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ओडिशा चिट फंड घोटाला: सीबीआई ने ₹17 करोड़ की ठगी के फरार आरोपी देबब्रत दत्ता को सिलीगुड़ी से दबोचा

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ओडिशा चिट फंड घोटाला: सीबीआई ने ₹17 करोड़ की ठगी के फरार आरोपी देबब्रत दत्ता को सिलीगुड़ी से दबोचा

सारांश

सीबीआई ने ओडिशा के ₹17 करोड़ से अधिक के चिट फंड घोटाले में वर्षों से फरार आरोपी देबब्रत दत्ता को सिलीगुड़ी से दबोच लिया। 2022 के आरोपपत्र और 2024 के गैर-जमानती वारंट के बाद यह गिरफ्तारी बड़े आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसी की जारी मुहिम का हिस्सा है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने डीएनबी फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व मालिक देबब्रत दत्ता को सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया।
दत्ता पर ओडिशा के जमाकर्ताओं की ₹17 करोड़ से अधिक की राशि हड़पने का आरोप है।
26 दिसंबर, 2022 के आरोपपत्र में फरार घोषित; 5 अगस्त, 2024 को गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था।
आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर भुवनेश्वर की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा।
अलग मामले में सीबीआई ने ₹9 लाख के माल गबन के मामले में 23 वर्षों से फरार रूप सिंह को भी 21 अगस्त को गिरफ्तार किया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ओडिशा के चर्चित चिट फंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएनबी फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व मालिक देबब्रत दत्ता को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया है। दत्ता पर जमाकर्ताओं की ₹17 करोड़ से अधिक की राशि हड़पने का आरोप है और वह लंबे समय से फरार चल रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

26 दिसंबर, 2022 को दायर आरोपपत्र में देबब्रत दत्ता को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं तथा पुरस्कार चिट एवं धन प्रचलन योजना निषेध अधिनियम, 1978 के तहत अपराधों के लिए फरार घोषित किया गया था। इसके बाद 5 अगस्त, 2024 को उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया। सीबीआई ने पहले भी स्पष्ट किया था कि दत्ता ने जांच में सहयोग करने से इनकार किया था।

सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर एजेंसी ने आरोपी का ठिकाना तलाशा और अंततः उन्हें सिलीगुड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के अनुसार, दत्ता को ट्रांजिट रिमांड पर भुवनेश्वर लाया जा रहा है, जहाँ उन्हें सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा।

घोटाले की पृष्ठभूमि

ओडिशा में चिट फंड घोटालों की एक लंबी श्रृंखला रही है, जिनमें आम जनता और छोटे जमाकर्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। डीएनबी फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मामले में आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों को लुभाने वाली योजनाओं के ज़रिए करोड़ों रुपए जुटाए और फिर उनकी रकम हड़प ली। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ देशभर में फरार आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध अभियान तेज़ कर रही हैं।

दूसरे मामले में भी बड़ी कार्रवाई

एक अलग मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को एक अन्य घोषित अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया, जो ₹9 लाख के माल की आपराधिक हेराफेरी के मामले में लगभग 23 वर्षों से फरार था। यह मामला महाराष्ट्र के अमलनेर पुलिस स्टेशन में 4 अक्टूबर, 1998 को दर्ज हुआ था, जिसमें दो ट्रकों में लदे घी और मूंग की कथित चोरी और हेराफेरी का आरोप था।

आरोप के अनुसार, 27 सितंबर, 1998 को ट्रक चालकों बाबू खान और असलम खान ने माल का गबन किया था। औरंगाबाद स्थित बॉम्बे उच्च न्यायालय के 25 फरवरी, 2002 के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया और 5 अप्रैल, 2002 को इसे पुनः पंजीकृत किया गया। 19 दिसंबर, 2003 को अमलनेर की जेएमएफसी अदालत में रूप सिंह, अर्जुन सिंह, बाबू खान और असलम खान के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

गौरतलब है कि इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को लगभग 22 वर्षों तक फरार रहने के बाद 7 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि रूप सिंह और अर्जुन सिंह ने ट्रक चालकों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश के तहत माल का गबन किया।

आगे की कार्यवाही

ओडिशा चिट फंड मामले में देबब्रत दत्ता को भुवनेश्वर की सक्षम अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत या रिमांड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सीबीआई के इन ताज़ा कदमों से संकेत मिलता है कि एजेंसी लंबे समय से लंबित मामलों में भी सक्रिय रूप से कार्रवाई जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आरोप पत्र दाखिल होने के लगभग चार वर्ष बाद यह गिरफ्तारी क्यों हुई। ओडिशा में चिट फंड घोटालों की जड़ें गहरी हैं और पीड़ित जमाकर्ताओं को अब तक मुआवज़े का कोई ठोस रोडमैप नहीं मिला है। महज़ गिरफ्तारी न्याय का अंत नहीं है — त्वरित सुनवाई और वसूली तंत्र के बिना यह प्रक्रिया एक और लंबे कानूनी चक्र में बदल सकती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा चिट फंड घोटाले में सीबीआई ने किसे गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने डीएनबी फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व मालिक देबब्रत दत्ता को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया। दत्ता पर ओडिशा के जमाकर्ताओं की ₹17 करोड़ से अधिक की राशि हड़पने का आरोप है।
देबब्रत दत्ता के विरुद्ध कब और क्यों वारंट जारी हुआ था?
26 दिसंबर, 2022 को दायर आरोपपत्र में दत्ता को फरार घोषित किया गया था और 5 अगस्त, 2024 को उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। उन पर आईपीसी की धाराओं और पुरस्कार चिट एवं धन प्रचलन योजना निषेध अधिनियम, 1978 के तहत अपराध के आरोप हैं।
गिरफ्तारी के बाद देबब्रत दत्ता को कहाँ पेश किया जाएगा?
सीबीआई के अनुसार, दत्ता को सिलीगुड़ी से ट्रांजिट रिमांड पर भुवनेश्वर लाया जा रहा है और वहाँ की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा।
रूप सिंह की गिरफ्तारी किस मामले से जुड़ी है?
रूप सिंह महाराष्ट्र के अमलनेर में 1998 में दर्ज ₹9 लाख के माल गबन के मामले में लगभग 23 वर्षों से फरार था। सीबीआई ने 21 अगस्त को उसे गिरफ्तार किया; इसी मामले में सह-आरोपी अर्जुन सिंह को 7 नवंबर, 2025 को पकड़ा गया था।
ओडिशा में चिट फंड घोटालों की जांच में सीबीआई की क्या भूमिका है?
सीबीआई ओडिशा के चिट फंड घोटालों में फरार आरोपियों का पता लगाने और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष लाने के लिए सक्रिय है। देबब्रत दत्ता की गिरफ्तारी इसी अभियान की कड़ी है, जिसमें एजेंसी वर्षों पुराने मामलों में भी कार्रवाई जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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