अयोध्या: धर्माचार्यों ने तालिबानी कानून की निंदा की, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की अपील
सारांश
Key Takeaways
- तालिबान का नया कानून महिलाओं और बच्चों के खिलाफ है।
- धर्माचार्यों ने इसे निंदनीय बताया।
- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की अपील की गई।
- यह कानून मानवता के खिलाफ है।
- भारत में सभी धर्मों के लोग इस कानून की निंदा कर रहे हैं।
अयोध्या, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जगतगुरु परमहंसाचार्य, महंत सीताराम दास और महामंडलेश्वर कुलदीप दास ने तालिबान सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून का विरोध किया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में इसे मानवता के विरुद्ध और धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार बताया।
तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, "धर्म के नाम पर औरतों और बच्चों पर जो जुल्म हुआ है, वह अत्यंत दुखद है।" उन्होंने सभी जिम्मेदार मौलानाओं से अपील की कि यदि धर्म के नाम पर औरतों और बच्चों पर जुल्म नहीं रुका, तो इस्लाम का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। महिलाओं और बच्चों की इज्जत करो और उनके प्रति दया दिखाओ।
उन्होंने आगे कहा, "अपने घर की औरतों का सम्मान करें और बच्चों पर दया दिखाएं। बच्चों को नियंत्रित करें, लेकिन उन्हें आदर दें। इस तरह की सोच से ही आतंकवाद उत्पन्न होता है। यदि घर में इतनी बेरहमी हो, तो बाहर भी हिंसा फैलेगी। इसलिए तालिबान को यह कानून खत्म करना चाहिए, अन्यथा इस्लाम का नाम खराब होगा।"
महामंडलेश्वर कुलदीप दास ने तालिबानी कानून को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा, "हम सभी भारतवासी (चाहे हिंदू हों या मुसलमान) इस कानून की घोर निंदा करते हैं। इसे तुरंत रद्द करना चाहिए। सनातन धर्म में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है और कुरान में भी महिलाओं का सम्मान है। ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए कि महिलाएं गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाएं।"
महंत सीताराम दास ने इसे काला कानून बताया। उन्होंने पूछा, "क्या आपका कानून यही है? क्या यही आपका संविधान है कि आप महिलाओं के साथ इस तरह अत्याचार करें?"
उन्होंने कहा, "जहां औरतों की इज्जत नहीं होती, वहां नर्क होता है। ऐसे कानून को तुरंत समाप्त करना चाहिए। किसी को किसी की इज्जत से खेलने का हक नहीं है। यदि वहां कोई अच्छा इंसान है, तो उसे इस खराब फैसले का विरोध करना चाहिए।"
महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने कहा, "तालिबान द्वारा बनाया गया कानून अत्यंत निंदनीय है। हमारे देश में, औरतों को देवी माना जाता है। घरेलू हिंसा का मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन मारपीट करें। इसे बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। पीटना आवश्यक नहीं है। हम इस कानून की निंदा करते हैं और इसे बदलने की आवश्यकता है।"