जम्मू में जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति का तीन दिवसीय दौरा समाप्त, पनून कश्मीर ने सौंपी 500 पृष्ठों की रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा गठित जनसांख्यिकीय परिवर्तन संसदीय समिति ने 13 अगस्त 2026 को जम्मू में अपना तीन दिवसीय दौरा समाप्त किया। इस दौरे में समिति ने सरकारी और पुलिस अधिकारियों सहित दर्जनों सामुदायिक संगठनों, प्रतिनिधिमंडलों और समूहों से जनसांख्यिकीय बदलावों पर विस्तृत परामर्श किया। समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर ने रियासी जिले स्थित माता वैष्णो देवी में दर्शन के बाद अपना जम्मू-कश्मीर कार्यक्रम संपन्न किया, जबकि समिति के शेष सदस्य नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
मुख्य घटनाक्रम
दौरे के अंतिम चरण में पनून कश्मीर संगठन ने समिति के समक्ष 500 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस प्रतिनिधिमंडल में 'पनून कश्मीर' के संयोजक अग्निशेखर, चेयरमैन टीटो गंजू और जोनाराजा इंस्टीट्यूट ऑफ जेनोसाइड एंड एट्रोसिटीज स्टडीज के प्रतिनिधि शामिल थे। रिपोर्ट में ऐतिहासिक कालखंड में जनसांख्यिकीय विकास, जनसंख्या परिवर्तन, पलायन, विस्थापन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संपत्ति जैसे विषयों को विस्तार से शामिल किया गया है। विशेष रूप से कश्मीर घाटी में हुए विस्थापन के परिणामों का भी इसमें विस्तृत उल्लेख किया गया है।
संगठनों और समूहों से परामर्श
समिति ने पब्लिक ओपिनियन फोरम के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया, जिसमें अध्यक्ष परवीन कुमार शर्मा और महासचिव डॉ. गोपाल पार्थसारथी शर्मा ने एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में जनसांख्यिकीय पैटर्न में हुए बदलावों का विवरण दिया गया और म्यांमार तथा बांग्लादेश से आने वाले कथित अवैध प्रवासियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की गई।
गौरतलब है कि समिति ने तीन दिवसीय दौरे के अंतर्गत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आए शरणार्थियों, वेस्ट पाकिस्तानी रेफ्यूजी, टीम जम्मू, गोरखा समाज और वाल्मिकी समाज के प्रतिनिधियों से भी विचार-विमर्श किया।
फील्ड विज़िट: जागती टाउनशिप और नाउल स्लम एरिया
समिति ने जागती टाउनशिप का दौरा किया, जहाँ विस्थापन के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित आकर बसे हैं। इसके अलावा, समिति नाउल जैसे स्लम क्षेत्र भी पहुँची, जहाँ कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम निवास करते हैं। ये फील्ड विज़िट समिति के व्यापक अध्ययन का हिस्सा बताई जा रही हैं।
समिति का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने मई 2026 में इस समिति का गठन किया था। आधिकारिक बयान के अनुसार, समिति का मुख्य कार्य देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करना है, जो कथित तौर पर अवैध अप्रवासन और अन्य कारणों से हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय संरचना को लेकर विभिन्न समुदायों में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
आगे क्या होगा
दौरे में जुटाई गई जानकारी और विभिन्न संगठनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों को समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी। समिति की सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी जाएँगी, जिनके आधार पर नीतिगत कदम उठाए जाने की संभावना है।