23 सितंबर 2026
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आजमगढ़ हत्याकांड: दो पुजारियों की हत्या पर विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा, BJP बोली — कानून-व्यवस्था पूरी तरह मजबूत

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आजमगढ़ हत्याकांड: दो पुजारियों की हत्या पर विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा, BJP बोली — कानून-व्यवस्था पूरी तरह मजबूत

सारांश

आजमगढ़ में दो पुजारियों की हत्या और बाद के एनकाउंटर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को झकझोर दिया। कांग्रेस और सपा ने योगी सरकार पर निशाना साधा, तो BJP ने इसे व्यक्तिगत मानसिक विकृति बताकर कानून-व्यवस्था के अपने दावे पर कायम रही। 2027 चुनाव से पहले यह मुद्दा और उग्र होने के आसार हैं।

मुख्य बातें

आजमगढ़ में दो पुजारियों की हत्या और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर पर 23 सितंबर 2026 को तीखी राजनीतिक बहस छिड़ी।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एनकाउंटर को संवैधानिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया और न्यायिक सज़ा की माँग की।
SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आजमगढ़, गाजीपुर, गाजियाबाद में बढ़ते अपराध का हवाला देते हुए सरकार के दावों पर सवाल उठाए।
BJP विधायक पलटू राम ने घटना को 'मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति' का कृत्य बताते हुए इसे कानून-व्यवस्था की विफलता मानने से इनकार किया।
विपक्ष ने मामले की न्यायिक जाँच की माँग की; सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में दो पुजारियों की हत्या और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर को लेकर 23 सितंबर 2026 को प्रदेश की राजनीति तेज़ी से गरमा गई। विपक्षी दलों ने इस घटना को राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का प्रमाण बताया, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में सुरक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मॉडल करार दिया।

विपक्ष का हमला: कांग्रेस और सपा ने साधा निशाना

लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'दो पुजारियों की हत्या की यह भयानक घटना उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को दिखाती है। यह दिखाता है कि अपराधी कितने बेखौफ हो गए हैं और एनकाउंटर भी उन्हें कैसे नहीं रोक पा रहे हैं।' उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, 'पुलिस को अपराधियों को गिरफ्तार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें संविधान के अनुसार सजा मिले, चाहे वह कठोर कारावास हो या मौत की सजा। लेकिन पुलिस भी अपराधियों के साथ अपराधियों जैसा ही बर्ताव कर रही है।'

समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भी इस घटना को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा, 'आप लगातार देख सकते हैं कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। आजमगढ़, गाजीपुर या गाजियाबाद को ही देख लीजिए — महिलाओं को परेशान किया जा रहा है, हत्याएँ हो रही हैं। फिर भी भाजपा सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है और दावा कर रही है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है।' यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कई ज़िलों से हत्या और उत्पीड़न की खबरें आती रही हैं।

BJP का पलटवार: योगी मॉडल की हुई तारीफ

बलरामपुर से BJP विधायक पलटू राम ने इस हत्याकांड को कानून-व्यवस्था की विफलता मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'इस घटना को कानून-व्यवस्था से नहीं जोड़ सकते। अपने ही परिवार के सदस्यों और पुजारी की इस तरह हत्या कोई मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति ही कर सकता है। कोई भी व्यक्ति जो मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है, ऐसा काम नहीं कर सकता।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी के प्रशासनिक कार्य की सराहना करते हुए कहा, 'पिछले 10 सालों में सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कैसे काम किया है, यह जगज़ाहिर है। आज अगर आप मध्य प्रदेश या हरियाणा जाएँ, तो वहाँ सीएम योगी के कानून-व्यवस्था मॉडल की चर्चा होती है।'

एनकाउंटर पर उठे सवाल

गौरतलब है कि हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने एनकाउंटर की कार्रवाई की, जिसे विपक्ष ने सवालों के घेरे में रखा। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, एनकाउंटर-आधारित पुलिसिंग संविधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है और इससे अपराध पर दीर्घकालिक अंकुश नहीं लगाया जा सकता। यह इस वर्ष उत्तर प्रदेश में हुए उन कई एनकाउंटरों में से एक है, जिन पर मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल सवाल उठाते रहे हैं।

क्या होगा आगे

आजमगढ़ हत्याकांड अब विधानसभा के अगले सत्र तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। विपक्ष ने मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है, जबकि सरकार का रुख अभी तक इस बारे में स्पष्ट नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था का मुद्दा दोनों पक्षों के लिए निर्णायक राजनीतिक हथियार बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुविधाजनक तो लगता है, लेकिन इससे व्यापक सवाल टाले नहीं जा सकते। विपक्ष का एनकाउंटर पर संवैधानिक आपत्ति उठाना वैध है, परंतु वह स्वयं कोई वैकल्पिक नीति प्रस्तुत करने से बचता नज़र आता है। असली कसौटी यह है कि 2027 के चुनाव से पहले क्या सरकार इस मामले में पारदर्शी जाँच के लिए तैयार होगी — या यह मुद्दा भी महज़ प्रेस बयानों तक सिमटकर रह जाएगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजमगढ़ हत्याकांड में क्या हुआ था?
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में दो पुजारियों की हत्या की गई, जिसके बाद पुलिस ने एनकाउंटर की कार्रवाई की। इस घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी बहस को तेज़ कर दिया है।
कांग्रेस और सपा ने इस मामले पर क्या कहा?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एनकाउंटर को संवैधानिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया और माँग की कि अपराधियों को न्यायालय के ज़रिए सज़ा दिलाई जाए। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आजमगढ़, गाजीपुर और गाजियाबाद में बढ़ते अपराध का हवाला देकर योगी सरकार के कानून-व्यवस्था के दावों को खारिज किया।
BJP ने घटना का बचाव कैसे किया?
बलरामपुर से BJP विधायक पलटू राम ने कहा कि यह हत्याकांड किसी मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति का कृत्य है और इसे कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी के 10 साल के कार्यकाल को कानून-व्यवस्था के लिहाज़ से देश के अन्य राज्यों के लिए मॉडल बताया।
विपक्ष ने क्या माँग की है?
विपक्षी दलों ने आजमगढ़ हत्याकांड और एनकाउंटर की स्वतंत्र न्यायिक जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि सरकार को एनकाउंटर की बजाय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपराधियों को सज़ा दिलानी चाहिए।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी?
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था का यह मुद्दा दोनों पक्षों के लिए अहम राजनीतिक हथियार बन सकता है। विपक्ष इसे योगी सरकार की विफलता के रूप में प्रचारित करेगा, जबकि भाजपा एनकाउंटर को त्वरित न्याय के रूप में पेश करती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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