महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: आषाढ़ त्रयोदशी पर बाबा महाकाल को मेवे, फल और मिठाई का भोग
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 27 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े, जिनमें से अनेक भक्त बीती रात से ही कतार में खड़े थे।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और उन्हें दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके उपरांत बाबा को ड्राईफ्रूट्स, फल और मिठाई का भोग अर्पित किया गया।
दिव्य शृंगार के क्रम में बाबा महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रुद्राक्ष की माला, रजत की मुंडमाला और सुगंधित पुष्पमालाएँ धारण कराई गईं। भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
भस्म आरती की विशेषता
गौरतलब है कि पूर्व में भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग होता था, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का प्रयोग किया जाता है। यह परिवर्तन मंदिर प्रशासन द्वारा अनुष्ठान की पवित्रता और स्वास्थ्य-मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया था। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और व्यवस्था
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ तक उज्जैन पहुँचती हैं। सोमवार होने के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रही। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण एवं सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
आगे का दृष्टिकोण
आषाढ़ मास में सोमवार को महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, क्योंकि शिव भक्तों के लिए यह मास विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार आने वाले सोमवारों पर भी इसी प्रकार की भव्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।