भारत-पाक संबंध सुधरें तो मिटेगी खटास: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 2 जुलाई को बरेली में भारत-पाकिस्तान संबंधों, ईरान के घटनाक्रम और वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण सहित कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पड़ोसी देशों के बीच बेहतर रिश्ते न केवल दोनों मुल्कों, बल्कि पूरे क्षेत्र के हित में हैं।
भारत-पाकिस्तान संबंध: संवाद की अपील
दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने की माँग पर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि भारत के अनेक विद्वानों, नौकरशाहों और राजनेताओं ने पत्र लिखकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से ताल्लुकात बेहतर करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार, यह माँग बिल्कुल उचित है, क्योंकि अच्छे पड़ोसी से माहौल सुखद रहता है।
उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश अखंड भारत के अभिन्न हिस्से रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि वाजपेयी ने बस सेवा और वीजा व्यवस्था शुरू की थी। उनके मुताबिक, यदि दोबारा बस सेवा, हवाई संपर्क और रेल मार्ग बहाल हो जाएँ, तो दोनों देशों के बीच की कड़वाहट स्वतः समाप्त हो जाएगी।
ईरान घटनाक्रम और PM मोदी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की शहादत के बाद होने वाले अंतिम संस्कार के संदर्भ में मौलाना ने बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा था। मोदी स्वयं नहीं जा रहे और उन्होंने बिहार के राज्यपाल अता हसनैन तथा सहायक विदेश मंत्री को अपना प्रतिनिधि नामित किया है।
मौलाना शहाबुद्दीन के अनुसार, यह प्रधानमंत्री के लिए ईरान से संबंध प्रगाढ़ करने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर था और उन्हें व्यक्तिगत रूप से वहाँ जाकर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहिए था। उन्होंने रेखांकित किया कि हाल की 40 दिन की जंग के दौरान भी ईरान ने भारतीय जहाजों को निर्बाध आवाजाही दी, जिसके कारण भारत में तेल, पेट्रोल और गैस की आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई।
वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण पर चिंता
वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद भारत सरकार ने वक्फ संपत्तियों को डिजिटल करने के लिए 'उम्मीद' पोर्टल लॉन्च किया था। मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि पोर्टल पर पंजीकरण की मूल तारीख बीत चुकी है और ट्रिब्यूनल द्वारा बढ़ाई गई समय सीमा भी समाप्त हो गई है।
उन्होंने चेताया कि लोगों ने बड़ी लापरवाही बरती और बढ़ी हुई समय सीमा के बावजूद वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं कराया। इससे खतरा उत्पन्न हो गया है कि ये संपत्तियाँ सरकारी नियंत्रण में जा सकती हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
क्या होगा आगे
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद सामान्यीकरण को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएँ चल रही हैं। वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा को लेकर मुस्लिम संगठनों में बेचैनी बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता की उम्मीद की जा रही है।