7 अगस्त 2026
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टर मारपीट मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को दी जमानत, फास्ट-ट्रैक ट्रायल का आदेश

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टर मारपीट मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को दी जमानत, फास्ट-ट्रैक ट्रायल का आदेश

सारांश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डोंबिवली में डॉक्टरों पर कथित हमले के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को जमानत तो दी, लेकिन फास्ट-ट्रैक ट्रायल, 10 दिन में चार्जशीट और स्पेशल प्रॉसिक्यूटर के कड़े निर्देशों के साथ — अदालत ने साफ कहा, जनप्रतिनिधि का जनसेवकों पर हमला गंभीर मामला है।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 7 अगस्त को शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और सह-आरोपियों को कड़ी शर्तों पर जमानत दी।
मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट को सौंपा गया; 7 दिनों में न्यायाधीश नियुक्ति, 10 दिनों में चार्जशीट और 15 कामकाजी दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट का आदेश।
म्हात्रे को 6 जुलाई को KDMC के शास्त्री नगर अस्पताल, डोंबिवली में डॉक्टरों और स्टाफ के साथ कथित मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को स्वतः संज्ञान लेते हुए सेशंस कोर्ट की जमानत पर रोक लगाई थी; म्हात्रे ने बाद में सरेंडर किया।
अदालत ने राज्य को अनुभवी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया, जिसे कोर्ट की अनुमति बिना बदला नहीं जा सकेगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 7 अगस्त को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ कथित मारपीट के मामले में शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे और सभी सह-आरोपियों को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी। साथ ही, अदालत ने मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट भेजते हुए त्वरित सुनवाई के सख्त निर्देश जारी किए।

अदालत की टिप्पणी और चिंता

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान एक जनप्रतिनिधि पर लगे आरोपों की गंभीरता को रेखांकित किया। बेंच ने कहा, 'चुना हुआ प्रतिनिधि जनता का प्रतिनिधि होता है। यह एक गंभीर मामला है, जब कोई चुना हुआ प्रतिनिधि जनता की सेवा करने वाले कर्मचारियों पर हमला करता है।' यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि अदालत इस मामले को सामान्य आपराधिक घटना से कहीं अधिक गंभीरता से देख रही है।

मुख्य न्यायिक निर्देश

हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को सात दिनों के भीतर फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए एक न्यायाधीश नियुक्त करने का आदेश दिया। इसके अलावा, वॉयस सैंपल और राज्य की फोरेंसिक लैब को 15 कामकाजी दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया। चार्जशीट 10 दिनों के भीतर दाखिल करना अनिवार्य किया गया और उसके पाँच कामकाजी दिनों के भीतर आरोप तय करने का आदेश दिया गया।

बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकार को एक अनुभवी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करना होगा, जिसे अदालत की अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकेगा। आगे की सुनवाई कल्याण कोर्ट में होगी।

जमानत की शर्तें

म्हात्रे और सह-आरोपियों को निर्देश दिया गया कि वे पीड़ित, गवाहों, उनके परिजनों, मित्रों या मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति से किसी भी रूप में संपर्क न करें। हाईकोर्ट ने म्हात्रे को मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद महाराष्ट्र लौटने की अनुमति भी दी।

मामले की पृष्ठभूमि

रमेश म्हात्रे को 6 जुलाई को कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) के शास्त्री नगर अस्पताल, डोंबिवली में डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ कथित मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 14 जुलाई को सेशंस कोर्ट ने उन्हें जमानत दी, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को एक विशेष सुनवाई के बाद उस जमानत आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हाईकोर्ट ने जाँच की जिम्मेदारी भी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपी थी।

आगे क्या होगा

फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला तेज़ी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। अदालत के कड़े समय-सीमा निर्देशों को देखते हुए यह मामला चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के व्यापक सवाल को भी सामने लाता है, जो देशभर में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की कसौटी के रूप में देख रही है। गौरतलब है कि देशभर में चिकित्साकर्मियों पर हमलों की घटनाएँ बढ़ी हैं और कई राज्यों में सुरक्षा कानून कागज़ पर ही सिमटे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या फास्ट-ट्रैक निर्देशों की कड़ी समय-सीमाएँ ज़मीन पर लागू होती हैं, या प्रशासनिक देरी एक बार फिर न्यायिक मंशा को कमज़ोर कर देती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमेश म्हात्रे पर क्या आरोप हैं और उन्हें कब गिरफ्तार किया गया था?
शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को 6 जुलाई को डोंबिवली के KDMC शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ कथित मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 18 जुलाई को सेशंस कोर्ट की जमानत पर रोक लगाई, जिसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए क्या शर्तें लगाईं?
अदालत ने म्हात्रे और सह-आरोपियों को पीड़ित, गवाहों और उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, चार्जशीट दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने की शर्त भी लगाई गई।
फास्ट-ट्रैक ट्रायल के लिए अदालत ने क्या समय-सीमा तय की है?
हाईकोर्ट ने 7 दिनों में फास्ट-ट्रैक जज की नियुक्ति, 10 दिनों में चार्जशीट दाखिल करने और उसके 5 कामकाजी दिनों में आरोप तय करने का आदेश दिया है। फोरेंसिक लैब को वॉयस सैंपल रिपोर्ट 15 कामकाजी दिनों में देनी होगी।
इस मामले में अदालत ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को लेकर क्या कहा?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि एक अनुभवी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जाए, जिसे अदालत की अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकेगा। यह कदम मुकदमे की निष्पक्षता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अब इस मामले की सुनवाई कहाँ होगी?
हाईकोर्ट ने मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट को सौंपा है और आगे की सुनवाई कल्याण कोर्ट में होगी। अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को सात दिनों के भीतर इस उद्देश्य के लिए न्यायाधीश नियुक्त करने का आदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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