सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी बोले — हार के बावजूद पार्टी का इतिहास गौरवशाली, आत्म-आलोचना ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के महासचिव एमए बेबी ने 13 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में पार्टी की राज्य समिति की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद सीपीआई(एम) का राजनीतिक इतिहास गौरवशाली और अटूट रहा है। उन्होंने पार्टी से गलतियों को खुलकर स्वीकार करने, आत्म-आलोचना को संस्कृति का हिस्सा बनाने और जनता के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
बैठक में बेबी का संबोधन
एमए बेबी ने कवि कदममनिट्टा रामकृष्णन की पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को यह समझना होगा कि वह आज जिस मुकाम पर खड़ी है, वहाँ तक कैसे पहुँची और किन मोड़ पर चूक हुई। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सीपीआई(एम) के खिलाफ ऐसा अभियान चलाया जा रहा है जैसे पार्टी का कोई इतिहास ही न हो।' उन्होंने जोड़ा कि गलतियाँ हुई हैं, परंतु उन्हें छुपाना नहीं बल्कि सुधारना ज़रूरी है।
बेबी ने ईएमएस नंबूदरीपाद की वैचारिक विरासत का स्मरण करते हुए कहा कि पार्टी को अपनी चुनावी हार के कारणों की गहन जाँच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) ने पराजय के कारण चिह्नित कर लिए हैं, लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या पार्टी अपने विरुद्ध रची गई 'झूठी कहानियों' के असर को समय रहते नहीं भाँप पाई।
1959 के 'मुक्ति संघर्ष' से तुलना
बेबी ने इन 'झूठी कहानियों' की तुलना 1959 के 'मुक्ति संघर्ष' से की और कहा कि यह केरल के इतिहास में झूठे प्रचार का सबसे बड़ा उदाहरण था। उनके अनुसार वैसी ही प्रवृत्ति आज भी जारी है और पार्टी को इसका मुकाबला तथ्यों और संगठनात्मक ताकत से करना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) विपक्ष में है और अगले चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
आलोचना की चार श्रेणियाँ
बेबी ने कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रति उठने वाली आलोचनाओं को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया। पहली श्रेणी में वे लोग हैं जो जमीनी स्तर पर पार्टी के कमज़ोर होने से चिंतित हैं। दूसरी श्रेणी में वे हैं जो गलत धारणाओं के निर्माण से परेशान होते हैं। तीसरी श्रेणी उन लोगों की है जो जानबूझकर गलत धारणाएँ बनाते और फैलाते हैं, जबकि चौथी श्रेणी में पार्टी के भीतर के ही आंतरिक आलोचक आते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक आलोचना केवल संघ परिवार के हस्तक्षेप जैसे बाहरी मुद्दों तक सीमित रहे, जबकि संगठनात्मक अंदरूनी मसलों पर पार्टी के भीतर खुलकर चर्चा और समीक्षा होनी चाहिए।
LDF की वापसी की रणनीति
बेबी ने ज़ोर देकर कहा कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सत्ता में केवल इसलिए नहीं लौटेगा क्योंकि वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार कमज़ोर है, बल्कि लेफ्ट अपनी खुद की वैचारिक और संगठनात्मक शक्ति के दम पर वापसी करेगा। उन्होंने पार्टी सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन को कम्युनिस्ट जीवन-शैली के अनुरूप ढालें और पार्टी कमेटियों के भीतर स्वतंत्र एवं निडर आलोचना का माहौल बनाएँ।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे वक्त हुई है जब केरल में सीपीआई(एम) अपने संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिश में लगी है। बेबी का यह संबोधन पार्टी के आंतरिक पुनर्गठन और जन-संपर्क को नए सिरे से मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी के सामने अगली परीक्षा यह होगी कि वह आत्म-आलोचना को ज़मीनी बदलाव में कैसे तब्दील करती है।