितीय विश्व युद्ध के समय के उन बमों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया, जो फटे नहीं थे। इससे आम जनता को संभावित खतरों से बचाया गया। अधिकारियों ने इस बारे में मंगलवार को जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, लेडो के बर्मा कैंप क्षेत्र (लेखापानी) में एक व्यक्ति ने गड्ढा खोदते समय कुछ गोला-बारूद पाया। इसमें एक 'जनरल पर्पस' बम और एक 'इन्सेन्डियरी' (आग लगाने वाला) बम शामिल था, जो फटा नहीं था। इस घनी आबादी वाले क्षेत्र में इन विस्फोटकों की उपस्थिती ने जान-माल के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया था।
नागरिक प्रशासन से मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, भारतीय सेना की 'रेड शील्ड डिवीजन' ने मंगलवार को घटनास्थल पर एक विशेष 'बम निरोधक टीम' भेजी। टीम ने पहुंचते ही आस-पास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर निकाला और एक सुरक्षित घेरे का निर्माण किया, साथ ही सुरक्षा के सभी नियमों का सख्ती से पालन करने की व्यवस्था की।
एक अधिकारी ने कहा, "स्थिति को पूरी तत्परता और सावधानी से संभाला गया। किसी भी अप्रिय घटना की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक एहतियात बरते गए।"
इन विस्फोटकों को सावधानीपूर्वक निष्क्रिय किया गया और बाद में रिहायशी इलाकों से दूर, एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। एक अन्य अधिकारी ने कहा, "यह अभियान बेहद पेशेवर तरीके से किया गया, जिससे आम जन और आस-पास के पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।"
द्वितीय विश्व युद्ध के समय के बम कभी-कभी ऊपरी असम के कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर लेडो और लेखापानी में मिलते हैं। युद्ध के दौरान, इन क्षेत्रों का सैन्य गतिविधियों और रसद पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक महत्व था।
अधिकारियों ने बताया कि सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी सहयोग के कारण एक बड़ी आपदा टल गई। इन विस्फोटकों के सफल निष्क्रिय होने से स्थानीय लोगों को राहत और सुरक्षा का भरोसा मिला है।