आजम खान की ईडी गिरफ्तारी: सुप्रीम कोर्ट ने नकारी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट 16 नवंबर को करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (SP) नेता आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय से 5 नवंबर 2026 को कोई राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई 16 नवंबर को वहीं होगी।
मुख्य घटनाक्रम
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद ईडी ने आजम खान को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी को उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की और रजिस्ट्री को आदेश दिया कि मामले के समस्त अभिलेख दो दिनों के भीतर इलाहाबाद उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किए जाएँ।
इस बीच, मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में गाज़ियाबाद की विशेष अदालत ने आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिसके बाद उन्हें डासना जेल स्थानांतरित किया गया है।
वकील की दलीलें
आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल पर 28 मामले दर्ज हैं, जिनमें एक मनी लॉन्ड्रिंग का है। सिब्बल ने कहा, 'यह सरासर उत्पीड़न है।' उन्होंने बताया कि 2006 की एक घटना के लिए एफआईआर 2019 में दर्ज की गई, जब आजम खान किसी पद पर नहीं थे।
सिब्बल ने आजम खान की 80 वर्ष की आयु का हवाला देते हुए जमानत की अपील की और चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति रही तो उनके मुवक्किल जेल में ही दम तोड़ देंगे।
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी
पीठ ने टिप्पणी की कि आजम खान पर आरोप है कि जौहर विश्वविद्यालय के लिए किसानों की ज़मीन जबरन ली गई थी। अदालत ने स्वीकार किया कि घटना 2006 की और एफआईआर 2019 की है, लेकिन यह भी संकेत दिया कि यह दलील दी जा सकती है कि देरी उनके कथित प्रभाव के कारण हुई। इस पर सिब्बल ने पुनः स्पष्ट किया कि उस दौर में आजम सत्ता में नहीं थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे रहे हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामले वर्षों से विवादास्पद रहे हैं। समाजवादी पार्टी इन सभी मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बताती है, जबकि जाँच एजेंसियों का रुख यह है कि कार्रवाई साक्ष्य-आधारित है। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी हलचल के बीच विपक्षी नेताओं के खिलाफ जाँच एजेंसियों की सक्रियता राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई है।
आगे की राह
इलाहाबाद उच्च न्यायालय अब 16 नवंबर 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले के सभी रिकॉर्ड दो दिनों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। फिलहाल आजम खान डासना जेल में न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत अर्जी पर अब उच्च न्यायालय ही अंतिम निर्णय लेगा।