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एसटी हसन का तीखा प्रहार: वंदे मातरम बिल 'ध्यान भटकाने की कोशिश', जौहर यूनिवर्सिटी पर बोले — बुलडोजर न चले

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एसटी हसन का तीखा प्रहार: वंदे मातरम बिल 'ध्यान भटकाने की कोशिश', जौहर यूनिवर्सिटी पर बोले — बुलडोजर न चले

सारांश

सपा के वरिष्ठ नेता एसटी हसन ने एक साथ कई मोर्चे खोले — वंदे मातरम बिल को चुनावी ध्रुवीकरण की चाल बताया, जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर रोकने की अपील दोहराई और सीजेपी के युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

मुख्य बातें

एसटी हसन ने 20 जुलाई को मुरादाबाद में वंदे मातरम बिल, जौहर यूनिवर्सिटी और सीजेपी प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें गिराए जाने पर हसन ने कहा — उन्होंने केवल गवर्नर और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की थी।
वंदे मातरम बिल को हसन ने यूपी चुनाव से पहले 'सांप्रदायिक ध्यान भटकाने की कोशिश' बताया।
जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को 'दुर्भाग्यपूर्ण' कहा; BJP के 'हाईजैक' आरोप को खारिज किया।
श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी पर निष्पक्ष जाँच और दोषियों को सजा देने की माँग की।
कांवड़ यात्रा कभी न रोके जाने का दावा किया; ओवैसी की मुरादाबाद रैली को हर पार्टी का अधिकार बताया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने 20 जुलाई को मुरादाबाद में एक साथ कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरा — जिनमें मौलाना अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की कार्रवाई, प्रस्तावित वंदे मातरम बिल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी युवाओं पर लाठीचार्ज और श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला शामिल हैं। हसन ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम विवाद को उठाना उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश है।

जौहर यूनिवर्सिटी: 'बुलडोजर न चले, यही माँगा था'

सपा नेता आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें गिराए जाने के बाद हसन पर उनके अपने बयान को लेकर आरोप लगे थे। हसन ने सफाई दी, 'मैंने बस इतना कहा था कि गवर्नर और मुख्यमंत्री को दखल देना चाहिए और कोई समाधान निकालना चाहिए ताकि शिक्षा का मंदिर न तोड़ा जाए और कोई बुलडोजर न चलाया जाए।'

उन्होंने कहा कि वे यूनिवर्सिटी की नींव रखने से लेकर उद्घाटन तक आजम खान के साथ रहे हैं और उनका इस संस्था से भावनात्मक जुड़ाव है। आरोप लगाने वालों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोग 'अपनी प्रोफाइल बढ़ाने और निजी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए' बयान देते हैं।

वंदे मातरम बिल: 'चुनाव से पहले सांप्रदायिक मुद्दा'

प्रस्तावित वंदे मातरम बिल पर हसन ने कहा कि यह विवाद ब्रिटिश काल से चला आ रहा है और इसे अभी उठाने के पीछे राजनीतिक मंशा है। उन्होंने कहा, 'उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा है और सीजेपी विरोध प्रदर्शन कर रही है — इन सभी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक मुद्दा उठाने की कोशिश हो रही है।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुसलमान देश के लिए जान तक कुर्बान करने को तैयार हैं, लेकिन इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत की अनुमति नहीं है — इसलिए 'जमीन की पूजा' का आदेश धार्मिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं।

सीजेपी प्रदर्शन और लाठीचार्ज: 'युवा देश का भविष्य हैं'

जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज को हसन ने 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, 'वे बस निष्पक्ष परीक्षा और भ्रष्टाचार का अंत चाहते हैं। आज देश में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा हो जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस आरोप पर कि सपा ने प्रदर्शन को 'हाईजैक' किया, हसन ने पलटवार किया — 'अगर कोई सही मुद्दा उठा रहा है, तो उसका समर्थन करना हाईजैकिंग कैसे है? अगर सरकार ने पहले ही मंत्री का इस्तीफा सुनिश्चित किया होता, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।'

कांवड़ यात्रा और ओवैसी की रैली पर रुख

पिछली सरकारों पर कांवड़ यात्रा रोकने के आरोपों को हसन ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'कांवड़ यात्रा कभी नहीं रोकी गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया।' उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान भी कांवड़ यात्रा का स्वागत करते हैं और यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मुरादाबाद में प्रस्तावित रैली पर हसन ने तटस्थ रुख अपनाते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल को जनता तक पहुँचने का अधिकार है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 'निष्पक्ष जाँच हो'

श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर हसन ने कहा कि एक मुसलमान होने के नाते भी उन्हें इस घटना से 'अपमान महसूस होता है।' उन्होंने माँग की कि चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, पूर्ण और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषी को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।

हसन के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक साथ कई मोर्चों पर बहस छेड़ दी है — और आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह टकराव और तीखा होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वंदे मातरम बिल को सांप्रदायिक एजेंडा बताते हैं और सीजेपी युवाओं के साथ खड़े दिखते हैं। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि सपा खुद यूपी में सत्ता में रह चुकी है और उस दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता का रिकॉर्ड बेदाग नहीं रहा। वंदे मातरम पर धार्मिक आधार पर आपत्ति जताना और साथ ही राष्ट्रभक्ति का दावा करना — यह संतुलन विपक्ष के लिए हमेशा राजनीतिक जोखिम भरा रहा है। राम मंदिर चोरी पर निष्पक्ष जाँच की माँग एक सुरक्षित लेकिन प्रभावी दाँव है जो उन्हें धर्मनिरपेक्ष और जवाबदेही-समर्थक दोनों छवियाँ एक साथ देता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. एसटी हसन ने जौहर यूनिवर्सिटी पर क्या कहा?
हसन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल गवर्नर और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की थी ताकि बुलडोजर न चले और शिक्षा का मंदिर न टूटे। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से उनका भावनात्मक जुड़ाव है और आरोप लगाने वाले लोग निजी महत्वाकांक्षाओं के लिए ऐसे बयान देते हैं।
वंदे मातरम बिल पर सपा का क्या रुख है?
सपा नेता एसटी हसन ने वंदे मातरम बिल को यूपी चुनाव से पहले 'सांप्रदायिक ध्यान भटकाने की कोशिश' बताया। उन्होंने कहा कि यह विवाद ब्रिटिश काल से चला आ रहा है और इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत की अनुमति नहीं है।
सीजेपी प्रदर्शन पर लाठीचार्ज को लेकर हसन ने क्या कहा?
हसन ने जंतर-मंतर पर युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि युवा निष्पक्ष परीक्षा और भ्रष्टाचार के अंत की जायज माँग कर रहे हैं। उन्होंने BJP के 'हाईजैक' आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सही मुद्दे का समर्थन करना हाईजैकिंग नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर हसन की क्या माँग है?
हसन ने माँग की कि श्रीराम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की पूर्ण और निष्पक्ष जाँच हो। उन्होंने कहा कि एक मुसलमान होने के नाते भी उन्हें इस घटना से अपमान महसूस होता है और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली हो, उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए।
कांवड़ यात्रा रोकने के आरोपों पर हसन ने क्या जवाब दिया?
हसन ने कहा कि कांवड़ यात्रा कभी नहीं रोकी गई — केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान भी कांवड़ यात्रा का स्वागत करते हैं और यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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