बांग्लादेश ने जमात-ए-इस्लामी और छात्र शिबिर को 'आतंकी संगठन' घोषित किया, 200 से अधिक मौतों के बाद बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश सरकार ने 1 अगस्त 2024 को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर को 'उग्रवादी और आतंकवादी' संगठन घोषित कर दिया। यह कदम ढाका सहित पूरे देश में हफ्तों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया, जिनमें 200 से अधिक लोगों की जान गई और हज़ारों घायल हुए। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने जमात की सभी सहयोगी संस्थाओं पर भी यह प्रतिबंध लागू किया है।
प्रतिबंध का आधार और पृष्ठभूमि
बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, 16 जुलाई से 21 जुलाई 2024 के बीच देशभर में फैली हिंसा में हुई मौतों और नुकसान की जाँच के लिए हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों का एक जाँच आयोग गठित किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद से देश के युवा बार-बार सड़कों पर उतर रहे हैं।
सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और उसकी सहयोगी इकाइयों पर प्रतिबंध को हिंसा में उनकी कथित भूमिका से जोड़ा है। गौरतलब है कि यह बांग्लादेश के हालिया राजनीतिक इतिहास में किसी प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक दल पर लगाया गया सबसे कड़ा प्रशासनिक कदम है।
छात्र आंदोलन और नेताओं की रिहाई
प्रतिबंध की घोषणा से पहले, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के प्रमुख समन्वयक नाहिद इस्लाम और अन्य नेताओं को डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) कार्यालय से रिहा किया गया। आंदोलन ने घोषणा की कि वह 2 अगस्त को एक बड़ी प्रार्थना सभा और जन-मार्च का आयोजन करेगा, जिसमें छात्रों और आम नागरिकों की भागीदारी अपेक्षित है।
व्यापक हिंसा और मानवाधिकार रिपोर्ट
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन अधिकार की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच भीड़ की हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में कुल 74 लोगों की मौत हुई। इनमें से 33 लोग भीड़ के हमलों में मारे गए, जबकि 41 लोगों की जान राजनीतिक हिंसा में गई और 970 लोग घायल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ द्वारा मारे गए अधिकांश लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह था। कुछ मामलों में धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में भी हत्याएँ हुईं। अधिकार ने कहा कि यह स्थिति कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर लोगों के घटते भरोसे को दर्शाती है।
बीएनपी की अंदरूनी गुटबाजी
रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया कि इसी अवधि में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर आपसी संघर्ष की 57 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें 4 लोगों की मौत और 400 लोग घायल हुए। नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में 2 घटनाओं में 16 लोग घायल हुए। बीएनपी के भीतर विवाद जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, खुदाई की मिट्टी की बिक्री, स्थानीय चुनाव टिकट और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर थे। कई घटनाओं में बंदूकों, बमों और अन्य घातक हथियारों के इस्तेमाल की भी पुष्टि हुई।
आगे क्या होगा
मानवाधिकार संगठन अधिकार ने आरोप लगाया है कि बीएनपी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, ज़मीन कब्जाने, अपहरण, दुष्कर्म, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले तथा राजनीतिक विरोधियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप हैं। जाँच आयोग की रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।