मोतिहारी में BPSSC भर्ती परीक्षा: चप्पल में छिपा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पकड़ा, अविनाश कुमार गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मोतिहारी (पूर्वी चंपारण), 29 जुलाई: बिहार पुलिस सबऑर्डिनेट सर्विसेज कमीशन (BPSSC) द्वारा बुधवार को मोतिहारी में आयोजित 'अधिनायक अनुदेशक' (कमांडेंट इंस्ट्रक्टर) भर्ती परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी को अपनी चप्पल के अंदर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट छिपाकर नकल करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। पश्चिम चंपारण के बेतिया निवासी अविनाश कुमार को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दो अन्य संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
कैसे हुआ खुलासा
परीक्षा के दौरान सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अरुण कुमार और सदर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) दिलीप कुमार विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर रहे थे। एलएनडी कॉलेज के परीक्षा कक्ष में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को एक परीक्षार्थी का आचरण संदिग्ध लगा और उन्होंने गहन तलाशी का आदेश दिया।
तलाशी में अभ्यर्थी की चप्पल के अंदर छिपा एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुआ, जिसे परीक्षा के दौरान बाहरी स्रोतों से उत्तर प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया था।
आरोपी की चालाक योजना
जांचकर्ताओं के अनुसार, अविनाश कुमार ने सुरक्षा जांच को चकमा देने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई। परीक्षा परिसर में प्रवेश करने से पहले उसने कथित तौर पर छिपे हुए उपकरण वाली चप्पल को चारदीवारी के ऊपर से फेंक दिया और स्वयं नंगे पैर केंद्र में प्रवेश किया, ताकि तलाशी के दौरान गैजेट का पता न चल सके।
सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद उसने परिसर के अंदर से चप्पल उठाई और पहनकर परीक्षा हॉल में प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने परीक्षा केंद्र पर लगे इलेक्ट्रॉनिक जैमर से बचने का भी तरीका तैयार कर रखा था।
यूट्यूब से सीखी धोखाधड़ी की तकनीक
पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के अनुसार, पूछताछ में अविनाश कुमार ने स्वीकार किया कि उसने यूट्यूब पर वीडियो देखकर यह धोखाधड़ी की तकनीक सीखी थी। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उसने ऑनलाइन खरीदा था और इसे भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल करने की पूर्व योजना बनाई थी।
जांच का दायरा और परीक्षा व्यवस्था
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी की जानकारी के आधार पर दो अन्य व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। जांचकर्ता अब इस कथित धोखाधड़ी रैकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने, उपकरण की खरीद की कड़ी जोड़ने और यह पता लगाने में जुटे हैं कि परीक्षा केंद्र के बाहर से उत्तर भेजने के लिए कौन जिम्मेदार था।
गौरतलब है कि यह भर्ती परीक्षा कदाचार रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत पूर्वी चंपारण जिले के 12 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। पुलिस की ओर से मामले में आगे की जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या अन्य अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह के तरीके अपनाए थे।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में हाई-टेक नकल के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो परीक्षा प्रणाली की निगरानी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।