30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार कांस्टेबल पेपर लीक: ईडी ने ₹2.01 करोड़ की 5 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं, कौशिक कुमार कर की कंपनियाँ निशाने पर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार कांस्टेबल पेपर लीक: ईडी ने ₹2.01 करोड़ की 5 अचल संपत्तियाँ जब्त कीं, कौशिक कुमार कर की कंपनियाँ निशाने पर

सारांश

बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 का प्रश्नपत्र लीक कोई सामान्य चोरी नहीं थी — यह एक पूर्व-ब्लैकलिस्टेड कंपनी के मालिक द्वारा डमी कंपनी और फर्जी निदेशकों के ज़रिए रची गई सुनियोजित साजिश थी। ईडी की ₹2.01 करोड़ की जब्ती इस पर्त-दर-पर्त धन-शोधन नेटवर्क को उजागर करती है।

मुख्य बातें

ईडी के पटना जोनल कार्यालय ने 30 अक्टूबर 2026 को PMLA 2002 के तहत ₹2.01 करोड़ की 5 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
जब्त संपत्तियाँ एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं, जो कौशिक कुमार कर के नियंत्रण में बताई जाती हैं।
कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को ₹5.9 करोड़ का अग्रिम भुगतान मिला था; शेष ₹2.01 करोड़ शेल कंपनियों के ज़रिए नकद में बदले गए।
पूर्व-ब्लैकलिस्टेड ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की पहचान छिपाने के लिए डमी डायरेक्टरों वाली फर्जी कंपनी बनाई गई।
पेपर लीक से बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 रद्द हुई, हज़ारों उम्मीदवारों के करियर पर असर पड़ा।
ईडी की जाँच जारी है; अन्य आरोपियों और संपत्तियों की भी पड़ताल होगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पटना जोनल कार्यालय ने बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 के प्रश्न-पत्र लीक मामले में 30 अक्टूबर 2026 को ₹2.01 करोड़ मूल्य की 5 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कर लीं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई है। जब्त संपत्तियाँ एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत हैं, जो कि आरोपी कौशिक कुमार कर के स्वामित्व और नियंत्रण में बताई जाती है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), पटना द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। यह प्राथमिकी आईपीसी 1860 की धाराओं 120बी, 420, 467, 468 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने में संलिप्त विभिन्न टेलीग्राम यूआरएल, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों को आरोपी बनाया गया था।

22 अगस्त 2024 को दाखिल आरोपप्रत्र के अनुसार, ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के असली मालिक कौशिक कुमार कर ने एक सुनियोजित साजिश के तहत अपनी ही एक अन्य कंपनी कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल किया।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी और डमी डायरेक्टरों की भूमिका

जाँच में सामने आया कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास न तो मुद्रण का कोई पूर्व अनुभव था और न ही उसकी अपनी कोई प्रिंटिंग प्रेस थी। इसके बावजूद सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल, बिहार ने उसे यह ठेका दे दिया। ईडी के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की संलिप्तता को छिपाया जा सके, जिसे पहले ही परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामलों में शामिल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।

कर ने कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स में अपने सहयोगियों को डमी डायरेक्टर के रूप में रखा, ताकि पिछले मामलों की वजह से लगी पाबंदियों से बचा जा सके। इसके बाद ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस के साथ हुए अनुबंध के उल्लंघन में यह ठेका उसी प्रतिबंधित कंपनी को सौंप दिया गया।

धन-शोधन और संपत्ति जब्ती का आधार

आरोपप्रत्र के अनुसार, कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को ₹5.9 करोड़ का अग्रिम भुगतान मिला था। इसमें से केवल एक हिस्सा ही ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया, जबकि शेष ₹2.01 करोड़ की राशि कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से घुमाई गई और बाद में गायब हो गई।

ईडी की जाँच में सामने आया कि इस आपराधिक गतिविधि से अर्जित रकम को कोलकाता स्थित शेल कंपनियों के एक जटिल नेटवर्क के ज़रिए छिपाया गया, जिनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था। अंततः इस रकम को नकद में बदल दिया गया, जिससे धन के स्रोत और प्रकृति का सुराग मिटा दिया गया। चूँकि अपराध से प्राप्त इस रकम का आगे पता नहीं लगाया जा सका, इसलिए एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड की 5 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की गईं।

परीक्षार्थियों और बिहार सरकार पर असर

प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए जाने के दौरान रास्ते में अन्य आरोपियों की मिलीभगत से लीक कर दिए गए थे। इस लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे बिहार सरकार को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि परीक्षा में शामिल हज़ारों उम्मीदवारों के करियर पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। गौरतलब है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा पेपर लीक के कई मामले सामने आए हैं, और यह मामला उस श्रृंखला की एक गंभीर कड़ी है।

आगे की जाँच

ईडी की ओर से इस मामले में जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, आगे की जाँच में अपराध से हासिल अन्य राशियों का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त अन्य आरोपियों या कंपनियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। इस मामले में आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति जब्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक पूर्व-दंडित कंपनी द्वारा नई पहचान गढ़कर सरकारी तंत्र को चकमा देने की कोशिश है — जो यह सवाल उठाता है कि सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ने बिना अनुभव और प्रेस के एक कंपनी को इतना संवेदनशील ठेका कैसे दिया। ₹5.9 करोड़ के अग्रिम भुगतान का बड़ा हिस्सा कोलकाता की शेल कंपनियों में घुमाकर नकद में बदला गया — यह पैटर्न बताता है कि धन-शोधन की योजना परीक्षा लीक के साथ ही बनाई गई थी, बाद में नहीं। असली परीक्षा यह है कि ईडी की जाँच केवल संपत्ति जब्ती तक सिमटेगी या भर्ती बोर्ड के भीतर की मिलीभगत तक भी पहुँचेगी।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार कांस्टेबल पेपर लीक मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की?
ईडी के पटना जोनल कार्यालय ने PMLA 2002 के तहत ₹2.01 करोड़ मूल्य की 5 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं। ये संपत्तियाँ एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं, जो आरोपी कौशिक कुमार कर के स्वामित्व में बताई जाती हैं।
कौशिक कुमार कर पर क्या आरोप हैं?
22 अगस्त 2024 को दाखिल आरोपप्रत्र के अनुसार, कौशिक कुमार कर ने ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की पहचान छिपाने के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स नाम की एक डमी कंपनी बनाई और उसमें फर्जी निदेशक रखे। इसी कंपनी के ज़रिए परीक्षा प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल किया गया और फिर प्रश्नपत्र लीक किए गए।
ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को पहले क्यों ब्लैकलिस्ट किया गया था?
ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को इससे पूर्व परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामलों में शामिल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसीलिए कौशिक कुमार कर ने एक नई कंपनी बनाकर इस प्रतिबंध को दरकिनार किया।
पेपर लीक से परीक्षार्थियों पर क्या असर पड़ा?
प्रश्नपत्र लीक होने के कारण बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 रद्द करनी पड़ी। इससे न केवल बिहार सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि परीक्षा में शामिल हज़ारों उम्मीदवारों के करियर पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इस मामले में ईडी की जाँच आगे किस दिशा में जाएगी?
ईडी की जाँच जारी है और इसमें अपराध से हासिल अन्य राशियों का पता लगाना तथा मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त अन्य आरोपियों या कंपनियों की भूमिका की पड़ताल शामिल है। भविष्य में और संपत्ति जब्ती या गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले