20 जुलाई 2026
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सीएम धामी ने विद्युत मंत्री खट्टर से माँगी 200 MW अतिरिक्त बिजली, पिटकुल परियोजना पर भी चर्चा

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सीएम धामी ने विद्युत मंत्री खट्टर से माँगी 200 MW अतिरिक्त बिजली, पिटकुल परियोजना पर भी चर्चा

सारांश

उत्तराखण्ड के सीएम धामी ने केंद्रीय विद्युत मंत्री खट्टर से मिलकर एल-नीनो और तीर्थयात्रा सीजन के मद्देनजर 200 MW अतिरिक्त बिजली माँगी। साथ ही ₹3,638 करोड़ की पिटकुल ADB परियोजना के लिए 80:20 वित्त व्यवस्था और 10 GW पम्प्ड स्टोरेज के लिए ₹7,800 करोड़ VGF की माँग रखी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 19 जुलाई 2026 को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से नई दिल्ली में बैठक की।
केंद्रीय पूल से जुलाई 2026 के लिए 150 MW और अगस्त 2026 के लिए 200 MW अतिरिक्त विद्युत का अनुरोध किया गया।
राज्य में 10 GW पम्प्ड स्टोरेज क्षमता के लिए ₹7,800 करोड़ VGF और BESS क्षमता 500 MWh से बढ़ाकर 665 MWh करने की माँग रखी गई।
₹3,638.26 करोड़ की पिटकुल ADB पारेषण परियोजना के लिए मूल 80:20 वित्तीय व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया गया।
CEA ने परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना; ADB हिस्सेदारी 60% तक सीमित करने के सुझाव पर राज्य ने आपत्ति जताई।

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राज्य की ऊर्जा ज़रूरतों, जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प्ड स्टोरेज, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पिटकुल की एशियाई विकास बैंक (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना पर विस्तार से विमर्श हुआ।

अतिरिक्त बिजली की माँग

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय पूल से जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट और अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत आपूर्ति का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों, वर्षा में कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा और आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान विद्युत माँग में उल्लेखनीय वृद्धि की आशंका है।

पम्प्ड स्टोरेज और BESS के लिए केंद्रीय सहायता का आग्रह

मुख्यमंत्री ने राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने के लिए अगले पाँच वर्षों में ₹7,800 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने BESS की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर किए जाने और उसके अनुरूप VGF प्रदान करने का अनुरोध भी रखा। धामी ने उत्तराखण्ड को पूर्वोत्तर राज्यों की भाँति जल विद्युत परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता दिए जाने की माँग भी की।

पिटकुल की ADB परियोजना पर विशेष चर्चा

बैठक में ₹3,638.26 करोड़ लागत की पिटकुल की ADB सहायतित पारेषण परियोजना पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि इस परियोजना के लिए मूल 80:20 ADB ऋण एवं राज्यांश की वित्तीय व्यवस्था यथावत बनाए रखी जाए। परियोजना के अंतर्गत ₹2,910.61 करोड़ का ADB ऋण प्रस्तावित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना है और विद्युत मंत्रालय ने भी ADB सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। हालाँकि ADB हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव आया है, जिसे धामी ने राज्य के हित में अस्वीकार्य बताया।

विशेष श्रेणी राज्य का तर्क

मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि वित्तीय पैटर्न में बदलाव किया गया तो उत्तराखण्ड को विशेष श्रेणी हिमालयी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। इसलिए मूल 80:20 की वित्तीय व्यवस्था बरकरार रखते हुए परियोजना को स्वीकृति दी जाए। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों में ऊर्जा अवसंरचना को प्राथमिकता दे रही है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पूरा करने में उत्तराखण्ड की जल विद्युत क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएगी। केंद्र के सकारात्मक सहयोग से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र और आधारभूत संरचना को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम धामी ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से क्यों मुलाकात की?
मुख्यमंत्री धामी ने 19 जुलाई 2026 को विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से उत्तराखण्ड की ऊर्जा ज़रूरतों, पम्प्ड स्टोरेज, BESS और पिटकुल ADB परियोजना पर चर्चा के लिए मुलाकात की। एल-नीनो के कारण जल विद्युत उत्पादन घटने और तीर्थयात्रा सीजन में माँग बढ़ने की आशंका इस बैठक की तात्कालिक वजह रही।
उत्तराखण्ड ने केंद्रीय पूल से कितनी अतिरिक्त बिजली माँगी है?
राज्य ने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट और अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। यह माँग चारधाम और कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती खपत को ध्यान में रखकर की गई है।
पिटकुल की ADB परियोजना क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
यह ₹3,638.26 करोड़ की पारेषण परियोजना है जिसमें ₹2,910.61 करोड़ का ADB ऋण प्रस्तावित है और मूल वित्त व्यवस्था 80:20 (ADB:राज्य) है। केंद्र की ओर से ADB हिस्सेदारी 60% तक सीमित करने का सुझाव आया है, जिसे उत्तराखण्ड ने विशेष श्रेणी राज्य के वित्तीय लाभों के लिए हानिकारक बताते हुए अस्वीकार किया है।
उत्तराखण्ड में पम्प्ड स्टोरेज के लिए कितनी सहायता माँगी गई है?
राज्य ने लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने के लिए अगले पाँच वर्षों में ₹7,800 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता या VGF माँगी है। इसके अलावा BESS की क्षमता 500 MWh से बढ़ाकर 665 MWh करने और उसके अनुरूप VGF देने का अनुरोध भी किया गया है।
क्या केंद्र सरकार ने इन माँगों पर कोई निर्णय लिया है?
बैठक में अभी तक कोई औपचारिक स्वीकृति की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। CEA ने पिटकुल परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना है और विद्युत मंत्रालय ने ADB सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन वित्तीय व्यवस्था पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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