अभिषेक बनर्जी के सहायक सुमित रॉय को ₹400 करोड़ मिट्टी चोरी मामले में 10 दिन की पुलिस हिरासत
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यकारी सहायक सुमित रॉय को 31 अक्टूबर 2026 को कोलकाता की एक निचली अदालत ने ₹400 करोड़ के मिट्टी चोरी मामले में 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। डायमंड हार्बर पुलिस जिले के कलिताला-आशुति पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में रॉय पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे और अब उनसे गहन पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (CID) ने 10 सितंबर को पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी में करोड़ों रुपए के अवैध भूमि हड़पने के मामले में रॉय को पहली बार गिरफ्तार किया था। इसके बाद 28 अक्टूबर को डायमंड हार्बर जिला पुलिस ने उन्हें मिट्टी चोरी के एक अलग मामले में भी गिरफ्तार दिखाया।
शनिवार को उन्हें कोलकाता की निचली अदालत में पेश किया गया, जहाँ जिला न्यायाधीश ने सुनवाई के अंत में 10 दिन की पुलिस हिरासत का आदेश दिया।
पुलिस की जांच का दायरा
डायमंड हार्बर पुलिस जिले के एक अधिकारी के अनुसार, मिट्टी चोरी मामले में रॉय से गहन पूछताछ करना और इस घोटाले में शामिल अन्य प्रभावशाली लाभार्थियों के बारे में जानकारी जुटाना आवश्यक है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार का यह चक्र कितना गहरा है और इस मामले में वित्तीय लेन-देन के स्रोत क्या हैं
, इसका पता लगाने का प्रयास जारी है।
CID द्वारा दायर आरोप-पत्र में जांच एजेंसी ने कथित तौर पर सालबोनी अवैध भूमि हड़पने के मामले में रॉय के कार्यालय तक धनराशि पहुँचने के तरीके का विस्तृत विवरण दिया है।
मामले की जड़: सालबोनी भूमि घोटाला
जांच के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सालबोनी में अवैध भूमि हड़पने के मामले से हुई, जिसमें पुलिस ने सबसे पहले TMC के पूर्व विधायक सुजय हाजरा को गिरफ्तार किया था। हाजरा से पूछताछ के दौरान रॉय का नाम सामने आया, जिसके बाद कई दौर की पूछताछ के बाद CID अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि यह मामला दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ से TMC सांसद अभिषेक बनर्जी लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं। रॉय उनके कार्यकारी सहायक के रूप में काम करते थे।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC के कई नेताओं और उनसे जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की जड़ें सत्ता के उच्च स्तरों तक जाती हैं, हालाँकि अभी तक जांच एजेंसियों ने किसी वरिष्ठ नेता के सीधे संलिप्त होने की पुष्टि नहीं की है।
10 दिन की पुलिस हिरासत की अवधि में जांचकर्ता कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन की श्रृंखला और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। अगली सुनवाई में अदालत का रुख तय करेगा कि आगे की कार्यवाही किस दिशा में जाती है।