15 जुलाई 2026
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चिन्नास्वामी भगदड़: 3 IPS अधिकारियों को क्लीनचिट पर आर. अशोक का सवाल — 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?

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चिन्नास्वामी भगदड़: 3 IPS अधिकारियों को क्लीनचिट पर आर. अशोक का सवाल — 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?

सारांश

चिन्नास्वामी भगदड़ में 11 मौतों के बाद अब तीन IPS अधिकारियों को भी क्लीनचिट — BJP नेता आर. अशोक का तीखा सवाल: जब मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, नौकरशाह और पुलिस सभी निर्दोष हैं, तो उन 11 बेगुनाहों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है?

मुख्य बातें

4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर RCB जश्न के दौरान हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत और 56 घायल हुए थे।
कर्नाटक सरकार ने IPS अधिकारियों बी.
दयानंद , विकास कुमार विकास और शेखर एच.
टेक्कन्नावर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई AIS नियम 8(4) के तहत बंद की।
अशोक ने इसे 'सरकार प्रायोजित त्रासदी' करार देते हुए पूछा — मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस सभी निर्दोष तो 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?
अशोक के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक दिन में दो स्थानों पर जश्न की अनुमति दी और DPAR सचिव सत्यवती ने पुलिस चेतावनी के बावजूद विधान सौधा के सामने कार्यक्रम कराया।
भगदड़ स्थल पर करीब 2.5 लाख लोग जमा हुए थे, जिससे भीड़ प्रबंधन पूरी तरह विफल हो गया।

कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने बुधवार, 15 जुलाई को कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला, जब चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी गई। उन्होंने सीधा सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह और अब पुलिस अधिकारी — सभी निर्दोष हैं — तो 4 जून 2025 को हुई उस भगदड़ में 11 निर्दोष लोगों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है।

क्लीनचिट का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि

कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को वरिष्ठ IPS अधिकारियों बी. दयानंद, विकास कुमार विकास और शेखर एच. टेक्कन्नावर के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई समाप्त कर दी। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR) द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी ने अधिकारियों के जवाब और प्रशासनिक विभाग की राय पर विचार करने के बाद ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के नियम 8(4) के तहत शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई बंद करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि 4 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की पहली IPL खिताबी जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ उमड़ी थी। जांच में सामने आया था कि स्टेडियम और उसके आसपास करीब 2.5 लाख लोग जमा हो गए थे, जिससे भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई — जिनमें 6 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल थीं — और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 56 लोग घायल हुए।

आर. अशोक के आरोप और सवाल

आर. अशोक ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर RCB की जीत का जश्न मनाने की अनुमति दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार हादसे के बीच भी RCB का झंडा लेकर फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की चेतावनी के बावजूद तत्कालीन DPAR सचिव सत्यवती ने कार्यक्रम को विधान सौधा के सामने आयोजित कराने पर जोर दिया। उस समय की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश पूरे प्रशासनिक तंत्र की निगरानी कर रही थीं। आर. अशोक ने कहा, 'शोक में डूबे माता-पिता के आंसू और उनकी बद्दुआ इस कांग्रेस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी।'

जवाबदेही का सवाल

आर. अशोक ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'आज सिद्दारमैया की कोई गलती नहीं, डीके शिवकुमार निर्दोष हैं, मुख्य सचिव निर्दोष हैं, DPAR सचिव निर्दोष हैं और अब पुलिस अधिकारियों को भी क्लीनचिट मिल गई — तो फिर उन 11 मासूम लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या उनकी मौत अपने आप हो गई?' उन्होंने इसे 'सरकार प्रायोजित त्रासदी' करार देते हुए पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने विधानसभा में पहले ही आगाह किया था कि सरकार द्वारा गठित हर जांच समिति का मकसद मामले को दबाना है, न कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना।

राजनीतिक चेतावनी और आगे की राह

आर. अशोक ने चेतावनी दी कि सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती और जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा कि लोग इस घटना को नहीं भूले हैं और समय आने पर उचित जवाब देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब हादसे को एक वर्ष से अधिक बीत चुके हैं और पीड़ित परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। हादसे के बाद शुरू हुई कई जांचें, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का निलंबन और कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बावजूद किसी को भी अंतिम रूप से दोषी नहीं ठहराया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोषी नहीं मिलता। 11 मौतें, 2.5 लाख की भीड़, दो स्थानों पर एक साथ जश्न की अनुमति — ये तथ्य किसी एक अधिकारी की चूक नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करते हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक जांच का दायरा राजनीतिक स्तर तक नहीं पहुँचता, पीड़ित परिवारों को वास्तविक न्याय मिलना संदिग्ध है। यह मामला केवल कर्नाटक की राजनीति नहीं, बल्कि भारत में बड़े सार्वजनिक आयोजनों की भीड़ सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ में क्या हुआ था?
4 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की पहली IPL खिताबी जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर करीब 2.5 लाख लोग जमा हो गए, जिससे भगदड़ मच गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई — 6 पुरुष और 5 महिलाएं — और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 56 लोग घायल हुए।
किन IPS अधिकारियों को क्लीनचिट दी गई और क्यों?
कर्नाटक सरकार ने IPS अधिकारियों बी. दयानंद, विकास कुमार विकास और शेखर एच. टेक्कन्नावर के खिलाफ AIS (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के नियम 8(4) के तहत शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई बंद कर दी। DPAR के आदेशों में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी ने अधिकारियों के जवाब और प्रशासनिक विभाग की राय पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया।
आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार असली जिम्मेदारों को बचा रही है। उनका कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक दिन में दो स्थानों पर जश्न की अनुमति दी, DPAR सचिव ने पुलिस चेतावनी को नजरअंदाज किया और मौजूदा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार हादसे के बीच फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे।
पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय क्यों नहीं मिला?
हादसे के बाद कई जांचें शुरू हुईं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया और कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई। हालांकि, अब तक किसी को भी अंतिम रूप से दोषी नहीं ठहराया गया है और तीन IPS अधिकारियों को क्लीनचिट मिलने के बाद जवाबदेही का सवाल और गहरा हो गया है।
विधान सौधा का इस मामले में क्या संबंध है?
विधान सौधा बेंगलुरु में स्थित कर्नाटक की द्विसदनीय विधायिका (विधान सभा और विधान परिषद) का मुख्यालय है। आर. अशोक के अनुसार, तत्कालीन DPAR सचिव सत्यवती ने पुलिस की चेतावनी के बावजूद RCB जीत का जश्न विधान सौधा के सामने आयोजित कराने पर जोर दिया, जिससे भीड़ प्रबंधन और कठिन हो गया।
राष्ट्र प्रेस
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