बीजापुर के जंगल में दफन हथियारों का जखीरा बरामद: AK-47 समेत 4 हथियार और 76 जिंदा कारतूस जब्त
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत 20 सितंबर 2026 को भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम उतला के जंगल में पुलिस ने जमीन के भीतर दबाकर छिपाया गया हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ में मिली सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में एके-47 राइफल समेत चार हथियार और 76 जिंदा कारतूस जब्त किए गए।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि और योजना
पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देश पर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल) अमन झा के नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया गया। थाना भैरमगढ़ से पुलिस बल को ग्राम उतला के जंगल की ओर रवाना करने से पहले अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) भैरमगढ़ नवीन एक्का ने जवानों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश और ब्रीफिंग दी। गौरतलब है कि यह ऑपरेशन उन्हीं आत्मसमर्पित नक्सलियों की गोपनीय सूचना पर आधारित था, जिन्हें पुलिस और प्रशासन लगातार मुख्यधारा में लाने के प्रयासों के तहत पुनर्वास कार्यक्रमों से जोड़ रहे हैं।
बरामद हथियार और कारतूस का ब्यौरा
पुलिस टीम ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उतला के जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया, जिसके दौरान जमीन के भीतर छिपाया गया एक 'डम्प' बरामद हुआ। जब्त सामग्री में निम्न शामिल हैं:
हथियार — एक एके-47 राइफल, एक 315 बोर राइफल, एक सिंगल शॉट राइफल और एक 9 एमएम पिस्टल।
कारतूस — एके-47 की दो मैगजीन, एके-47 के 45 जिंदा राउंड, 9 एमएम के 25 जिंदा राउंड और 315 बोर राइफल के 6 जिंदा राउंड — कुल मिलाकर 76 जिंदा कारतूस। यह सामग्री थाना भैरमगढ़ लाकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नक्सल विरोधी अभियान की व्यापक रणनीति
पुलिस के अनुसार बीजापुर जिले के संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार सर्चिंग और निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पण-पुनर्वास कार्यक्रमों को और तेज कर रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों से संगठन की गतिविधियों और पूर्व की घटनाओं के संबंध में लगातार खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है, जिसके आधार पर जंगलों में छिपाए गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की तलाश जारी है।
आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति
पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इन प्रयासों से आत्मसमर्पण करने वालों का पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है तथा उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल रही है।
पुलिस अधीक्षक की प्रतिक्रिया और आगे की दिशा
पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों को इस सफल कार्रवाई के लिए बधाई दी और भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। बीजापुर पुलिस के इस ऑपरेशन को नक्सल-मुक्त छत्तीसगढ़ के व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।