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ट्विशा शर्मा मौत मामला: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल निलंबित किया

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ट्विशा शर्मा मौत मामला: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल निलंबित किया

सारांश

ट्विशा शर्मा मौत मामले में BCI ने अधिवक्ता समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिया है। 10 दिन फरार रहने के बाद उन्हें जबलपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली से दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया और CBI को जांच सौंपी जा चुकी है।

मुख्य बातें

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 22 मई को अधिवक्ता समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा — जांच में प्रथम दृष्टया भूमिका साबित हुई, आरोपी फरार था और जांच में असहयोगी था।
समर्थ सिंह को 22 मई को भोपाल पुलिस ने जबलपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया; 12 मई को पत्नी ट्विशा शर्मा की कथित आत्महत्या के बाद से फरार थे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली की टीम से दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया; परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
मामले की जांच CBI को सौंपी गई है; BCI अध्यक्ष ने इस फैसले का समर्थन किया।
आरोपी की माँ जिला न्यायाधीश हैं — BCI ने गवाहों और सबूतों पर असर पड़ने की आशंका जताई।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 22 मई को अधिवक्ता समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत जांच के बीच की गई है, जिसमें समर्थ सिंह की कथित भूमिका और जांच में असहयोग को आधार बनाया गया है।

निलंबन का आधार क्या है

BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने यह आदेश जारी करते हुए कहा, 'हमने उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया है। उनकी पत्नी ट्विशा शर्मा की हत्या में उनकी भूमिका है। जांच में यह प्रथम दृष्टया साबित हुआ है। इसके अलावा वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और फरार थे।' मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जब तक ट्रायल में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक ऐसे व्यक्ति को वकालत की अनुमति नहीं दी जा सकती।

प्रभावशाली पृष्ठभूमि और गवाहों पर खतरा

मिश्रा ने मामले को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसमें प्रभावशाली लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'उनकी मां जिला न्यायाधीश हैं। ये काफी प्रभावशाली लोग हैं, इसलिए गवाह आसानी से सामने नहीं आएंगे। सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना है।' यह टिप्पणी इस मामले में निष्पक्ष जांच की जटिलता को रेखांकित करती है।

गिरफ्तारी और हाईकोर्ट की कार्रवाई

समर्थ सिंह, जो अपनी पत्नी ट्विशा शर्मा की 12 मई को हुई कथित आत्महत्या के बाद से फरार थे, को 22 मई को भोपाल पुलिस ने जबलपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दायर अपनी अंतरिम जमानत याचिका वापस ले ली थी।

हाईकोर्ट ने याचिका निपटाते हुए कहा कि यदि आरोपी पुलिस के भय से आत्मसमर्पण करना चाहता है, तो वह ट्रायल कोर्ट या जांच अधिकारी के समक्ष समर्पण कर सकता है और तत्पश्चात कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

दूसरा पोस्टमार्टम और CBI जांच

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली की टीम से कराने का आदेश दिया है। परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया। BCI अध्यक्ष मिश्रा ने मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले का भी समर्थन किया, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित होगी।

आगे की राह

समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब मामला CBI के हाथों में है और एम्स दिल्ली की टीम द्वारा दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इस जांच की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ट्रायल की प्रगति के आधार पर BCI समर्थ सिंह के निलंबन की समीक्षा करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह दर्शाता है कि संस्था ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। परंतु यह सवाल भी उठता है कि क्या 'प्रथम दृष्टया भूमिका' का आधार पर्याप्त कानूनी आधार है, या यह जनदबाव में लिया गया निर्णय है। दूसरा पोस्टमार्टम और CBI जांच — दोनों एक साथ — यह संकेत देते हैं कि राज्य की जांच एजेंसियों पर भरोसा पहले ही कमज़ोर हो चुका है। इस मामले की असली परीक्षा तब होगी जब CBI की रिपोर्ट और एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आएगी — तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा मामला क्या है?
ट्विशा शर्मा की 12 मई को मध्य प्रदेश में कथित आत्महत्या से मौत हुई थी। उनके परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाया और उनके पति अधिवक्ता समर्थ सिंह पर हत्या में भूमिका का संदेह है, जिसके चलते CBI जांच और BCI कार्रवाई हुई।
BCI ने समर्थ सिंह का लाइसेंस क्यों निलंबित किया?
BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के अनुसार, जांच में समर्थ सिंह की प्रथम दृष्टया भूमिका साबित हुई है, वे फरार थे और जांच में असहयोग कर रहे थे। इन्हीं आधारों पर तत्काल प्रभाव से लाइसेंस निलंबित किया गया।
समर्थ सिंह को कहाँ और कब गिरफ्तार किया गया?
भोपाल पुलिस ने समर्थ सिंह को 22 मई को जबलपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर अपनी अंतरिम जमानत याचिका वापस ले ली थी।
एम्स दिल्ली से दूसरा पोस्टमार्टम क्यों कराया जा रहा है?
ट्विशा शर्मा के परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली की टीम से दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है ताकि मौत के कारण की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि हो सके।
इस मामले की जांच CBI को क्यों सौंपी गई?
मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की संवेदनशीलता और आरोपी की प्रभावशाली पृष्ठभूमि — उनकी माँ जिला न्यायाधीश हैं — को देखते हुए जांच CBI को सौंपी। BCI अध्यक्ष मिश्रा ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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