16 सितंबर 2026
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सीएम योगी का दावा: माफिया की तरह खत्म हुआ इंसेफेलाइटिस, गोरखपुर में IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन

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सीएम योगी का दावा: माफिया की तरह खत्म हुआ इंसेफेलाइटिस, गोरखपुर में IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन

सारांश

सीएम योगी ने गोरखपुर में IMA के 400 यूनिट क्षमता वाले चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन करते हुए दावा किया कि इंसेफेलाइटिस माफिया की तरह समाप्त हो गया है। साढ़े नौ वर्षों में MBBS सीटें 4,600 से 13,500 पार और मेडिकल कॉलेज 85 तक पहुँचे।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 16 सितंबर 2026 को गोरखपुर में IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से इंसेफेलाइटिस माफिया और मच्छर की तरह समाप्त हो चुका है।
उत्तर प्रदेश में 75 जिलों के लिए 85 मेडिकल कॉलेज ; MBBS सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हुईं।
सरकार सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू करने की योजना पर काम कर रही है।
IMA गोरखपुर के इस ब्लड सेंटर की क्षमता 400 यूनिट है; संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न हो।
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदाताओं पर अंकुश लगाने और स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 सितंबर 2026 को गोरखपुर में घोषणा की कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में दशकों तक बच्चों की जान लेने वाला इंसेफेलाइटिस अब प्रदेश से उसी तरह समाप्त हो चुका है, जैसे माफिया और मच्छर। मुख्यमंत्री इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गोरखपुर द्वारा संचालित चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जो जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराएगा।

इंसेफेलाइटिस से मुक्ति का दावा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। उन्होंने कहा, 'माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं।' गौरतलब है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस दशकों से एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रही है, जिसमें हर साल सैकड़ों बच्चों की जान जाती थी।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर ही इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं का एकमात्र प्रमुख केंद्र था, जहाँ एक ही बेड पर चार-चार मरीज भर्ती रहते थे और इंसेफेलाइटिस वार्ड में पंखे, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। अब वही बीआरडी मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बन चुका है।

उन्होंने बताया कि गोरखपुर में AIIMS स्थापित हो चुका है और महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर सहित कई जिलों में मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं। प्रदेश के 75 जिलों में अब 85 मेडिकल कॉलेज और 2 AIIMS संचालित हो रहे हैं। MBBS की सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो गई हैं और PG सीटें दोगुनी हुई हैं।

डायलिसिस और ब्लड बैंक की नई सुविधाएँ

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही है। उन्होंने बताया कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में ही गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। IMA गोरखपुर द्वारा स्थापित यह चैरिटेबल ब्लड सेंटर 400 यूनिट की क्षमता रखता है और इसका संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न हो।

रक्तदान पर जोर और पेशेवर रक्तदाताओं पर चेतावनी

मुख्यमंत्री योगी ने रक्तदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचा, तकनीक, दवाएँ और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने चिकित्सकों से सोशल मीडिया के माध्यम से स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया और कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित ऐसे दाताओं पर प्रभावी अंकुश न लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

माफिया मुक्त प्रदेश और IMA की सराहना

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि एक समय गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी माँगी जाती थी और चेंबर में घुसकर मारपीट होती थी। उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अब प्रदेश की पहचान 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है। IMA गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है। समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आने वाले समय में यह ब्लड सेंटर पूर्वी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे स्वतंत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य आँकड़ों से परखना ज़रूरी है — क्योंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के मामले ऐतिहासिक रूप से रिपोर्टिंग की कमियों से भी जूझते रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या में वृद्धि निर्विवाद है, पर 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' की गुणवत्ता और फैकल्टी की उपलब्धता एक अनुत्तरित प्रश्न बनी हुई है। IMA का चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि सरकारी रक्त बैंकों की क्षमता क्यों पर्याप्त नहीं बन पाई। नीति की घोषणा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की यही खाई असली कहानी है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी का इंसेफेलाइटिस समाप्त होने का दावा क्या है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 सितंबर 2026 को कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में साढ़े नौ वर्षों में इंसेफेलाइटिस माफिया और मच्छर की तरह समाप्त हो गया है। यह बीमारी दशकों तक इस क्षेत्र में बच्चों की जान लेती रही थी।
गोरखपुर में IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर क्या है?
यह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गोरखपुर द्वारा स्थापित 400 यूनिट क्षमता का चैरिटेबल ब्लड सेंटर है, जिसका उद्घाटन सीएम योगी ने 16 सितंबर 2026 को किया। इसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराना है ताकि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न हो।
उत्तर प्रदेश में कितने मेडिकल कॉलेज और MBBS सीटें हैं?
सीएम योगी के अनुसार प्रदेश के 75 जिलों के लिए अब 85 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और दो AIIMS भी हैं। MBBS की सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुकी हैं और PG सीटें दोगुनी हुई हैं।
जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट की क्या योजना है?
सरकार उत्तर प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस सुविधा के लिए पहले लखनऊ या BHU जाना पड़ता था, वह अब गोरखपुर में उपलब्ध है।
पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर सीएम योगी ने क्या चेतावनी दी?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर यदि प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने चिकित्सकों से ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने और जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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