कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का भाजपा पर हमला: संसद, UP कानून-व्यवस्था और राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने 19 जुलाई 2026 को लखनऊ में तीखे बयान जारी करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर एक साथ तीन मोर्चों पर निशाना साधा — संसद के संचालन, उत्तर प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारें जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर खुली बहस से लगातार बचती आ रही हैं।
संसद के मानसून सत्र पर भाजपा को ठहराया जिम्मेदार
आगामी मानसून सत्र की कार्यवाही को लेकर राजपूत ने स्पष्ट कहा कि सदन के सुचारु संचालन की पूरी जिम्मेदारी भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से भाजपा लगातार संसद की कार्यवाही को बाधित करती रही है — कभी खुद व्यवधान उत्पन्न करके, कभी ऐसा माहौल बनाकर जिसमें जनहित के विषयों पर चर्चा संभव न हो सके।
राजपूत ने कहा, 'सच्चाई यह है कि भाजपा जनता के मुद्दों को संसद में आने ही नहीं देती। अगर विपक्ष को जनता की समस्याएं उठाने से रोका जाएगा तो यह माना जाएगा कि भाजपा की लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
UP में कानून-व्यवस्था पर तीखे सवाल
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए राजपूत ने कहा कि यदि राज्य सरकार का दावा है कि माफिया राज समाप्त हो चुका है, तो प्रदेश में रोज हत्याएं क्यों हो रही हैं। उन्होंने संभल, बहराइच और कासगंज जैसे जिलों में सांप्रदायिक तनाव और दंगों की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार की विफलता को रेखांकित किया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में 396 से अधिक दंगों का उल्लेख है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश महिलाओं और दलितों के लिए सबसे असुरक्षित राज्यों में शामिल है और बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिलाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की माँग
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के मुद्दे पर राजपूत ने आरोप लगाया कि मौजूदा ट्रस्ट राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहा है और इसका पुनर्गठन अनिवार्य है। उन्होंने माँग की कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर इसे पूर्णतः धार्मिक स्वरूप में नए सिरे से गठित किया जाए।
राजपूत के अनुसार, नए ट्रस्ट में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि राम मंदिर का संचालन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप और व्यापक प्रतिनिधित्व के साथ हो सके।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि कांग्रेस की यह तीन-आयामी आक्रामकता संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आई है, जो विपक्ष की रणनीतिक तैयारी को दर्शाती है। भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की माँग एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकती है।