भोजशाला मंदिर घोषित: अशोक जैन बोले, साढ़े छह साल के संघर्ष और बलिदान का मिला फल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार जिले की भोजशाला को आधिकारिक रूप से मंदिर घोषित किए जाने के बाद 16 मई 2026 को पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह की लहर दौड़ गई। भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, समर्पण और अनेक लोगों के बलिदान का परिणाम है।
साढ़े छह साल की कानूनी और सामाजिक लड़ाई
अशोक जैन के अनुसार भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता दिलाने की यह लड़ाई लगभग साढ़े छह साल तक चली। इस दौरान कई उतार-चढ़ाव आए और समिति तथा हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं ने लगातार आंदोलन जारी रखा। उन्होंने बताया कि समय-समय पर सत्याग्रह भी किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
पूजा पर पाबंदियों से लेकर 24 घंटे दर्शन तक का सफर
जैन ने बताया कि शुरुआती दौर में भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना को लेकर कई तरह की पाबंदियाँ थीं। उनके अनुसार 2003 के आसपास पहली बार यहाँ पूजा की अनुमति मिली और तब से यह परंपरा धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही। कई बार प्रशासनिक बाधाएँ भी सामने आईं, लेकिन भक्तों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट के फैसले के बाद भक्तों को यहाँ 24 घंटे पूजा करने जैसी स्थिति उपलब्ध हो गई है।
हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया निर्णय
जैन के अनुसार वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के अंत में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक तथ्यों और सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर यह निर्णय दिया। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि भोजशाला ऐतिहासिक रूप से एक मंदिर और शिक्षा का केंद्र रही है। गौरतलब है कि यह स्थल राजा भोज से जुड़ी विरासत के रूप में सदियों से पहचाना जाता रहा है।
समिति और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
भोज उत्सव समिति के जनरल मैनेजर हेमंत डौराया ने कहा कि यह दिन उनके लिए अत्यंत हर्ष का है। उन्होंने बताया कि पहले दर्शन के लिए कुछ सीमाएँ और शुल्क जैसी व्यवस्थाएँ थीं, किंतु अब कोर्ट के आदेश के बाद भक्त बिना किसी परेशानी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर पा रहे हैं। उनके अनुसार जिस तरह बसंत पंचमी पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आते थे, उसी तरह अब रोज़ाना बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है।
परिसर में भक्ति का माहौल
फैसले के बाद भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ी हैं। समिति के सदस्यों ने परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और फूल-मालाओं के साथ विशेष पूजा-अर्चना की। भक्तों का कहना है कि अब उन्हें यहाँ बिना किसी बाधा के दर्शन करने का सौभाग्य मिल रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और समिति मिलकर यहाँ व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम करेंगे।