18 अगस्त 2026
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए को लगाई फटकार: पुणे डेयरी मालिक को ₹5 लाख मुआवजे का आदेश

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए को लगाई फटकार: पुणे डेयरी मालिक को ₹5 लाख मुआवजे का आदेश

सारांश

98 प्रतिशत अनुपालन के बावजूद लाइसेंस निलंबित रखना बॉम्बे हाईकोर्ट को 'सरासर मनमाना' लगा। पुणे की एक छोटी मिठाई दुकान की लड़ाई ने एफडीए की दोषपूर्ण नीति को कटघरे में खड़ा किया और ₹5 लाख मुआवजे के रूप में जवाबदेही तय की।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र एफडीए को 30 दिनों के भीतर पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।
दुकान ने 13 जुलाई के पुनः निरीक्षण में 98 प्रतिशत अनुपालन हासिल किया, फिर भी निलंबन जारी रहा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखंड ने एफडीए की नीति को 'अजीब और दोषपूर्ण' करार दिया।
दुकानदार को अनुपालन के बाद 34 दिनों में लगभग ₹8.74 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ।
12 जून का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द; दुकान को व्यवसाय पुनः शुरू करने की अनुमति मिली।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्यशैली को 'साफ और सरासर मनमाना' करार देते हुए पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स के मालिक को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने पाया कि दुकान के 98 प्रतिशत अनुपालन की पुष्टि हो जाने के बावजूद एफडीए ने लाइसेंस निलंबन जारी रखा, जिससे दुकानदार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

मामले की पृष्ठभूमि

11 जून 2026 को वडगांव शेरी क्षेत्र में खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) की एक घटना के बाद एफडीए ने 12 जून को गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। दुकान मालिक के अनुसार, न तो सुधार का नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का कोई अवसर। इसके बाद 13 जुलाई को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पुनः निरीक्षण में दुकान ने 98 प्रतिशत अनुपालन हासिल कर लिया, फिर भी निलंबन आदेश नहीं हटाया गया।

अदालत तक का सफर

15 जुलाई को दुकान मालिक ने एफडीए आयुक्त के समक्ष अपील दायर की, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। इसके बाद दुकानदार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। दुकान के अधिवक्ता अभिजीत देसाई ने पुणे के पिंड पंजाब मामले का हवाला दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को स्पष्ट किया था कि नए निरीक्षण में 100 प्रतिशत अनुपालन की पुष्टि होने पर निलंबन आदेश स्वतः अमान्य हो जाता है।

अदालत की तीखी टिप्पणी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखंड की पीठ ने एफडीए की नीति को 'अजीब और दोषपूर्ण' बताया। न्यायाधीशों ने कहा, 'आपकी मंशा सराहनीय है, लेकिन जब आपको 98 प्रतिशत अनुपालन का पता चला तो लाइसेंस का निलंबन तत्काल रद्द कर देना चाहिए था।' पीठ ने यह भी कहा कि अनुपालन के बाद भी नागरिक को अपील के लिए भटकाना उसे परेशान करना है।

आम दुकानदार पर असर

दुकान की औसत दैनिक कमाई लगभग ₹25,000 बताई गई। अधिवक्ता देसाई ने अदालत को बताया कि अनुपालन की तारीख से 34 दिन बीत चुके थे और दुकानदार को लगभग ₹8.74 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ। यह मामला उन छोटे व्यापारियों की स्थिति को उजागर करता है, जो सरकारी प्रक्रियाओं की देरी की कीमत अपनी जेब से चुकाते हैं।

अदालत का फैसला और आगे की राह

पीठ ने 12 जून के निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स को अपना खुदरा व्यवसाय फिर से शुरू करने की अनुमति दी। एफडीए को निर्देश दिया गया कि वह 30 दिनों के भीतर ₹5 लाख की राशि हाईकोर्ट में जमा करे, जिसे याचिकाकर्ता निकालने के लिए स्वतंत्र होगा। यह फैसला खाद्य नियामक संस्थाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद दंडात्मक कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि खाद्य सुरक्षा। हाईकोर्ट का ₹5 लाख मुआवजे का आदेश एक मिसाल है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एफडीए अपनी आंतरिक नीति में सुधार करेगा या यह जवाबदेही सिर्फ अदालत तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए को क्यों फटकार लगाई?
अदालत ने पाया कि पुणे की गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स ने 13 जुलाई को पुनः निरीक्षण में 98 प्रतिशत अनुपालन हासिल किया, लेकिन एफडीए ने लाइसेंस निलंबन नहीं हटाया। हाईकोर्ट ने इसे 'साफ और सरासर मनमानी' नीति करार दिया और कहा कि 98 प्रतिशत अनुपालन देखते ही निलंबन तुरंत रद्द होना चाहिए था।
गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स का लाइसेंस क्यों निलंबित किया गया था?
11 जून 2026 को वडगांव शेरी क्षेत्र में खाद्य विषाक्तता की एक घटना के बाद एफडीए ने 12 जून को दुकान का खाद्य लाइसेंस निलंबित किया था। दुकान मालिक के अनुसार, न तो सुधार का नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर।
दुकानदार को कितना मुआवजा मिलेगा और कब तक?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एफडीए को 30 दिनों के भीतर ₹5 लाख की राशि हाईकोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया है, जिसे याचिकाकर्ता निकालने के लिए स्वतंत्र है। दुकानदार का कुल नुकसान लगभग ₹8.74 लाख बताया गया है।
इस मामले का अन्य दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल है — अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद नियामक संस्था दंडात्मक आदेश जारी नहीं रख सकती। पिंड पंजाब मामले के साथ मिलकर यह निर्णय महाराष्ट्र में खाद्य लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया पर पुनर्विचार के लिए एफडीए को बाध्य कर सकता है।
क्या एफडीए इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है?
स्रोत में इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालाँकि, अदालत ने एफडीए की नीति को स्पष्ट रूप से 'दोषपूर्ण' करार देते हुए तत्काल राहत और मुआवजे का आदेश दिया है, जो किसी भी संभावित अपील को कठिन बना सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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