बिहार विधानसभा: सोलर लाइट विफलता पर एनडीए विधायकों ने ही पंचायती राज मंत्री को घेरा, 70% लाइटें बंद का दावा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में 22 जुलाई 2026 को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सोलर स्ट्रीट लाइटों की विफलता का मुद्दा तीखे विवाद का केंद्र बन गया। उल्लेखनीय यह रहा कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विधायकों ने ही अपनी सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के जवाब को सदन में खुलेआम चुनौती दे दी।
मुख्य घटनाक्रम
प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्याम रजक ने यह मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों में लगाई गई सोलर लाइटों में से करीब 70 प्रतिशत बंद पड़ी हैं, जिससे अनेक बस्तियाँ अंधेरे में डूबी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित संवेदक (ठेकेदार) भुगतान लेकर चला गया और रखरखाव की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने सदन को बताया कि जहाँ भी तकनीकी खराबी की शिकायत मिली है, वहाँ मरम्मत की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविदा की शर्तों के अनुसार एजेंसी की 30 प्रतिशत राशि पाँच वर्षों तक सुरक्षित रखी जाती है और रखरखाव में लापरवाही पर भुगतान रोकने तथा कार्रवाई का प्रावधान है।
एनडीए विधायकों की असहमति
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक जीवेश मिश्रा ने सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार के आँकड़े सही हैं, तो मंत्री उनके साथ क्षेत्र का दौरा करें। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र में करीब 50 प्रतिशत सोलर लाइटें बंद पड़ी हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि खराब लाइटों की निगरानी कौन कर रहा है और शिकायत करने पर भी संबंधित अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।
इसके बाद जनता दल (यूनाइटेड) विधायक अजीत कुमार ने भी मंत्री के जवाब पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों के साथ कांटी क्षेत्र की तीन पंचायतों का रात में निरीक्षण किया, जहाँ लगभग 70 प्रतिशत सोलर लाइटें बंद मिलीं। उन्होंने रेखांकित किया कि इस विफलता की सबसे अधिक मार गरीब बस्तियों के निवासियों पर पड़ रही है।
विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मंत्री दीपक प्रकाश को संबंधित क्षेत्रों की जाँच कराने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण विद्युतीकरण और सोलर ऊर्जा के विस्तार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता रहा है। गौरतलब है कि सोलर स्ट्रीट लाइटें अंधेरी बस्तियों में महिलाओं की सुरक्षा और रात्रिकालीन आवागमन के लिए अहम मानी जाती हैं। रखरखाव तंत्र की कथित विफलता न केवल सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाती है, बल्कि ठेका प्रबंधन की पारदर्शिता को भी कटघरे में खड़ा करती है।
क्या होगा आगे
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अब सरकार पर जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दबाव है। एनडीए के भीतर से उठी आवाज़ें संकेत देती हैं कि इस मुद्दे पर सत्तापक्ष में भी एकमत नहीं है, जो आगामी सत्र में और अधिक जवाबदेही की माँग को जन्म दे सकता है।