नालंदा में सुधा डेयरी को नई ताकत: ₹20 करोड़ का दही-लस्सी प्लांट, 300 रिटेलर्स को डीप फ्रीजर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के नालंदा में 27 जुलाई 2026 को डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में कॉम्फेड और सुधा से जुड़ी कई परियोजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास किया गया। इनमें ₹20 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले दही-लस्सी प्लांट, एचपीसीएल के साथ साझेदारी में पेट्रोल पंप व कैफेटेरिया, 300 सुधा रिटेलर्स को डीप फ्रीजर वितरण और आठ पशु सेवा वाहनों का लोकार्पण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
मुख्य परियोजनाएँ और उनका महत्व
डेयरी सचिव कपिल अशोक ने कार्यक्रम में बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 20 मीट्रिक टन क्षमता वाले दही-लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया गया। यह प्लांट राज्य में डेयरी उत्पादों की प्रोसेसिंग क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। इसके साथ ही एचपीसीएल के साथ हुए एमओयू के तहत सुधा के कैफेटेरिया और पेट्रोल पंप परियोजना की भी विधिवत शुरुआत की गई, जो सुधा ब्रांड के विस्तार की दृष्टि से एक नई रणनीतिक पहल है।
रिटेलर्स और पशुपालकों को सीधा लाभ
कार्यक्रम में 300 सुधा विक्रेताओं को डीप फ्रीजर वितरित किए गए, जिससे डेयरी उत्पादों के संरक्षण और बिक्री की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके अतिरिक्त आठ 'एनिमल लिफ्टिंग एंड कैरिंग व्हीकल' पशुपालकों की सुविधा के लिए समर्पित किए गए। डीप फ्रीजर प्राप्त करने वाले सुधा विक्रेता विपिन कुमार ने कहा कि इससे उनके कारोबार को और विस्तार मिलेगा तथा गरीब और छोटे दुकानदारों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। राजगीर से आए दुकानदार कुंदन कुमार ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब सुधा उत्पादों को अधिक दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलेगी।
दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
डेयरी सचिव कपिल अशोक ने बताया कि राज्य में 2,500 से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियाँ गठित की गई हैं, जिनके माध्यम से बड़ी संख्या में पशुपालक डेयरी गतिविधियों से जुड़े हैं। पिछले वर्ष की तुलना में प्रतिदिन लगभग 3 लाख लीटर अतिरिक्त दूध का उत्पादन हो रहा है। यह वृद्धि डेयरी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस अतिरिक्त दूध की बेहतर प्रोसेसिंग और उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
बकरी पालकों के लिए 'गोट फेडरेशन' की तैयारी
भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए डेयरी सचिव ने बताया कि राज्य में बकरी पालकों के लिए 'गोट फेडरेशन' के गठन की प्रक्रिया जारी है। फेडरेशन बनने के बाद बकरी के दूध का संग्रहण और प्रोसेसिंग भी सहकारी मॉडल के तहत सुधा के माध्यम से की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर बकरी सहकारी समितियाँ पहले ही गठित की जा चुकी हैं, और फेडरेशन के गठन के बाद इस क्षेत्र में संगठित दूध संकलन एवं प्रोसेसिंग शुरू होगी, जिससे बकरी पालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। गौरतलब है कि सुधा ब्रांड के माध्यम से सहकारी मॉडल को मजबूत करना और नए बाज़ार साझेदारियाँ स्थापित करना राज्य की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि छोटे व्यापारियों और रिटेलर्स को भी स्थायी आजीविका का आधार मिलेगा।