27 अक्टूबर 2026
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भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान, नितिन नवीन करेंगे दिल्ली में आगाज़

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भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान, नितिन नवीन करेंगे दिल्ली में आगाज़

सारांश

भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान की घोषणा करके विपक्ष के खिलाफ एक नया राजनीतिक मोर्चा खोला है। प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने संजय राउत पर न्यायपालिका को अस्थिर करने और राहुल गांधी पर व्यापारियों को दबाव में लेने का आरोप लगाया। बुधवार को दिल्ली में नितिन नवीन की अगुवाई में इस अभियान का आधिकारिक आगाज़ होगा।

मुख्य बातें

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान की घोषणा की।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को दिल्ली में एक बड़े कार्यक्रम के साथ अभियान की शुरुआत करेंगे।
सिन्हा ने संजय राउत पर आरोप लगाया कि उन्होंने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जलाए जाने का वीडियो साझा कर भारतीय न्यायपालिका को अस्थिर करने की कोशिश की।
राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने व्यापारियों के संगठन को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन करने के लिए पत्र लिखा और 30 सेकंड में प्रदर्शन वापसी का प्रस्ताव रखा।
भाजपा ने कांग्रेस को 1 नवंबर 1984 के सिख नरसंहार की याद दिलाते हुए प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने की अपील की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखे हमले बोले। उन्होंने घोषणा की कि भाजपा अब 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान को जन-जन तक पहुँचाएगी, जिसकी बुधवार को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एक बड़े कार्यक्रम के साथ विधिवत शुरुआत करेंगे।

संजय राउत पर न्यायपालिका विवाद

सिन्हा ने आरोप लगाया कि संजय राउत लगातार न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाते आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह राउत ने एक विवादित पोस्ट साझा की थी, जिसमें अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट की इमारत जलाए जाने का वीडियो था और उसके साथ भारतीय सुप्रीम कोर्ट को भी इससे 'सबक लेने' की बात कही गई थी।

सिन्हा ने कहा कि अब राउत यह भी पूछ रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों को साक्ष्य के रूप में क्यों स्वीकार नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखबारों का काम सूचना पहुँचाना है, न कि हर दावे की सत्यता को प्रमाणित करना, और ऐसे बयान देने से पहले कानूनी प्रक्रिया को समझा जाना चाहिए।

न्यायपालिका को दबाव में लाने की कोशिश — भाजपा का आरोप

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी के विरोध प्रदर्शन से न डरता है और न ही उसे इस तरह प्रभावित करने का प्रयास होना चाहिए। उनके अनुसार, विपक्षी दल न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठाकर अपने पक्ष में फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।

राहुल गांधी और व्यापारियों पर दबाव का आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सिन्हा ने कहा कि उनके बयानों में 'लगातार बेचैनी और हताशा' दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने व्यापारियों के संगठन को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन करने को कहा है और यह भी कहा कि यदि व्यापारी इस मांग का समर्थन करते हैं तो 30 सेकंड के भीतर विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया जाएगा।

सिन्हा ने इसे व्यापारी वर्ग पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दिया और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस व्यापारियों को अपने राजनीतिक एजेंडे का हथियार बनाना चाहती है।

1 नवंबर और 1984 के सिख नरसंहार का हवाला

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस को 1 नवंबर की तारीख याद रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि 1984 में इसी दिन दिल्ली में सिखों का नरसंहार हुआ था, जिसे सिख समुदाय और व्यापारी वर्ग आज भी भुला नहीं पाए हैं। सिन्हा ने कांग्रेस से अपील की कि वह लोगों की भावनाओं और कारोबारियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रस्तावित कार्यक्रम पर पुनर्विचार करे।

आगे क्या होगा

भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान की बुधवार को दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम से शुरुआत होगी, जिसका नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे। यह अभियान भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह विपक्ष को न्यायपालिका और संस्थाओं को कमज़ोर करने वाली ताकत के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भीड़तंत्र हटाओ' अभियान की टाइमिंग महत्वपूर्ण है — यह उस समय आया है जब कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन और ज्ञानेश कुमार प्रकरण सुर्खियों में हैं। भाजपा का यह कदम एक साथ तीन मोर्चे साधता है: न्यायपालिका के रक्षक की छवि, व्यापारी वर्ग को विपक्ष से दूर करने की कोशिश, और 1984 के नरसंहार के जरिए कांग्रेस की ऐतिहासिक कमज़ोरी को फिर उभारना। हालाँकि, विपक्ष का तर्क है कि न्यायिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है — इस बहस में कौन सा पक्ष जनता की सहानुभूति जीतता है, यह अभियान की वास्तविक परीक्षा होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान क्या है?
यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा शुरू किया जाने वाला एक राजनीतिक अभियान है, जिसका उद्देश्य विपक्ष पर भीड़ के ज़रिए संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश जन-जन तक पहुँचाना है। बुधवार को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इस अभियान की विधिवत शुरुआत करेंगे।
संजय राउत और सुप्रीम कोर्ट विवाद क्या है?
भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा के अनुसार, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने पिछले सप्ताह एक पोस्ट में अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जलाए जाने का वीडियो साझा करते हुए भारतीय सुप्रीम कोर्ट को इससे 'सबक लेने' की बात कही थी। इसके अलावा, राउत ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत समाचार पत्रों की रिपोर्टों को साक्ष्य क्यों नहीं मानती।
राहुल गांधी ने व्यापारियों को पत्र क्यों लिखा?
भाजपा के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यापारियों के संगठन को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन करने को कहा। भाजपा ने इसे व्यापारियों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है, जो उनके व्यावसायिक हितों और स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।
भाजपा ने 1 नवंबर का ज़िक्र क्यों किया?
1 नवंबर 1984 को दिल्ली में सिखों का नरसंहार हुआ था। भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कांग्रेस को इस तारीख की याद दिलाते हुए अपील की कि वह इस दिन के आसपास प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर पुनर्विचार करे, ताकि सिख समुदाय और व्यापारियों की भावनाओं को ठेस न पहुँचे।
नितिन नवीन कौन हैं और अभियान में उनकी क्या भूमिका है?
नितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 'लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ' अभियान के तहत वे बुधवार को दिल्ली में एक बड़े कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे, जो इस अभियान का आधिकारिक शुभारंभ होगा।
राष्ट्र प्रेस
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