बालासाहब देवरस पुण्यतिथि: अमित शाह, नड्डा समेत कई नेताओं ने आरएसएस के तीसरे सरसंघचालक को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस की पुण्यतिथि पर 17 जून 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित सत्तारूढ़ दल के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने देवरस के सामाजिक समरसता, अस्पृश्यता उन्मूलन और आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा में दिए गए योगदान को स्मरण किया।
अमित शाह का संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, बालासाहब देवरस राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और युवाओं के चरित्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महान व्यक्तित्व थे। शाह ने रेखांकित किया कि देवरस अस्पृश्यता को सबसे बड़ा अभिशाप मानते थे और आपातकाल के कठिन दिनों में भी संघ को संगठित रखते हुए युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने कहा कि बालासाहब 'हम सभी की प्रेरणा बने रहेंगे।'
जेपी नड्डा और अन्य केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बालासाहब देवरस का संपूर्ण जीवन राष्ट्र आराधना, सामाजिक समरसता, वंचित वर्ग के उत्थान और मां भारती के गौरव की स्थापना के लिए समर्पित रहा। नड्डा ने उनके 'ओजस्वी व्यक्तित्व' और 'राष्ट्र-प्रथम' की दिशा में किए गए कार्य को राष्ट्रप्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देवरस के जीवन को 'त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण' बताते हुए कहा कि उनका कार्य आज भी समाज को एकजुटता, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर प्रेरित करता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें 'मां भारती के सच्चे सेवक' कहते हुए शत-शत नमन किया और कहा कि उनके आदर्श जीवन और विचार भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का संदेश
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि बालासाहब देवरस ने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देवरस के योगदान के तीन विशेष पहलुओं को रेखांकित किया — सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध जनजागरण अभियान, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को वैचारिक आधार प्रदान करना, और आपातकाल के विरुद्ध लोकतंत्र की रक्षा।
नवीन ने आगे लिखा कि देवरस का 'ध्येयनिष्ठ जीवन' एक सशक्त, संगठित और आत्मगौरव से परिपूर्ण भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
बालासाहब देवरस: संक्षिप्त परिचय
मधुकर दत्तात्रेय देवरस, जिन्हें 'बालासाहब देवरस' के नाम से जाना जाता है, 1973 से 1994 तक आरएसएस के सरसंघचालक रहे। उनके कार्यकाल में संघ ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अपना विस्तार किया और अस्पृश्यता के विरुद्ध अभियान को संगठनात्मक प्राथमिकता दी। 1975-77 के आपातकाल के दौरान संघ पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद उन्होंने संगठन को एकजुट रखा — यह उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है।
राजनीतिक महत्व
गौरतलब है कि इस पुण्यतिथि पर केंद्र सरकार के कई शीर्ष मंत्रियों का एक साथ श्रद्धांजलि देना संघ और सत्तारूढ़ BJP के बीच वैचारिक एकता को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब संघ-BJP समन्वय पर राष्ट्रीय चर्चा जारी है। आने वाले समय में इस श्रद्धांजलि परंपरा से संघ के वैचारिक एजेंडे को और व्यापक सार्वजनिक मंच मिलने की संभावना है।