क्या सीडीएस ने मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया?
सारांश
Key Takeaways
- मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क का अनावरण किया गया है।
- यह दस्तावेज तीनों सेनाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
- क्वांटम प्रौद्योगिकियों के चार प्रमुख स्तंभों को एकीकृत किया गया है।
- इसमें राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के साथ सामंजस्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
- संयुक्तता और एकीकरण तकनीकी सर्वोच्चता के लिए आवश्यक हैं।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार को मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क का अनावरण किया। इस पॉलिसी फ्रेमवर्क का उद्देश्य भविष्य के युद्धक्षेत्र में तीनों सेनाओं को और अधिक सशक्त बनाना और तेजी से बदलती वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में तकनीकी बढ़त हासिल करना है।
यह व्यापक नीति दस्तावेज सशस्त्र बलों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट नीति और रोडमैप प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी उपस्थित थे।
यह पॉलिसी फ्रेमवर्क क्वांटम प्रौद्योगिकी के चार महत्वपूर्ण स्तंभों को एकीकृत करता है। इसमें क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरणों को भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना में समाहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। विजन दस्तावेज में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के समन्वित एकीकरण हेतु आगे की दिशा को भी परिभाषित किया गया है।
इसमें राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के साथ पूर्ण सामंजस्य सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस मिशन में रक्षा बल एक महत्वपूर्ण घटक हैं। यह दस्तावेज रक्षा बलों में इस अत्याधुनिक और विशिष्ट क्षेत्र के चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है। यह भविष्य में सशस्त्र बलों में क्वांटम तकनीक के समावेशन का आधार भी बनेगा। यह दस्तावेज रक्षा के दृष्टिकोण से इन विशेष तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देता है।
इसमें नागरिक-सैन्य समन्वय के माध्यम से लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की प्राप्ति पर बल दिया गया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी क्षेत्रों के सदस्यों से युक्त समर्पित शासकीय निकायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ द्वारा जारी यह दस्तावेज स्पष्ट करता है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी सर्वोच्चता प्राप्त करने के लिए संयुक्तता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक हैं।
दस्तावेज के अनुसार, तीनों सेनाओं के समन्वित प्रयासों से ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का प्रभावी और समयबद्ध समावेशन संभव होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मिलिट्री क्वांटम मिशन पॉलिसी फ्रेमवर्क भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार, तकनीकी रूप से सक्षम और रणनीतिक रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
-राष्ट्र प्रेस
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